(Daily News Scan - DNS) विज्ञान आजकल: इनसाइट - खुलेंगे मंगल के राज़ (INSIGHT: Unveiling the Secrets of MARS)


(Daily News Scan - DNS) विज्ञान आजकल: इनसाइट : खुलेंगे मंगल के राज़ (INSIGHT: Unveiling the Secrets of MARS)


मुख्य बिंदु:

6 महीने पहले अमेरिका द्वारा भेजा गया इनसाइट यान 26 नवंबर 2018 को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक लैंड कर कर गया। ये यान एक प्रकार का रोबोटिक लैंडर है, जोकि मंगल ग्रह के सतह की आतंरिक जानकारी उपलब्ध कराएगा । इस यान को इसी साल 5 मई 2018 को भेजा गया था जिसे मंगल ग्रह तक पहुंचने में कुल 485 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी। इस यान का वजन 358 किलोग्राम है जोकि अगले 2 सालों तक मंगल ग्रह की अंदरूनी परिस्थितियों की जाँच करेगा।

मंगल ग्रह हमारे सौर्यमंडल का चौथा प्लैनेट है जिसे लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। आरयन ऑक्साइड की अधिक मात्रा के कारण लाल दिखाई देने वाले इस ग्रह पर काफी वक़्त से जीवन की तलाश की जाती रही है । ये ग्रह भी पृथ्वी की ही तरह स्थलीय है जिसका मौसमी चक्र पृथ्वी से काफ़ी मिलता जुलता है।

अमेरिका द्वारा भेजे गए इनसाइट यान का पूरा नाम (Interior Exploration using Seismic Investigations, Geodesy and Heat Transport) है, जिसे सौर ऊर्जा से संचालित किया जायेगा। इस मिशन में कुल 10 देश के वैज्ञानिकों ने सहयोग किया हैं जिनमे अमेरिका जर्मनी फ्रांस और यूरोप के कुछ देश शामिल हैं। इनसाइट स्पेसक्राफ्ट को वेंडेनबर्ग एयरफोर्स स्टेशन से एटलस V के जरिये प्रक्षेपित किया था जिसे लॉकहीड मार्टिन अंतरिक्ष सिस्टम ने तैयार किया था।

इनसाइट यान का काम मंगल ग्रह से निकलने वाली सीस्मिक वेव्स यानि भूकम्पीय तरंगों का मापन करना है जिससे मंगल ग्रह के केंद्र में स्थित तरल या ठोस अवस्था का पता लगाया जाय। इसके अलावा ये रोबोटिक लैंडर सालों पहले बने चन्द्रमा पृथ्वी और मंगल के पथरीले होने का भी पता लगाएगा।

इस यान में भूकम्पीय तरंगों को नापने के लिए सिस्मोमीटर, कोर की बनावट तथा संरचना की जाँच करने के लिए रेडियो विज्ञान यन्त्र और सतह के अन्दर का तापमान पता लगाने के लिए heat flow -3 का इस्तेमाल किया गया है।

मंगल ग्रह पर इससे पहले भी कई अंतरिक्ष यान भेज जा चुके हैं। 1965 में नासा ने अपना सबसे पहला स्पेसक्राफ्ट मरीनर - 4 को मंगल ग्रह पर भेजा था जिसके द्वारा पहली बार किसी दूसरे ग्रह की तस्वीर वैज्ञानिकों को प्राप्त की हुई।

NASA के अलावा सोवियत स्पेस एजेंसी, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारत के इसरो से ही मंगल ग्रह पर यानों का सफल प्रक्षेपण किया जा सका है। भारत पहला ऐसा देश है जिसने अपने मंगल मिशन में पहली ही बार में सफलता पा ली थी। जिसके बाद भारत मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने वाला एशिया का पहला देश बन गया।

भारत के इस प्रक्षेपण को मंगलयान-1 नाम से जाना जाता है। जिसे 5 नवंबर 2013 को श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से भेजा गया था। भारत के मंगलयान -1 को PSLV C - 23 रॉकेट से भेजा गया था जो कि 24 सितम्बर 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँच गया था। ये यान 6 महीने के लिए डिजाइन किया था जो की अभी भी कार्यरत है।

इसके आलावा भारत अपने दूसरे मंगलयान - 2 की भी तयारी में लगा हुआ है। जिसे अनुमानित साल 2021 से 2023 के बीच पूरा कर लिया जायेगा।