(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (08 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (08 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

प्रकाश स्तंभ केन्द्रों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना

  • पोत परिवहन मंत्रालय ने कहा कि उसने करीब 194 मौजूदा प्रकाश स्तंभों (लाइटहाउस) को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनायी है।
  • उन प्रकाश स्तंभों को चिन्हित किया जाएगा जो 100 साल से अधिक पुराने हैं।
  • इस कदम का मकसद प्रकाश स्तंभ और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा लोगों को इनसे जुड़े समृद्ध इतिहास के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।

'इंडिया ग्लोबल वीक'

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार से ब्रिटेन में आयोजित 'इंडिया ग्लोबल वीक 2020' में एक प्रमुख विश्वव्यापी संबोधन देंगे। उम्मीद की जा रही है कि पीएम का संबोधन भारत के व्यापार और विदेशी निवेश की संभावनाओं पर केंद्रित होगा।
  • कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऑनलाइन मंच पर आयोजित किया जा रहा है जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री पीयूष गोयल, विमानन और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और कौशल विकास मंत्री महेंद्र नाथ पांडे भारत की ओर से प्रमुख वक्ताओं में शामिल हैं। ब्रिटेन की ओर से प्रिंस चार्ल्स आयोजन में एक विशेष संबोधन देंगे। इनके अलावा विदेश मंत्री डोमिनिक राब, गृह मंत्री प्रीति पटेल, स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री लिज ट्रस संबोधित करेंगे।

विशाखापत्तनम गैस लीक हादसा

चर्चा में क्यों?

  • आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एलजी पॉलीमर की इकाई में हुए गैस लीक हादसे की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार समिति ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि खराब सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन राहत प्रक्रिया ध्वस्त होना हादसे की मुख्य वजह रहीं।
  • राज्य के विशेष मुख्य सचिव (पर्यावरण व वन) नीरभ कुमार प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी को सौंपी गई 4,000 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षा मानकों को लेकर एलजी की तरफ से काफी अनियमितताएं बरती गईं।

क्या कहा गया रिपोर्ट में?

  • एलजी ने सुरक्षा मानकों के प्रबंधन में लापरवाही बरती है। लोगों में सुरक्षा मानकों की जागरूकता की कमी के साथ-साथ आपातकाल के दौरान राहत कार्य की व्यवस्था भी लचर रही। रिपोर्ट के अनुसार, हादसा एलजी इकाई के एम-6 टैंक से अनियंत्रित मात्रा में स्टैरीन वाष्प के उत्सर्जन के कारण हुआ। इसके अलावा टंकी की खराब डिजाइन और दोषपूर्ण कूलिंग प्रणाली आदि भी हादसे की वजहें रहीं।

पृष्ठभूमि

  • बता दें कि सात मई को फैक्ट्री में हुए गैस लीक हादसे में 12 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 585 लोग बीमार हो गए थे। मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने उच्चाधिकार समिति का गठन किया था।

तुरंत कस्टम्स कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष श्री एम. अजीत कुमार ने केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल) में शामिल किए गए अनेक नए और आधुनिक परीक्षण उपकरणों का अनावरण किया, जिससे सीमा शुल्क विभाग की आंतरिक परीक्षण क्षमता काफी बढ़ जाएगी। ऐसे में पहले के मुकाबले अब कहीं ज्‍यादा तेजी से आयात और निर्यात क्लीयरेंस संभव हो पाएगी। उन्होंने सीबीआईसी के प्रमुख कार्यक्रम 'तुरंत कस्‍टम्‍स' के तहत 'कॉन्टैक्टलेस कस्टम्स' में आवश्‍यक सहयोग देने के लिए आईटी संबंधी अभि‍नव सुविधाओं का भी शुभारंभ किया।

नए पहल के बारे में

  • 'कॉन्टैक्टलेस कस्टम्स' को बढ़ावा देने के लिए अनावरण की गई आईटी सुविधाओं से निर्यातक 'आइसगेट' के माध्यम से अपने बैंक खाते एवं एडी कोड में परिवर्तनों का स्‍वत: ही प्रबंधन कर सकेंगे और इसके साथ ही सीमा शुल्क अधिकारी से संपर्क किए बिना ही 'आइसगेट' पर पंजीकरण भी करा सकेंगे।
  • एक प्रमुख नवाचार के तहत आईसीईएस में बॉन्डों को स्वचालित या स्‍वत: डेबिट किया जा सकेगा जिससे मैनुअल रूप से किए गए डेबिट को प्राप्‍त करने के लिए आयातक को अब से कस्टम हाउस नहीं जाना पड़ेगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि बॉन्ड में शेष राशि को अब से आयात दस्तावेज में दर्शाया जाएगा जिससे आयातकों को अपने आयात की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अध्यक्ष ने इन अभिनव सुविधाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जिससे सीमा शुल्क अधिकारियों से संपर्क करने की जरूरत नहीं के बराबर रह जाएगी।
  • एक महत्वपूर्ण बात यह है कि 'बगैर उपस्थिति आकलन (फेसलेस असेसमेंट)' के पहले चरण के लिए बेंगलुरू और चेन्नई जोन में स्थापित एकल बिंदु संपर्क (इंटरफेस) की सुविधा प्रदान करने से हो रहे लाभों को ध्‍यान में रखते हुए सीबीआईसी 15 सितंबर 2020 से सभी कस्टम प्रकोष्‍ठों में 'तुरंत सुविधा केंद्र (टीएसके)' की स्थापना करेगा। जब भी सीमा शुल्क वि‍भाग किसी दस्तावेज जैसे कि 'उत्‍पाद के मूल देश संबंधी प्रमाण पत्र में कोई विकृति' हो जाने पर उपयुक्‍त दस्‍तावेज को प्रस्तुत करना आवश्यक बताएगा, तो वैसी स्थिति में टीएसके ही अब से कस्टम प्रकोष्‍ठों में एकमात्र संपर्क बिंदु या केंद्र होगा। इससे कस्‍टम क्‍लीयरेंस प्रक्रिया के अब और भी आसान हो जाने की उम्मीद है।

क्या है तुरंत कस्टम्स कार्यक्रम?

  • “तुरंत कस्टम्स” पहल का मुख्य घटक फेसलेस असेसमेंट है जिसको विभिन्न चरणों में 1 जनवरी 2021 तक पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, आयातकों के सामान का क्लीयरेंस फेसलेस, कांटेक्टलेस और पेपरलेस हो जायेगा।
  • इस कार्यक्रम के द्वारा किये गए सुधार का मुख्य बल आयातकों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के लिएसमय और लागत को कम करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के उन्नत उपयोग पर आधारित हैं।
  • इससेवर्ल्ड बैंक के डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के सीमा-पार व्यापार मानकों के सन्दर्भ मेंभारत की रैंकिंग मेंऔर भी सुधारहो सकेगा।
  • निर्यातके लिए पेपरलेस दस्तावेज का शुभारंभ इसी की अगलीकड़ी है।शिपिंगबिल को इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजने से इन दस्तावेजों को कागज में प्रस्तुत करने कीवर्तमान आवश्यकता दूर हो जायेगी, जिससे ग्रीनकस्टम्स कोभी बढ़ावा मिलेगा।

रेलवे का मिशन शीघ्र

  • भारतीय रेलवे (Indian Railways) यात्री गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इस समय पटरियों पर बहुत कम ट्रेनें चल रही हैं और रेलवे इस मौके पूरा फायदा उठा रहा है। लॉकडाउन के दौरान रेलवे ने सुरक्षा, रखरखाव और मरम्‍मत से जुड़ी 200 से ज्‍यादा पुरानी परियोजनाओं को पूरा किया।
  • इसी क्रम में रेलवे 'मिशन शीघ्र' (Mission Sheeghra) के तहत लखनऊ डिवीजन में 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से मालगाड़ी (Freight Train) चलाने में सफल रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने खुद ट्वीट कर मालगाड़ी के 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की जानकारी साझा की है। उन्‍होंने ट्वीट के साथ मालगाडी के स्‍पीडोमीटर का वीडियो भी शेयर किया है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद

चर्चा में क्यों?

  • दुनियाभर में चर्चित इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने दावा किया है कि उसने विश्‍वभर में इजरायली दूतावासों पर हाल ही में किए गए ईरानी हमले को व‍िफल कर दिया है। मोसाद ने कहा कि ये हमले बेहद सुनियोजित तरीके से ईरान की ओर से किए गए थे।

पृष्ठभूमि

  • इजरायल और उसके धुर विरोधी ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। पिछले दिनों इजरायल ने भूमिगत नतान्ज परमाणु स्थल पर साइबर हमला करके उसे बर्बाद कर दिया था। इजरायल का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है। माना जा रहा है कि इसी हमले का जवाब देने के लिए ईरान यूरोप में हमले की साजिश रची थी। मोसाद ने इस ईरानी साजिश को विफल कर दिया है।
  • ईरान ने पुष्टि की है कि भूमिगत नतान्ज परमाणु स्थल पर क्षतिग्रस्त हुई इमारत असल में एक नया सेंट्रिफ्यूज केंद्र था। सेंट्रिफ्यूज वह मशीन होती है जिसमें विभिन्न घनत्व वाले द्रवों को या ठोस पदार्थ से तरल पदार्थों को अलग करने के लिए सेंट्रिफ्यूजल फोर्स का इस्तेमाल होता है।

मोसाद के बारे में

  • मोसाद का मुख्यालय इजराइल के तेल अवीव शहर में है। इसका गठन 13 दिसंबर, 1949 को 'सेंट्रल इंस्टीट्यूशन फॉर को-ऑर्डिनेशन' के तौर पर हुआ था। यह इजरायल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी है, जैसे कि भारत में रॉ है। इस एजेंसी को किलिंग मशीन के नाम से भी बुलाया जाता है, जो दुनिया भर में छिपे अपने दुश्मनों को ढूंढ-ढूंढ कर मार डालती है। मोसाद एजेंट सीआईए, एमआई 5, एमआई 6 के साथ मिलकर काम करते हैं। मोसाद के ज्यादातर एजेंट इसराइली सैन्य बलों से आते हैं।

नीलम-झेलम और कोहाला हाइड्रो पावर परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • पाकिस्तान और चीन के खिलाफ पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया है। नीलम और झेलम नदियों पर बांध के अवैध निर्माण के खिलाफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद शहर में चीन और पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नीलम झेलम और कोहाला हाइड्रो पावर परियोजनाओं के अवैध निर्माण के विरोध में स्थानीय निवासियों द्वारा एक विशाल विरोध रैली आयोजित की गई थी।

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में कोहाला में 2.4 बिलियन डॉलर की लागत से 1,124 मेगावॉट जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक चीनी कंपनी और पाकिस्तान और चीन की सरकारों के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत PoK में झेलम नदी पर बनाया जा रहा हाइड्रोपावर प्लांट कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड (KHCL) को दिया गया है, जो चाइना थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन (CTGC) की सहायक कंपनी है।
  • इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में ''आजाद पत्तन जलविद्युत परियोजना'' स्थापित करने के लिए चीन की एक कंपनी ने पाकिस्तान के साथ 150 करोड़ अमेरिकी डॉलर के समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर किए। यह परियोजना पीओके के सुधनोती जिले में झेलम नदी पर है और इसके 2026 में पूरा होने की उम्मीद है। यह परियोजना महत्वाकांक्षी चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा है।

उइगर समुदाय (Uygar community)

चर्चा में क्यों

  • निर्वासित उइगरों के एक समूह ने उइगर समुदाय के नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध की जांच कर रहे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत में शी जिनपिंग सहित वरिष्ठ चीनी अधिकारियों के शामिल होने के सबूत पेश किए हैं।
  • उइगर समुदाय के दो संगठनों ने इंटरनेशनल कोर्ट में मामला दाखिल किया है, उनमें ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एक्जाइल (ETGE) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकेनिंग मूवमेंट (ETNAM) का नाम शामिल है।

कौन है उइगर समुदाय?

  • उइगर मुसलमान एक तुर्क जातीय समूह है, जो कि चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं। तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है।
  • शिनजियांग प्रांत में इस बहुसंख्यक उइगर समुदाय को संतुलित करने के लिन चीन की सरकार ने हान समुदाय के लोगों को यहाँ बसाना शुरू किया।
  • साथ ही चीन की सरकार द्वारा उइगर मुस्लिमों पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई हैं। उन्हे धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है, रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर पाबंदी है।
  • इसके अलावा दस लाख से ज्यादा उइगरों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है। चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र कहता है।
  • शिनजियांग, उत्तर पश्चिमी चीन का सबसे बड़ा स्वायत्त क्षेत्र है और खनिजों से समृद्ध है। इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।
  • चीन और मध्य पूर्व को जोड़ने वाला प्राचीन सिल्क रोड व्यापार मार्ग शिनजियांग से होकर गुजरता है। चीन CPEC के माध्यम से शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह से जोड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के बारे में

  • ICC एक अर्न्तसरकारी अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण है जो कि दुनिया भर में हुई आपराधिक घटनाओं की सुनवाई करता है।
  • ICC मुख्यतः 4 मुद्दों से सम्बन्धित सुनवाई ही करता है जिनमे मानवता के खिलाफ अपराध (Crime against humanity), जनसंहार (Genocide), युद्ध के दौरान हुए अपराध (War Crime)और Crime of aggression आते हैं।
  • ICC की नींव 1 जुलाई 2002 को अपनाये गये रोम कानून के साथ की गई थी और इसका मुख्यालय नीदरलैड्स के हेग में स्थित है।
  • ICC में कुल 123 देश सदस्य हैं। गौरतलब है की भारत अमेरिका, चीन, इजराइल और रूस आदि ICC के सदस्य नहीं है।

:: अर्थव्यवस्था ::

वैश्विक रियल्टी पारदर्शिता सूचकांक 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में वैश्विक रियल्टी पारदर्शिता सूचकांक जारी किया गया।वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में भारत का स्थान 34वां रहा है।

वैश्विक रियल्टी पारदर्शिता सूचकांक के बारे में

  • वैश्विक संपत्ति सलाहकार कंपनी जेएलएल इस द्वि-वार्षिक सर्वेक्षण को करती है। सूचकांक, डेटा उपलब्धता, इसकी प्रामाणिकता और सटीकता, सार्वजनिक एजेंसियों के साथ-साथ रियल्टी क्षेत्र के हितधारकों, लेनदेन प्रक्रियाओं, नियामक और कानूनी माहौल सहित संबंधित लागत एवं विभिन्न कारकों का मूल्यांकन करते हुए पारदर्शिता का आकलन किया जाता है।

वैश्विक रियल्टी पारदर्शिता सूचकांक 2020 से जुड़े तथ्य

  • सूचकांक में कुल 99 देशों की रैंकिंग की गयी है।
  • इसमें शीर्ष पर ब्रिटेन है। इसके बाद क्रमश: अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और कनाडा देश शीर्ष पांच में शामिल है। शीर्ष 10 देशों को उच्च पारदर्शी, 11 से 33 को पारदर्शी श्रेणी में रखा गया है।
  • भारत के पड़ोसी देश चीन की इस सूचकांक में रैंकिंग 32, श्रीलंका की 65 और पाकिस्तान की 73वां स्थान है।
  • वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में भारत का स्थान 34वां रहा है। रियल एस्टेट बाजार से जुड़े नियामकीय सुधार, बाजार से जुड़े बेहतर आंकड़े और हरित पहलों के चलते देश की रैंकिंग में एक अंक का सुधार हुआ है। वर्ष 2018 में भारत की रैंकिंग 35, वर्ष 2016 में 36 और 2014 में 39 थी। देश के रियल एस्टेट बाजार को वैश्विक स्तर पर 'आंशिक-पारदर्शी' श्रेणी में रखा गया है।
  • भारत ने पिछले कुछ वर्षों में Global Transparency Index में लगातार सुधार देखा है। वास्तव में इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ भारत उन देशों में से एक हैं, जिन्होंने सकारात्मक सरकारी समर्थन और पारदर्शिता के उन्नत पारिस्थितिकी तंत्र के कारण अधिकतम सुधार देखा है। विशेष रूप से भारत में पारदर्शिता के लिए राष्ट्रीय आरईआईटी ढांचे का एक बड़ा योगदान रहा है । ”

देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार के लिए उठाये गए कदम

  • सरकार द्वारा प्रमुख सुधारों के प्रयास और भारतीय अचल संपत्ति में लगातार सुधार के प्रभाव ने वैश्विक निवेशकों को उत्साहित किया है। संस्थागत निवेश ने पिछले तीन वर्षों में सालाना 5 बिलियन डॉलर का एक नया मानदंड बनाया।
  • केंद्र सरकार का 2022 तक 'सभी के लिए आवास' प्रदान करने का उद्देश्य नियामक और राजकोषीय प्रोत्साहनों के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है और साथ ही किफायती आवास में निवेश के लिए संप्रभु धन निधियों को कर लाभ प्रदान कर रहा है।
  • रियलटी क्षेत्र में रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट 2016 (रेरा), जीएसटी, बेनामी लेनदेन निषेध (संशोधन) अधिनियम, 2016, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण जैसे प्रमुख संरचनात्मक सुधारों ने अधिक पारदर्शिता लाई है। कुछ साल पहले काफी हद तक यह अनियमित क्षेत्र था।

इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स ऑथॉरिटी- IFSCA

चर्चा में क्यों?

  • इनजेती श्रीनिवास को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स ऑथॉरिटी (International Financial Services Centers Authority- IFSCA) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स ऑथॉरिटी- IFSCA के बारे में

  • इस साल 27 अप्रैल को IFSCA का निर्माण किया गया था। यह देश में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSCs) में सभी वित्तीय सेवाओं को विनियमित करने के लिए एक एकीकृत निकाय है। अब तक, IFSCs पर संस्थाओं और वित्तीय सेवाओं के नियम बैंकिंग, पूंजी बाजार और बीमा नियामकों जैसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) और बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (Irdai) द्वारा नियंत्रित किए जाते थे।
  • दिसंबर 2019 में, संसद ने देश में IFSCs पर सभी वित्तीय गतिविधियों को विनियमित करने के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण स्थापित करने के लिए एक विधेयक पारित किया था। देश में पहला IFSC गुजरात के गांधीनगर में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस Tec- City (GIFT) में स्थापित किया गया है। गुजरात-मुख्यालय IFSCA गांधीनगर में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSCs) में सभी वित्तीय सेवाओं को विनियमित करेगा।
  • 27 अप्रैल, 2020 से लागू होने वाले प्राधिकरण में आठ सदस्य और एक अध्यक्ष हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अधिनियम, 2019 के अनुसार, एक सदस्य (पूर्व अधिकारी) प्रत्येक को RBI, SEBI, IRDAI और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा नामित किया जाएगा। वित्त के साथ काम करने वाले मंत्रालय के दो अधिकारियों को, केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाना है और दो अन्य सदस्यों को कानून के अनुसार चयन समिति की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाना है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity)

चर्चा में क्यों?

  • प्रतिष्ठित पत्रिका 'लांसेट' में स्पेन का एक अनुसंधान प्रकाशित हुआ है जिसमें कोविड-19 महामारी से मुकाबले के लिए 'हर्ड इम्यूनिटी' की संभावना को लेकर संदेह प्रकट किया गया है ।

क्या है 'हर्ड इम्यूनिटी'?

  • इस वैज्ञानिक आइडिया के अनुसार अगर कोई बीमारी किसी समूह के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी से लड़ने में संक्रमित लोगों की मदद करती है। जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से 'इम्यून' हो जाते हैं, यानी उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि 'हर्ड इम्यूनिटी' के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में रोग प्रतिरक्षा तंत्र तैयार होना चाहिए ताकि संक्रमण-रहित लोग संक्रमित ना हों।

अनुसंधान से जुड़े तथ्य

  • 'अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक 60,000 से ज्यादा लोगों पर अध्ययन कर अनुमान लगाया गया कि स्पेन की आबादी के महज पांच प्रतिशत लोगों में ही एंटीबॉडी तैयार हुई। इस अनुसंधान में राष्ट्रीय महामारी विज्ञान केंद्र, स्पेन के विशेषज्ञ भी शामिल थे ।
  • आबादी के आधार पर अध्ययन का मकसद स्पेन में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण में 'सीरो' की मौजूदगी का आकलन करना था । अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन के लिए 35,883 घरों को चुना गया। इसके तहत 27 अप्रैल से 11 मई के दौरान भागीदारों को कोविड-19 के लक्षणों के बारे में जवाब लिए गए।
  • अनुसंधानकर्ताओं ने दो तरह की जांच का विश्लेक्षण किया तो पाया कि 'प्वाइंट ऑफ केयर' टेस्ट में सीरो की मौजूदगी पांच प्रतिशत और इम्युनो जांच में इसकी मौजूदगी 4.6 प्रतिशत थी।
  • भौगोलिक आधार पर कुछ अंतर भी देखने को मिले । मैड्रिड में इसका स्तर ज्यादा (10 प्रतिशत से अधिक) रहा और तटीय क्षेत्र में यह स्तर (तीन प्रतिशत से नीचे) कम रहा ।
  • अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक नतीजों से पता चलता है कि स्पेन की ज्यादातर आबादी में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए सीरो का परिणाम नकारात्मक रहा ।
  • पत्रिका में कहा गया, 'पीसीआर जांच से पुष्ट अधिकतर मामलों में एंटीबॉडी का पता चला लेकिन कोविड-19 के लक्षण वाले बहुत सारे लोगों की पीसीआर जांच नहीं हुई।
  • सीरोलॉजी जांच के आधार पर पुष्ट संक्रमण के कम से कम एक तिहाई मामले में मरीज में किसी तरह के लक्षण नहीं थे।' अनुसंधानकर्ताओं ने कहा, 'ये नतीजे जाहिर करते हैं कि महामारी की नयी लहर से बचने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जरूरत है।

औषधीय एवं सुगंधित पादप आनुवांशिक संसाधनों का जर्मप्लाज्म संरक्षण

चर्चा में क्यों?

  • आयुष मंत्रालय के अधीनस्‍थ राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अधीनस्‍थ आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) ने 6 जुलाई, 2020 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

समझौता ज्ञापन के उद्देश्य?

  • इस एमओयू का उद्देश्य राष्ट्रीय जीन बैंक में दीर्घकालिक भंडारण मॉड्यूल (उपलब्धता के अनुसार) में आईसीएआर-एनबीपीजीआर के निर्दिष्ट स्थान पर और/या मध्यमकालिक भंडारण मॉड्यूल के लिए क्षेत्रीय स्टेशन पर औषधीय एवं सुगंधित पादप आनुवांशिक संसाधनों (एमएपीजीआर) का संरक्षण करना है। इसका एक अन्‍य उद्देश्‍य एनएमपीबी के कार्यदल के लिए पादप जर्मप्लाज्म के संरक्षण की तकनीकों पर व्यावहारिक व क्रियाशील प्रशिक्षण प्राप्त करना है।
  • एनएमपीबी और आईसीएआर-एनबीपीजीआर दोनों ही सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु वर्तमान व भावी पीढ़ियों के लिए लंबे समय तक, सुरक्षित और किफायती ढंग से जर्मप्लाज्म के संरक्षण के जरिए राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आईसीएआर की ओर से अधिकृत संस्थान एनएमपीबी और आईसीएआर- एनबीपीजीआर दरअसल एमएपीजीआर के बीज भंडारण के लिए विस्तृत विधियां विकसित करेंगे और समय-समय पर अपने संबंधित संगठनों को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

लाभ

  • औषधीय पौधों को दरअसल पारंपरिक दवाओं के समृद्ध संसाधनों के रूप में माना जाता है और इनका उपयोग हजारों वर्षों से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में किया जा रहा है। भारत में औषधीय पादप (एमपी) संसाधनों की विविधता प्रचुर मात्रा में है। प्राकृतिक संसाधनों का धीरे-धीरे क्षरण होता जा रहा है। इनके आसपास के स्‍थानों पर विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के कारण ही ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने के साथ-साथ इनका टिकाऊ उपयोग करने की आवश्यकता है।
  • पादप आनुवांशिक संसाधनों का संरक्षण असल में जैव विविधता संरक्षण का एक अभिन्न अंग है। संरक्षण का उद्देश्य कुछ ऐसे वि‍शिष्‍ट तरीकों से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और उपयोग करते हुए सतत विकास करना है जिससे कि जीन और प्रजातियों की विविधता में कोई भी कमी नहीं आए अथवा महत्वपूर्ण एवं अपरिहार्य प्राकृतिक उत्पत्ति स्थान एवं परिवेश कतई नष्ट नहीं हो।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

बर्डविंग तितली (Birdwing Butterfly)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में 88 साल बाद गोल्डन बर्डविंग नामक हिमालयी तितली की एक प्रजाति की खोज की गई है जो अपने आकार के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी तितली बन गई है। गोल्डन बर्डविंग नाम की यह मादा तितली के पंखों का आकार 194 मिलीमीटर है जोकि 1932 में ब्रिगेडियर विलियम हैरी इवांस द्वारा खोजे गए दक्षिणी बर्डविंग प्रजाति की तितली (190 मिलीमीटर) से बड़ा है।

बर्डविंग तितलियां के बारे में

  • बर्डविंग्स तितलियां स्वालोटेल (swallowtail) परिवार का भाग है जोकि ट्रोगोनोप्टेरा, टॉराइड्स और ओरनिथोप्टेरा कुल से संबंधित है। अभी तक संबंधित संस्थाओं के द्वारा इसके 36 प्रजातियां को मान्यता दी गई है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस कुल में और भी प्रजातियां भी शामिल हैं।
  • बर्डविंग्स तितलियां ही कुछ अनूठी विशेषताएं होती है जिसमें उनका असाधारण आकार, कोणीय पंख और पक्षियों की तरह उड़ान शामिल है।
  • अपने आकर्षक चमकीले रंग के कारण नर तितली, तितलियों के संग्राहकों में काफी लोकप्रिय हैं।
  • इस प्रजाति में सबसे छोटी तितली क्वेकर (Neopithecops zalmora) है जिसका पंख का आकार 18 मिमी और अग्रभाग की लंबाई 8 मिमी है। इस प्रजाति में सबसे बड़ी आकार की मादा गोल्डन बर्डविंग होती हैं जिसकी अग्रभाग की लंबाई 90 मिमी है।
  • बर्डविंग्स तितलियां एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र, दक्षिण पूर्व एशिया (मुख्य भूमि समेत द्वीप समूह) और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं।
  • सभी बर्डविंग्स तितलियां CITES (संकटग्रस्त जीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय) के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध हैं जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार सीमित/प्रतिबंधित है। इसके साथ ही बर्डविंग्स तितलियां IUCN के संकटमुक्त (Least Concern) श्रेणी में शामिल है।

मियावाकी पद्धति (Miyawaki method)

चर्चा में क्यों है?

  • हाल ही में प्रयागराज नगर निगम द्वारा पहली बार जापान की मियावाकी पद्धति से पौधरोपण का कार्य किये जाने की घोषणा की गयी है। इस पद्धति से कई देशों में सफलता पूर्वक पौधरोपण का कार्य किया जा चुका है तथा वर्तमान में भारत वर्ष के कई शहरों में इसका प्रयोग किया जा रहा है। केरल सरकार द्वारा भी वन रोपण के लिए 'मियावाकी वनीकरण विधि' को अपनाया गया है।

क्या है मियावाकी पद्धति?

  • जापानी पर्यावरण विशेषज्ञ डी. अकीरा मियावाकी ने वृक्षारोपण की इस तकनीक की खोज की थी। इस पद्धति में पौधों को एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर लगाया जाता है जिससे पौधे केवल ऊपर से सूर्य का प्रकाश प्राप्त करते है और बग़ल की तुलना में ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं। इस पद्धति द्वारा सीमित संसाधनों में तीव्रता से वृक्षारोपण द्वारा हरियाली सुनिश्चित की जा सकती है।

मियावाकी सिद्धान्त के मुख्य बिन्दु

  • पेड़ पौधों के बीच कोई निश्चित दूरी नहीं रखनी चाहिए।
  • वनीकरण से पहले जमीन को उपजाऊ बनाने के प्रयास करने चाहिए।
  • बंजर जमीन में पेड़ पौधों, वनस्पतियों, झांड़ियों और वृक्षों का सघन रोपण किया जाना चाहिए। एक हेक्टेयर में 10,000 पौधे लगाये जा सकते हैं।
  • स्थानीय प्रजातियों के बीज को रोपकर वनों को और घना बनाया जा सकता है।
  • पौधों को रोपने के बाद कम से कम अगला बरसाती मौसम आने तक उनकी सिंचाई की जानी चाहिए।
  • खरपतवार की रोकथाम और मिट्टी में वाष्पन से नमी की कमी को दूर करने के लिए पलवार बिछानी चाहिए।
  • नालियों में पानी बहाकर सिंचाई के स्थान पर स्प्रिंकलर विधि अपनाई जानी चाहिए।
  • बरगद जैसे पेड़ जिनका वितान बहुत बड़ा होता है उन्हें नहीं लगाना चाहिए।
  • 2 से 3 वर्ष तक इस वन की देखभाल करनी होगी इसके बाद यह आत्म निर्भर हो जायेगा।
  • इस तकनीक के माध्यम से मानव निर्मित वन लगाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

मियावाकी वनीकरण सिद्धान्त के लाभ

  • इस सिद्धान्त के द्वारा 2 फीट चौड़ी और 30 फीट पट्टी में 100 से भी अधिक पौधे लगाये जा सकते हैं।
  • इसमें कम खर्च में पौधे को 10 गुना तेजी से उगाया जा सकता है जिससे वृक्ष शीघ्र ही घने हो जाते हैं।
  • पौधों को पास-पास लगाने से इन पर खराब मौसम का असर नहीं होता, न ही गर्मी में नमी का अभाव होता है जिससे ये हरे-भरे रहते हैं।
  • इससे पौधों में दुगनी तेजी से वृद्धि होती है। और तीन वर्ष बाद उनकी देखभाल नहीं करनी पड़ती है।
  • कम क्षेत्र में घने वृक्ष ऑक्सीजन बैंक का काम करते हैं। इस तकनीक का प्रयोग न केवल वनों के लिए बल्कि आवासीय परिसर में भी किया जा सकता है।

वर्चुअल क्‍लाइमेट एक्‍शन समिट

चर्चा में क्यों?

  • जलवायु परिवर्तन के दुष्‍प्रभावों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई के लिए वि‍भिन्‍न देशों के पर्यावरण मंत्रियो के बीच हुई वर्चुअल बैठक के चौथे संस्‍करण में सभी पक्षों ने पेरिस समझौते के अनुरूप आर्थिक सुधार योजनाओं को कार्यान्वित करने के तौर तरीकों और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ समुचित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर गहन विचार-विमर्श किया।
  • संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के तहत पेरिस समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर चर्चा को आगे बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक स्‍तर पर राजनीतिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करने के लिए यूरोपीय संघ, चीन और कनाडा ने इस बैठक की सह अध्‍यक्षता की।
  • बैठक में लगभग 30 देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कोरोना महामारी को देखते हुए यह बैठक पहली बार वर्चुअल तरीके से आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य जलवायु परिर्वतन से निपटने की दिशा में सामूहिक कार्रवाई की प्रगति सुनिश्चित करना था।

क्या रहा भारत का रुख?

  • केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की ओर से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और भविष्य में भी ये प्रयास जारी रखे जाएंगे। श्री जावडेकर ने विकासशील देशों से फिर अनुरोध किया कि वे यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के तहत विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करें। उन्‍होंने कहा '2020 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की मदद का वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया है। मुझे उम्मीद है कि 2020 के शेष 5 महीनों में, विकसित देश यह राशि जुटा लेंगे और विकासीशल देशों तक पहुंचा देंगे।'

भारत के जलवायु अनुकूल नीति के तहत उठाये गए कदम

  • भारत ने 2005 और 2014 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में उत्सर्जन गहनता में 21% की कमी हासिल की जिससे 2020 से पहले के स्वैच्छिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सका है।
  • पिछले 5 साल में भारत की अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता में 226% की वृद्धि हुई है और यह 87 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता में गैर- जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी मार्च 2015 में 30.5% से बढ़कर मई 2020 में 37.7% हो गई। प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य 450 गीगावॉट तक बढ़ाने की आकांक्षा व्‍यक्‍त की है।
  • सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए हैं जो ग्रामीण लोगों को खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन और स्वस्थ वातावरण प्रदान करते हैं।
  • देश का कुल वन और वृक्ष आच्छादन क्षेत्र 8,07,276 वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.56% है।
  • उजाला योजना के तहत 36 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं, जिसके कारण प्रति वर्ष लगभग 47 अरब यूनिट बिजली की बचत हुई है और प्रति वर्ष कार्बन उत्‍सर्जन में 38 मिलियन टन की कमी आई है।
  • भारत ने 1 अप्रैल, 2020 तक भारत स्टेज- चार (बीएस-चार) के मानक अपनाने की जगह भारत स्टेज- छह (बीएस-छह) उत्सर्जन मानकों को अपनाने की स्थिति में पहुंच गया है जबकि इसके लिए 2024 तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी।
  • देश के हरित पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत देश में 440 रूपए का कोयला उपकर लगाया है। इसे वस्‍तु एवं सेवा कर में समाहित किया गया है।
  • स्‍मार्ट शहर मिशन के तहत क्लाइमेट स्मार्ट सिटीज असेसमेंट फ्रेमवर्क 2019 शुरू किया गया है जो शहरों और शहरी क्षेत्रों के लिए शमन और अनुकूलन उपायों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करता है।

अंटार्कटिका के सूक्ष्म जीवों में मिला माइक्रोप्लास्टिक का अंश

चर्चा में क्यों?

  • धरती के सबसे सुदूर इलाकों में शामिल अंटार्कटिका की खाद्य प्रणाली में माइक्रोप्लास्टिक का पता चला है। इकोसिस्टम (पारिस्थिकी तंत्र) में बदलाव का यह सबसे ताजा मामला है जिसके तहत वैज्ञानिकों को पहली बार अंटार्कटिका की मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों के भीतर माइक्रोप्लास्टिक मिला है।
  • इटली की सिएना यूनिवर्सिटी ने अध्ययन दल का नेतृत्व किया। उन्होंने इलाके के किंग जॉर्ज आइलैंड से लाए गए एक सिंथेटिक फोम के टुकड़े की जांच की, जो लंबे समय से वहां पड़े होने के कारण लाइकेन जैसे समुद्री जीवों से लिपटा था। शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें से एक जीव के भीतर पॉलीस्टाइरीन से बने फोम का अंश पहुंचा हुआ था। यह जीव लाइकेन और माइक्रो-एल्गी को खाता है।

क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक?

  • माइक्रोप्लास्टिक, प्लास्टिक के ऐसे कण होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से भी छोटा होता है। दुनिया भर में नदियों व समुद्रों में इस समय करीब 15 करोड़ टन प्लास्टिक का कचरा घुला होने का अनुमान है। यह जब लहरों और अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण टूटकर और छोटे हो जाते हैं तो माइक्रोप्लास्टिक बन जाते हैं। यही कण समुद्री पानी के साथ फिर तलछटी, तटीय इलाकों और समुद्री जीवों में पहुंच जाते हैं।

क्यों चिंता की है बात?

  • शोधकर्ताओं का मानना है कि प्लास्टिक इस रास्ते से अब तक अंटार्कटिका की जमीन पर पाए जाने वाले जीवों के पूरे सिस्टम में प्रवेश कर चुका होगा। यहां प्लास्टिक पहुंचने का अर्थ है कि इससे अंटार्कटिका के बेहद नाजुक संतुलन वाले पारिस्थिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। यह इलाका पहले से ही जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से अपने ग्लेशियर गंवा रहा है।
  • यहां की धरती पर मौजूद खाद्य श्रृंखला में प्लास्टिक के पहुंचने से ध्रुवीय ईकोसिस्टम पर और दबाव बनेगा। जबकि यह पहले से ही मानवीय दखल और जलवायु परिवर्तन की परेशानियां झेल रहा है। समुद्र में प्लास्टिक का कचरा होने की जानकारी पहले से ही है, लेकिन अंटार्कटिका जैसे मानवीय आबादी से दूर के इलाकों में इसका मिलना नई बात है।

:: विविध ::

मलावी के नए राष्ट्रपति: लाजारुस चकवेरा

  • मलावी के नव निर्वाचित राष्ट्रपति लाजारुस चकवेरा ने एक छोटे समारोह में शपथ ली। राजधानी लिलोंगवे के कामुजू बैरक में हुए शपथ ग्रहण समारोह में करीब 100 लोगों ने हिस्सा लिया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में आईटी संबंधी अभि‍नव सुविधाओं के शुभारंभ से चर्चा में रहे 'तुरंत कस्‍टम्‍स' के तहत 'कॉन्टैक्टलेस कस्टम्स' कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है? (तेजी से आयात और निर्यात क्लीयरेंस देना)
  • हाल ही में किन संगठनों ने औषधीय एवं सुगंधित पादप आनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण एवं पादप जर्मप्लाज्म की तकनीकों के प्रशिक्षण हेतु आपस में समझौता किया है? (राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड औरराष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो)
  • अंटार्कटिका की मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों के भीतर पाए जाने से चर्चा में रहे माइक्रोप्लास्टिक कण का आकार/आयाम कितना होता है? (5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कर)
  • चीन में उईगर मुस्लिमों के नरसंहार के विरुद्ध उईगर मुसलमानों द्वारा पैरवी करने से चर्चा में रहे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1945, हेग-नीदरलैंड)
  • जलवायु परिवर्तन पर मंत्री स्तरीय वार्ता से चर्चा में रहे 'UNFCCC' कन्वेंशन किस सम्मेलन की उपलब्धि है एवं इसका उद्देश्य क्या है? (1992, रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन,ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण)
  • वैश्विक संपत्ति सलाहकार कंपनी जेएलएल द्वारा जारी वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में कौन सा देश शीर्ष स्थान पर रहा एवं इस सूचकांक में भारत की रैंकिंग कितनी रही? ( ब्रिटेन, 34वां)
  • चर्चा में रहे 'आजाद पट्टान हाइड्रो प्रॉजेक्ट' का निर्माण किस नदी पर किया जा रहा है एवं यह प्रोजेक्ट किस अवसंरचना निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है? (पीओके में झेलम नदी पर, CPEC)
  • भारत के व्यापार और विदेशी निवेश की संभावनाओं पर केंद्रित 'इंडिया ग्लोबल वीक 2020' का आयोजन कहां किया जा रहा है? (ब्रिटेन)
  • हाल ही में प्रतिष्ठित पत्रिका में अनुसंधान से चर्चा में रही 'हर्ड इम्यूनिटी' किस सिद्धांत पर आधारित है? (जनसंख्या के अधिकांश हिस्से का संक्रमित होने के उपरांत प्रतिरोधक क्षमता का विकास होना)
  • हाल ही में किसने मलावी के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली? (लाजारुस चकवेरा)
  • हाल ही में ईरान के आक्रमण को विफल करने से चर्चा में रहे 'मोसाद' किस देश की खुफिया एजेंसी है? (इजराइल)
  • इनजेती श्रीनिवास को चेयरमैन नियुक्त करने से चर्चा में रहे इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स ऑथॉरिटी (IFSCA) का मुख्यालय कहां है? (गांधीनगर, गुजरात)
  • हाल ही में किसकी अध्यक्षता में गठित समिति ने विशाखापत्तनम में एलजी पॉलीमर की इकाई में हुए गैस लीक हादसे की जांच की रिपोर्ट आंध्र प्रदेश सरकार को प्रस्तुत की? (नीरभ कुमार प्रसाद)
  • हाल ही में चर्चा में रहे मियावाकी पद्धति किस क्षेत्र से संबंधित है एवं इस पद्धति की क्या विशेषता है? (वृक्षारोपण की पद्धति, सीमित संसाधनों में तेजी से जंगलों के विकास हेतु)
  • हाल ही में किस वैश्विक संस्था ने गंगा नदी के पुनरुद्धा रएवंनदी बेसिन के प्रबंधन को मजबूत करने हेतु लगभग 3 हजार करोड़ की मंजूरी दी है? (विश्व बैंक)
  • हाल ही में भारतीय रेलवे ने किस मिशन के तहत मालगाड़ी को 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाने में सफलता हासिल की? (मिशन शीघ्र)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB