(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) सेना में महिलाओं का स्थायी कमीशन (Permanent Commission to Women : Significance and Benefits)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) सेना में महिलाओं का स्थायी कमीशन (Permanent Commission to Women : Significance and Benefits)



यूँ तो भारत के संविधान में साफ़ तौर पर समानता के अधिकार का ज़िक्र है और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार तमाम योजनाएं भी बना रही है लेकिन अगर सेना की बात करें तो अभी तक वहां अभी तक संविधान के इन प्रावधानों और महिला सशक्तिकरण को हाशिये पर ही रखा गया था। हम बात कर रहे हैं सेना में महिलाओं के स्थाई कमिस्शन की जिसे अभी तक सेना और सरकार द्वारा नकारा जा रहा था लेकिन महिलाओं के स्थायी कमीशन का रास्ता अब साफ़ हो गया है

सर्वोच्च न्यायलय द्वारा सुनाये गए फैसले के 5 महीने बाद आखिरकार सरकार ने बीते गुरूवार को भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को सेना में स्थाई कमिशन देने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।

इससे पहले महिलाओं को पांच साल का शॉर्ट सर्विस कमीशन दिया जाता था . गौर तलब है स्थायी कमिशन के लिए एक याचिका दायर की गयी थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 फ़रवरी को भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का फ़ैसला सुनाया थ। फैसले के 5 महीने के बाद अब रक्षा मंत्रालय ने महिलाओं को भारतीय सेना में स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए मंज़ूरी दे दी है । इस संबंध में एक औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है

शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में महिलाएं केवल 10 या 14 साल तक सेवाएं दे सकती थी । इसके बाद उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी जाती थी। नए फैसले के लागू होने के बाद महिलाओं को स्थायी कमीशन के लिए आवेदन करने का भी अवसर मिलेग। इससे महिलाओं की सेना में सेवाएं आगे भी जारी रह पाएंगी। इसके साथ साथ रैंक के हिसाब से सेवानिवृत्ति का हक़ , पेंशन और सभी भत्ते भी महिलाओं को दिए जायेंगे

गौर तलब है की साल 1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए महिलाओं का पहला बैच भर्ती हुआ थ। साल 1992 में इसकी अवधी पाँच साल की थी। साल 1992 के बाद के सालों में इस सेवा की अवधि को 10 साल किया गया। साल 2006 में इसकी अवधि 10 साल से बढ़ाकर 14 साल कर दी गयी।

सेना के पुरुष अधिकारी आम तौर पर शॉर्ट सर्विस कमीशन के 10 साल पूरे होने पर अपनी काबिलियत के के मुताबिक़ स्थायी कमीशन के लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन महिलाएं इस हक़ से महरूम थी।मौजूदा वक़्त में में महिलाओं की भर्ती सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के ज़रिए होती है जबकि पुरुषों की भर्ती सीधे तौर पर स्थायी कमीशन के ज़रिये होती है।

10 शाखाओं में होगा स्थायी कमीशन

भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद के मुताबिक़ सरकार का ये फ़ैसला महिला अधिकारियों को सेना में बड़ी भूमिकाएं निभाने के लिए सशक्त करेगा।

एक जानकारी के मुताबिक़ महिलाओं को 10 शाखाओं- आर्मी एयर डिफ़ेंस (एएडी), सिग्नल्स, इंजीनियर्स, आर्मी एवियेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई), आर्मी सर्विस कॉर्प्स (एएससी), आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स (एओसी) और इंटेलीजेंस कॉर्प्स में स्थायी कमीशन दिया जाएगा।

मौजूदा वक़्त में महिलाओं को जज एवं एडवोकेट जनरल (जेएजी) और आर्मी एजुकेशनल कोर (एईसी) में स्थायी कमीशन दिया जाता है

महिलाओं के स्थायी कमीशन की लड़ाई नयी नहीं है। इसके मद्देनज़र पहली याचिका साल 2003 में डाली गई थ। साल 2008 में ग्यारह महिला अधिकारियों ने फिर से हाई कोर्ट में याचिका डाल। कोर्ट ने महिला अधिकारियों के हक़ में फ़ैसला दिया। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। हालांकि फ़रवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी महिला अधिकारियों के पक्ष में ही फ़ैसला दिया.

अब तक सेना में महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के चलते लेफ्टिनेंट कर्नल से आगे नहीं जा सकती थी। लेकिन अब महिलाओं को एडवांस लर्निंग के विभागीय कोर्सेज़ में भी भेजा जाएग। महिलाएं स्थायी कमीशन के लिए चुने जाने पर फ़ुल कर्नल, ब्रिगेडियर और जनरल भी बन सकती है।

दूसरा फ़ायदा ये है कि सरकार का आदेश आने पर अब महिलाओं की भर्ती के लिए जो विज्ञापन आएंगे उनमें साफ़तौर पर लिखा जाएगा कि आपको योग्यता के आधार पर स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएग। पहले के विज्ञापनों में सिर्फ़ 14 साल के शॉर्ट सर्विस कमीशन का ज़िक्र होता था।

क्यों हुआ स्थायी कमीशन का विरोध

महिलाएं लंबे समय से भारतीय सेना में स्थायी कमीशन की माँग कर रही हैं. लेकिन, सेना और सरकार के स्तर पर इसका हमेशा विरोध होता रहा है. इसके लिए कभी शादी, कभी बच्चे तो कभी महिलाओं को इसके लिए अयोग्य और अबला ठहराया गया। महिला सैन्य अधिकारियों का कहना है की इसके पीछे पुरुष प्रधान सोच बड़ा कारण रही है