(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 (Drug Discovery Hackathon 2020)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 (Drug Discovery Hackathon 2020)



हाल ही में, केंद्र सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 की शुरुआत की. इस राष्ट्रीय पहल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन और केंद्रीय मानव विकास संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल द्वारा शुरू किया गया.

डीएनएस में आज हम आपको ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 के बारे में बताएंगे और साथ ही समझेंगे कि इस राष्ट्रीय पहल के फायदे क्या है…..

यह ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन कई संस्थाओं की एक संयुक्त पहल है जिनमें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद शामिल हैं. यह अपने तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है जिसका मकसद कोरोना वायरस के इलाज की खोज प्रक्रिया को बढ़ावा देना है. इसके जरिए वैश्विक स्तर पर जो भी कंपनियां कोरोना वैक्सीन बनाएंगी उसको पुरस्कार दिया जाएगा.

दुनियाभर की तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए यह हैकथॉन कई विषयों से जुड़े छात्रों के लिए खोल दिया गया है. इन विषयों में कंप्यूटर विज्ञान, फार्मेसी, रसायन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान शामिल है. यानी इन विषयों के पेशेवर, प्राध्यापक, शोधकर्ता और छात्र ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन में भाग ले सकते हैं.

इस हैकथॉन के जरिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और एआईसीटीई कोरोना की संभावित दवा के अणुओं की पहचान करने की कोशिश करेंगे. जबकि सीएसआईआर इन पहचाने गए अणुओं के प्रभाव का विश्लेषण करेगा. साथ ही सीएसआईआर दवाओं के साइड इफेक्ट्स, संवेदनशीलता और उनके संश्लेषण एवं प्रयोगशाला में परीक्षण का काम भी करेगा.

ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 में 'इनसिलिको ड्रग डिस्कवरी' के जरिए कोरोना की संभावित दवा की पहचान की जाएगी. यानी 'इन सिलिको ड्रग डिस्कवरी' का इस्तेमाल दवा का परीक्षण करने वालों की पहचान करने, रासायनिक संश्लेषण और जैविक परीक्षण में किया जाएगा. आपको बता दें कि 'इन सिलिको ड्रग डिस्कवरी' में कंप्यूटर के इस्तेमाल से दवा का विश्लेषण और परीक्षण आदि किया जाता है. आजकल औषधियों की खोज में कंप्यूटेशनल तरीकों का इस्तेमाल व्यापक रूप से किया जाता है. 'इन सिलिको ड्रग डिस्कवरी' के तरीके में सही दवा की पहचान करना सबसे पहला और सबसे अहम काम है. इस तरह यह हैकथॉन ज्यादातर औषधि की खोज के कंप्यूटेशनल पहलुओं पर फोकस करेगा...

इन-सिलिको’ड्रग डिजाइन क्या है?

इन-सिलिको’ ड्रग डिज़ाइन एक शब्द है जिसका मतलब , ‘कंप्यूटर एडेड आणविक डिज़ाइन है....इसमें आणविक मॉडलिंग, फॉर्माकोफोर ऑप्टिमाइज़ेशन, आणविक डॉकिंग, हिट/ लीड ऑप्टिमाइज़ेशन आदि जैसे टूल का उपयोग करके किया जाता है...दूसरे शब्दों में, यह कम्प्यूटेशनल विधियों की विस्तृत विविधता का उपयोग करके दवाओं का तर्कसंगत डिजाइन या खोज है...इस प्रकार यह जैव सूचना विज्ञान उपकरणों का प्रयोग करके दवा लक्षित अणुओं की पहचान है....

इस हैकथॉन में तीन ट्रैक बनाए गए हैं -

ट्रैक -1: ड्रग डिजाइन के लिए कंप्यूटेशनल मॉडलिंग या मौजूदा डेटाबेस से प्रमुख यौगिकों की पहचान करने से जुड़ा होगा. यह योगिक ऐसे होंगे, जिनमें कोरोना को रोकने की क्षमता हो.

ट्रैक-2: के तहत प्रतिभागियों को ऐसे यौगिकों की भविष्यवाणी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिन के साइड इफेक्ट्स कम से कम हो और जिनकी विशिष्टता अधिकतम और प्रभाव सिलेक्टिव हो. इसके लिए प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके नए टूल्स और एल्गोरिदम विकसित करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा.

ट्रैक-3: में उन सभी दिक्कतों पर काम करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा जो out-of-the-box प्रवृत्ति के होंगे. हर चरण के अंत में सफल टीमों को इनाम दिए जाने की योजना है. इतना ही नहीं, चरण-3 के अंत में पहचाने गए पहले 3 प्रमुख यौगिकों को सीएसआईआर और अन्य इच्छुक संगठनों में प्रायोगिक स्तर के लिए आगे ले जाया जाएगा.

सरकार का कहना है कि यह हैकथॉन दवा की खोज की प्रक्रिया में तेजी लाएगी और भारत को नए मॉडल स्थापित करने में मददगार साबित होगी. इसके जरिए कोरोना का इलाज खोजने की प्रक्रिया में भी तेजी आने की उम्मीद है.