(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्ट्रीय शिक्षा दिवस - 11 नवंबर (National Education Day - 11th November)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्ट्रीय शिक्षा दिवस - 11 नवंबर (National Education Day - 11th November)


महत्वपूर्ण बिंदु

हाल ही में बीते 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप मे देश भर में मनाया गया। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस को स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हमारे आज के DNS में हम मौलाना कलाम के जीवन से जुड़े कुछ खास तथ्यों को जानेंगे साथ ही भारत के स्वंतत्र संग्राम में उनकी भूमिका व योगदान की भी चर्चा करेंगे।

  • मौलाना कलाम स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री ,एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,बेहतरीन लेखक व एक उच्च शिक्षाविद भी थे।
  • मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म मक्का,सऊदी अरब में 1888 में हुआ था,जो उस वक्त आँटोमन साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था। 1890 में वे अपने परिवार के साथ कलकत्ता आ गये और यही रहकर उन्होने अपनी शिक्षा ग्रहण की।
  • मौलाना कलाम शुरूआत से ही बहुत तार्किक थे और उन्होनें हमेशा से ही अग्रेजों की साम्राज्यवादी नीतिओं का विरोध किया व मुस्लिमो को साम्प्रदायिता की सोंच से दूर रखने का भरसक प्रयास किया।
  • उनका राजनैतिक सफर 1905 से बंगाल के विभाजन के बाद शुरू हुआ जब वे अरब्रिन्द घोष और श्याम सुन्दर चक्रवर्ती जैसे बंगाल के नेताओं के संपर्क में आये।
  • 1920 के बाद से हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हर बड़े आन्दोलन में उन्होने भाग लिया। इतना ही नहीं 1923 व 1940 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में वे अध्यक्ष पद के लिये भी चुने गये।
  • उनके द्वारा 1912 में शुरू किये गये राष्ट्रवादी साप्ताहिक अखबार ‘अल-हिलाल’ ने उन्हे काफी प्रसिद्धि दिलाई
  • असहयोग आंदोलन में भाग लेने के बाद वे गाँधी जी के सबसे बड़े समर्थकों में से एक हो गये व उनकी विचारधारा का प्रचार प्रसार करने लगे।
  • भारत आये कैबिनेट मिशन के साथ बातचीत करने के लिये व समझौता करने के लिये कांग्रेस द्वारा बनाई गई कमेटी के वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे।
  • उन्होने साम्प्रदायिक आधार पर देश के बँटवारे का पुरजोर विरोध किया

आइये अब मौलाना आजाद के स्वतंत्र भारत मे योगदान को जानते है

  • एक शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होनें Quality education या गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात कही,उन्होने स्कूलों को एक प्रयोगशाला बताया जहाँ देश का भविष्य पलता है।
  • उन्होने महिलाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया ।
  • उनकी सोच कितनी दूरगामी थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होने भारत के कुछ सबसे प्रमुख संस्थानों की नींव डाली
  • इन संस्थानों में Indian Institute of Technology यानि (IIT),Indian Institute of Science यानि IISC, School of planning and Architecture और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानि UGC आदि आते है।
  • इसके साथ ही संस्कृति व साहित्य के सबसे प्रमुख केन्द्रों जैसे संगीत नाटक अकादमी,ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी आदि भी उनके ही कार्य काल के दौरान स्थापित किये गये।
  • भारत देश को उनके द्वारा दिये गये इस योगदान के कारण उन्हे मरणोपरान्त 1992 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
  • साथ ही 2008 से हर साल 11 नंवबर का दिन उनकी याद में शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है प्रथम शिक्षा दिवस का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री मती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 2008 में विज्ञान भवन नई,दिल्ली में किया था।