(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र या कॉनटेक परियोजना (CoNTeC Project)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र या कॉनटेक परियोजना (CoNTeC Project)



देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं हालांकि बाकि देशों के मुकाबले ये मामले काफी कम हैं और मरने वाले लोगों की भी तादाद भी नियंत्रण में है। भारत सरकार ने देश के सभी राज्यों में लॉक डाउन ऐलान कर दिया है। इसके अलावा कोरोना के मर्रेज़ों के लिए भी ख़ास इंतज़ाम किये जा रहे हैं। इधर भारत के दूर दराज़ के इलाकों में सुविधाओं और काबिल डॉक्टरों की कमी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ‘राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र या कॉनटेक (CoNTeC)’ का शुभारंभ किया। डॉ हर्षवर्धन ने इसके साथ ही राज्यों के मेडिकल कॉलेजों और देश भर के अन्य एम्स के प्रमुख अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया ।उन्होंने डॉक्टरों से ‘कोविड-19’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।

आज के DNS में हम जानेंगे कॉनटेक के बारे में साथ ही भारत जैसे देश में ऐसे हालात देखते हुए सरकार के द्वारा उठाये गए कदमों की भी समीक्षा करेंगे।

‘कॉनटेक’ परियोजना दरअसल ‘कोविड-19 नेशनल टेलीकंसल्टेशन सेंटर’ का संक्षिप्त नाम है। इसकी परिकल्‍पना का श्रेय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को जाता है। इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली ने कार्यान्वित किया है।

डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक़ कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए देश भर के डॉक्टरों को वास्तविक समय में एम्‍स से जोड़ने के लिए एम्‍स में ‘कॉनटेक’ को शुरू किया गया है। डॉक्टरों की मौजूदगी चाबीसों घंटे इस केंद्र में रहेगी और यहाँ दिन रात चाबीसों घंटे काम होगा। यहां तैनात किए जाने वाले डॉक्टरों को यहाँ भोजन और ठहरने की सुविधा भी मुहैय्या कराये जाएगी। इसे एम्स में इसलिए स्थापित किया गया है, ताकि छोटे राज्य भी एम्स के डॉक्टरों के व्‍यापक अनुभवों से फायदा ले सकें। कोविड-19 के रोगियों के इलाज के लिए दुनिया भर में डॉक्टर अलग-अलग प्रोटोकॉल का उपयोग कर रहे हैं। इस केंद्र का लक्ष्‍य देश भर के डॉक्टरों को आपस में जोड़ना है, ताकि वे एक साथ प्रोटोकॉल पर चर्चा कर सकें और इसके मद्देनज़र सबसे अच्छा उपचार दे सकें।

टेलीमेडिसिन से जुड़े दिशा-निर्देश भी भारत सरकार ने अधिसूचित कर दिए हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं प्रौद्योगिकी की मदद से बड़े पैमाने पर जनता को न केवल कोविड-19, बल्कि अन्य बीमारियों के उपचार में भी काफी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इस केंद्र को शुरू किये जाने का अहम् मकसद देश के गरीब से गरीब लोगों को अच्छे से अच्छे इलाज़ उपलब्ध कराना है।

भारत एक बड़ा देश है, यहाँ की आबादी भी ज़्यादा है। ऐसे में गरीबों तक पहुंचने के लिए तकनीकी एक अहम् भूमिका अदा कर सकती है। देश के गरीब मरीजों को किसी भी सूरत में अच्छे से अच्छे इलाज से महरूम नहीं किया जाना चाहिए। वर्तमान परिस्थितयों में गरीबों को भी देश के काबिल डॉक्टरों के इलाज़ की सुविधा मिल सकेगी।

अभी पूरी दुनिया में जो हालात है उसमे तकनीकी की मदद से ही हालात को काबू किया जा सकता है और भारत को ऐसी चुनौतियों के लिए तैयारी चक चौबंद करनी होगी। डॉक्टर हर्षवर्धन की माने तो भविष्य में इस परियोजना का विस्तार किया जाएगा और विदेशों के काबिल डॉक्टरों को भी इस सुविधा के तहत जोड़े जाने की योजना है।

कोरोना बीमारी चूँकि संपर्क में आने से फैलती है और इसके इलाज़ के लिए अभी भी पूरी दुनिया में कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। इसलिए आने वाले वक़्त में सभी मेडिकल यूनिवर्सिटीज और एम्स को एक साथ जोड़ने की ज़रुरत है ताकि वे स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के लिए नीति कार्यान्वयन में और अधिक मदद कर सकें। एम्स को अपने बीच परामर्श, टेलीमेडिसिन, शिक्षा, प्रशिक्षण, सहभागिता और प्रोटोकॉल के आदान-प्रदान के लिए जिला अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित कर मानक बनने की ज़रुरत है। हमें ये याद रखना चाहिए की हम सब मिलकर ही एक दुसरे की मदद करके कोरोना जैसी बीमारी को हरा सकते हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट कॉनटेक एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।