(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2019 (Dada Saheb Phalke Award 2019)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2019 (Dada Saheb Phalke Award 2019)


मुख्य बिंदु:

केंद्र सरकार ने 24 सितंबर को, सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की.करीब पांच दशकों से हिंदी सिने जगत में सक्रिय इस महानायक ने सिस्टम के खिलाफ और संक्रमण के काल से गुज़र रहे भारत की आवाज को बुलंद किया।

रुपहले परदे का यह नायक तत्कालीन परिस्थितयों और व्यवस्था में पल रहे भ्रस्टाचार,भेद-भाव और शोषण के खिलाफ लड़ता है और सिने-प्रेमियों को यह सन्देश देता है कि इस काली रात की सुबह होगी.
बता दें कि दादा साहेब फाल्के सम्मान भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार है.वर्ष 1969 से यह सम्मान भारतीय सिनेमा और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है.गौरतलब है कि यह 66वाँ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार है.1969 में,पहली बार इस पुरस्कार को भारतीय सिनेमा की महान अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था।

आज के डीएनएस में जानेंगे दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की महत्वपूर्ण बातों को और भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन के योगदान को.

दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार है।हर साल कला और सिनेमा जगत में अप्रतिम योगदान के लिए इस सम्मान को संबंधित क्षेत्र के व्यक्ति को दिया जाता है ।डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल्स द्वारा नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में विजेता को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है।इस पूरी प्रक्रिया को केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सम्पन्न किया जाता है.
इस सम्मान को शुरू करने की प्रेरणा दादा साहेब फाल्के के विषय में जानना अत्यंत आवश्यक है,आइए आपको उनके योगदानों से रूबरू करवाते है।

दादासाहब फाल्के एक जाने-माने प्रड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे जिन्होंने अपने 19 साल लंबे करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवीज़ बनाईं। दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा के पितामह के रूप में जाना जाता है. इनका असली नाम धुंधिराज गोविन्द फाल्के था.उन्होंने ही भारत में सिनेमा की नींव रखी।

फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को त्रयंबक महाराष्ट्र में हुआ था. दादा साहेब फाल्के ने ही देश में सिनेमा की शुरुआत की और साल 1913 में उन्होंने राजा हरिश्चंद्र नाम की एक फुल लेंथ फीचर फिल्म बनाई.
बताया जाता है कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट 'द लाइफ ऑफ क्रिस्ट' फिल्म थी, यह एक मूक फिल्म थी. इस फिल्म को देखने के बाद दादा साहब के मन में कई तरह के विचार तैरने लगे तभी उन्होंने अपनी पत्नी से कुछ पैसे उधार लिए और पहली मूक फिल्म बनाई।

दादा साहब फाल्के ने 'राजा हरिश्चंद्र' से डेब्यू किया जिसे भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म कहा जाता है. बताया जाता है कि उस दौर में दादा साहब फाल्के द्वारा बनाई गई 'राजा हरिश्चंद्र' का बजट मात्र 15 हजार रुपये था।

गौरतलब है कि दादा साहब फाल्के ने फिल्मों में मह‍िलाओं को काम करने का मौका दिया. उनकी बनाई हुई फिल्म भस्मासुर मोहिनी' में दो औरतों को काम करने का मौका मिला जिनका नाम था दुर्गा और कमला था।

भारतीय सिनेमा में दादा साहब के ऐतिहासिक योगदान के चलते 1969 से भारत सरकार ने उनके सम्मान में 'दादा साहब फाल्के' अवार्ड की शुरुआत की।

इस वर्ष के विजेता श्री अमिताभ बच्चन की यात्रा की अगर बात करें तो यह काफी लम्बी और सशक्त यात्रा है,न केवल भारत के लिए अपितु सम्पूर्ण विश्व में भी अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था। उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे तथा उनकी माँ तेजी बच्चन एक उच्च शिक्षित एवं आधुनिक विचारों की महिला थीं। अमिताभ की प्रारम्भिक शिक्षा इलाहाबाद के सेण्ट मेरी स्कूल में हुई।

नौकरी करने के दौरान उनके अन्दर का अभिनेता उन्हें अभिनय की दुनिया में हाथ आजमाने के लिए उकसाता रहता था । इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और वर्ष 1969 में सत्ताईस वर्ष की उम्र में बम्बई (मुम्बई) चले गए ।

यह सच है कि सफलता किसी को आसानी से नहीं मिलती।बच्चन को भी खुद को स्थापित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। यूँ तो अमिताभ ने फिल्मों में अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में बनी फिल्स ‘सात हिन्दुस्तानी’ से की, जिसमें उनके किरदार का नाम ‘अनवर अली’ था, लेकिन फिल्म चली नहीं ।

इसके बाद वर्ष 1969 से 1972 तक का समय उनके लिए संघर्ष का था, हालाँकि इस दौरान बच्चन की कई फिल्में आईं, किन्तु राजेश खन्ना के साथ उनकी फिल्म ‘आनन्द’ विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसमें डॉ. भास्कर बनर्जी की भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया ।

अमिताभ के कैरियर में एक नया मोड़ वर्ष 1973 में प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ के रिलीज होने के बाद आया । इस फिल्म में पुलिस इंस्पेक्टर का जीवन्त अभिनय करने के कारण उन्हें ‘एंग्री यंगमैन’ कहा जाने लगा । इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झण्डे गाड़ दिए और अमिताभ बच्चन एक सुपर स्टार के रूप में हिंदी सिनेमा में स्थापित हो गए।

अमिताभ बच्चन की उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1983 में ‘पद्म श्री’ एवं 2005 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया।बीबीसी के एक सर्वेक्षण के द्वारा उन्हें 1999 में 20वीं सदी का महानायक (एक्टर ऑफ मिलेनियम) चुना गया ।

वर्ष 2002 में उन्हें इंटरनेशनल फिल्म्स एकाडेमी ने ‘पर्सनालिटी ऑफ द ईयर’ के अवार्ड से सम्मानित किया। उन्हें अब तक 12 फिल्मफेयर अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं साथ ही साथ दुनिया के कुछ प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी प्रदान की है।

उन्हें फिल्म ‘अग्निपथ’ में भूमिका के लिए वर्ष 1990 में, ‘ब्लैक’ में अभिनय के लिए वर्ष 2005 में तथा ‘पा’ में एक विशिष्ट रूप से ग्रस्त बच्चे के चुनौतीपूर्ण अभिनय के लिए वर्ष 2010 में, कुल तीन बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें फिल्मफेयर की ओर से भी 5 बार ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।

अमिताभ बच्चन भारत के गौरव हैं।जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हार न मानते हुए दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल किया वह किसी भी व्यक्ति के लिए प्रेरणा का एक अक्षय स्त्रोत है।अमिताभ इस बात पर जोर देते हैं कि जिंदगी, समय और मौका बार-बार नहीं मिलता। अतः हमें कठिनाइयों में भी कामयाबी पाने का हौसला नहीं खोना चाहिए।

बहुत कम लोगो को यह बात पता है कि उनका नाम इन्किलाब रखा जाने वाला था लेकिन उस समय के एक महान कवि सुमित्रानंदन पन्त के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया।

अमिताभ का मतलब उस आभा या प्रकाश से होता है जो कभी धूमिल नहीं पड़ सकती है. अमिताभ बच्चन की यह अमित आभा कभी धूमिल न हो और वो इसी तरह सफलता के रथ पर सवार होकर आगे बढ़ते रहे.ध्येय टीवी उनकी सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता है।




Get Daily Dhyeya IAS Updates via Email.

 

After Subscription Check Your Email To Activate Confirmation Link