(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) इंडिया तपेदिक रिपोर्ट 2020 (India TB Report 2020)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) इंडिया तपेदिक रिपोर्ट 2020 (India TB Report 2020)



हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'इंडिया तपेदिक रिपोर्ट 2020' जारी की.. टीबी की बीमारी से जुड़े इस वार्षिक रिपोर्ट को वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से जारी किया गया.

डीएनएस में आज हम जानेंगे 'इंडिया तपेदिक रिपोर्ट 2020' के बारे में और साथ ही समझेंगे इससे जुड़े कुछ दूसरे पहलुओं को भी……

टीबी या क्षय रोग बैक्टीरिया की वजह से होता है. इस बैक्टीरिया का नाम माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस है, जो कि फेफड़ों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. टीबी एक संक्रामक रोग है जो एक इंसान से दूसरे इंसान में खांसी, छींकने या थूकने के दौरान हवा के जरिए या फिर संक्रमित सतह को छूने से फैलता है. इस बीमारी में रोगी के बलगम और खून के साथ खांसी, सीने में दर्द, कमजोरी, वजन का कम होना और बुखार के लक्षण देखे जा सकते हैं

इंडिया टीबी रिपोर्ट, 2020 के मुताबिक साल 2019 में करीब 24.04 लाख टीबी रोगियों की पहचान की गई है. यह आंकड़ा 2018 के मुकाबले 14 फ़ीसदी ज़्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में टीबी-एचआईवी से एक साथ होने वाली मौतों में 9 फ़ीसदी मौत अकेले भारत में होती है. इस मामले में, भारत दुनिया भर में दूसरे स्थान पर है। मौजूदा वक्त में, देश में 92,000 लोग ऐसे हैं, जो टीबी और एचआईवी से एक साथ पीड़ित हैं, और इनमें से हर साल तकरीबन 9,700 लोग मौत की भेंट चढ़ जाते हैं। साल 2019 में, 81 फ़ीसदी टीबी रोगी ऐसे थे, जो एचआईवी जांच को लेकर जागरूक थे. जबकि साल 2018 में यह आंकड़ा महज 67 सडसठ फ़ीसदी ही था।

पिछले 2 सालों में टीबी मरीजों के रिकवरी दर में कमी दर्ज की गई है. साल 2014-2016 के दौरान जहां यह दर 77 फ़ीसदी के आसपास थी, तो वहीं 2017-2019 के दौरान यह 73 फ़ीसदी हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 20 फ़ीसदी टीबी मरीज ऐसे हैं जो डायबिटीज से भी पीड़ित हैं. तंबाकू के इस्तेमाल के चलते टीबी के मामलों में 8 फ़ीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा वक्त में देश में 0.54 मिलियन टीवी मरीज ऐसे हैं जिनकी पहचान ही नहीं की जा सकी है। यह एक चिंता का विषय है. टीबी के कुल मामलों में देश के आधे से ज्यादा मामले महज पांच राज्यों में पाए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। टीबी नियंत्रित करने वाले बड़े राज्यों की सूची में गुजरात सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य है जबकि 50 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की सूची में नागालैंड और त्रिपुरा का नाम सबसे ऊपर है. बात अगर टीवी नियंत्रित करने वाले केंद्र शासित प्रदेशों की करें तो दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव पहले स्थान पर हैं।

टीबी की रोकथाम के लिए भारत सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं. साल 1962 में 'राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम' की शुरुआत की गई. इसके तहत बीसीजी टीकाकरण और टीवी के इलाज से जुड़े जिला टीवी मॉडल केंद्र की स्थापना की गई. साल 1976 में बीसीजी टीकाकरण को 'टीकाकरण विस्तारित कार्यक्रम' के अंतर्गत कर दिया गया. साल 1993 में 'राष्ट्रीय टीवी कार्यक्रम' को बदल कर 'संशोधित राष्ट्रीय टीवी नियंत्रण कार्यक्रम' के रूप में लागू किया गया. साल 1997 में ‘संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत टीबी के इलाज़ के लिये ‘डायरेक्टली ऑब्ज़र्व्ड थेरेपी शार्टटर्म कोर्सेज़’ यानी डॉट्स (Directly Observed Treatment, Short Course-DOTS) पद्धति को शामिल किया गया। इसके जरिए टी.बी के मरीजों का इलाज़ किया जाता है। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर टीबी से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी डॉट्स की पद्धति को ही अपनाया गया है। इस पद्धति के तहत मरीज को एक-एक दिन के अंतराल पर हफ्ते में तीन दिन डॉट्स कार्यकर्त्ता के द्वारा दवाई का सेवन कराया जाता है।

साल 2006 से 2011 तक ‘संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम’ (RNTCP) के दूसरे चरण में गुणवत्ता और सेवाओं की पहुँच में सुधार करने का लक्ष्य तय किया गया. इसके अलावा, इस चरण में, देश में, टीबी से जुड़े सभी मामलों का पता लगाने और उनका इलाज करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया।

मौजूदा वक्त में, डब्ल्यूएचओ ने साल 2020 तक दुनिया को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है जबकि भारत सरकार ने साल 2025 तक ही देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। तकरीबन 4.5 लाख से ज्यादा डॉट सेंटर देश के हर गांव में टीबी के इलाज के लिए सक्रिय हैं। RNTCP द्वारा साल 2025 तक भारत में टीबी नियंत्रण और उन्मूलन के लिये 'क्षय रोग वर्ष 2017-2025' के लिये 'राष्ट्रीय रणनीतिक योजना' जारी की गई है. यह योजना चार रणनीतिक स्तंभों (DTPB) पर आधारित है, जिसमें पहला पता लगाना (Detect), दूसरा उपचार करना (Treat), तीसरा रोकथाम (Prevent) और चौथा निर्माण (Build) है. इसके अलावा, RNTCP को अब ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ यानी NTEP के नाम से जाना जाएगा।

‘निक्षय पोषण योजना’ (Nikshay Poshan Yojana- NPY) के जरिए टीबी मरीजों को उनके पोषण के लिये वित्तीय मदद दी जाती है। साल 2019 में ‘टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान’ की भी शुरुआत की गई है जो देश में टीबी के उन्मूलन से जुड़ा कार्यक्रम है।