(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) टिड्डी अटैक: टिड्डियों से राष्ट्रीय आपातकाल (Locust Attack : National Emergency)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) टिड्डी अटैक: टिड्डियों से राष्ट्रीय आपातकाल (Locust Attack : National Emergency)


पाकिस्तान आए दिनों सुर्ख़ियों में बना रहता है। कभी अपनी नापाक हरकतों के लिए तो कभी जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए। हालाँकि इन दिनों पाकिस्तान किसी और वहज से चर्चा में है। ये वजह इतनी गंभीर है कि पाकिस्तान को इसके चलते राष्ट्रीय आपातकाल तक की घोषण करनी पड़ी है। दरअसल हुआ ये है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में टिड्डियों का हमला हुआ है। इस घटना का आलम इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिन - जिन इलाकों में टिड्डियों का हमला हुआ है वहां की लगभग पूरी फसल बर्बाद हो गई है। खबरों से पुष्टि होती है टिड्डियों के हमले से पाकिस्तान को लाखों रुपए की फसल के नुकसान का सामना करना पड़ा है।

DNS में आज हम जानेंगे टिड्डियों के हमले के बारे में साथ ही समझेंगे टिड्डियों से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में...

पाकिस्तान के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब सिंध और पंजाब में हमले के बाद टिड्डी दल खैबर पख्तूनख्वा में दाख़िल हुए है। जानकारों के मुताबिक़ मौजूदा वक़्त में टिड्डियों का हमला जलवायु परिवर्तन से ही जुड़ा है। देखा जाए तो गर्मियों और बरसात के मौसम में ही टिड्डी दल सक्रिय होते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में मौजूद कम तापमान के चलते टिड्डी दल सर्द के इन महीनों में भी सक्रीय हैं।

सोमालिया ने भी बीते दिनों टिड्डियों के हमले को लेकर राष्ट्रीय आपात की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोमालिया और इथियोपिया जैसे देश पिछले 25 सालों में सबसे बड़े टिड्डियों के हमले का शिकार हुए हैं। इसके अलावा इन देशों को पिछले 25 सालों में टिड्डियों के इस हमले के कारण भारी खाद्य आपूर्ति का नुकसान झेलना पड़ा है।

दिसम्बर महीने में पाकिस्तान से सटे गुजरात के कुछ ज़िलों में भी टिड्डियों के समूहों ने हमला किया था। उन दिनों बनासकांठा टिड्डियों के हमले से सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िला था। उस वक़्त जानकारों का कहना था कि टिड्डियाों के समूहों का भारत आना के पीछे दक्षिण-पश्चिमी-मानसून का लंबे वक़्त तक प्रभावी रहना था। देखा जाए तो ये टिड्डी दल अफ्रीकी देशों सूडान और इरिट्रिया से सऊदी अरब और ईरान के रास्ते पाकिस्तान में दाख़िल हुईं है।

टिड्डियो के बारे में बताएं तो टिड्डी एक तरह के बड़े उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं और इनके पास उड़ने की बेमिसाल क्षमता होती है। देखा जाए तो सामान्य तौर पर ये हर रोज़ 150 किलोमीटर तक उड़ सकते हैं। भारत में टिड्डियों की प्रजातियाों के बारे में आपको बताएं तो इनमें रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, बॉम्बे टिड्डी और ट्री टिड्डी जैसी प्रजातियां पाइन जाती हैं। दरअसल टिड्डियों के ये समूह मुख्य रूप से वनस्पति के लिये बड़ा खतरा होते हैं। एक वयस्क टिड्डी प्रतिदिन अपने वज़न के बराबर भोजन यानी लगभग 2 ग्राम वनस्पति खा सकती है। दरअसल टिड्डियों के ये समूह दिन के दौरान उड़ते रहते हैं और रात के वक़्त खेतों में ही रुक जाता है। ऐसे में टिड्डियों के इन समूहों को भगाना काफी दूभर हो जाता है जोकि खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद ही जटिल समस्या है।

देश में टिड्डी चेतावनी संगठन LWO टिड्डियों पर शोध करना, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क और समन्वय स्थापित करना और टिड्डी चेतावनी संगठन के सदस्यों, राज्य के अधिकारियों, BSF कर्मियों और किसानों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करना है। साथ ही टिड्डियों के कारण पैदा होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों से उबरने के लिये टिड्डी नियंत्रण अभियान शुरू करना भी टिड्डी चेतावनी संगठन LWO के कामों में शुमार है। टिड्डी चेतावनी संगठन LWO कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अंतर्गत आता है। मौजूदा वक़्त में इसका मुख्यालय फरीदाबाद में स्थित है।