(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : वाणिज्यिक बैंकों का मैनेजमेंट और आरबीआई के सुझाव (RBI on Governance in Commercial Bank)


(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : वाणिज्यिक बैंकों का मैनेजमेंट और आरबीआई के सुझाव (RBI on Governance in Commercial Bank)


विषय (Topic): वाणिज्यिक बैंकों का मैनेजमेंट और आरबीआई के सुझाव (RBI on Governance in Commercial Bank)

अतिथि (Guest):

  • Surojit Gupta, (Senior Editor, Times of India)
  • Ashok Kumar Jha, (Former Finance Secretary ,GoI)
  • Sushil Chandra Tripathi, (Former Independent Director, IndusInd Bank Limited)

विषय विवरण (Topic Description):

भारतीय रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों में शासन संबंधित चर्चा पत्र तैयार किया है जिसमें कई बातों का जिक्र किया गया हैं, जैसे बैंकों में अच्छी शासन परंपरा, पेशेवर प्रबंधन की एक मजबूत संस्कृति विकसित करने के लिए और प्रबंधन से मालिकाना को अलग करने के सिद्धांत को अपनाने के लिए यह जरूरी है कि पूर्णकालिक निदेशकों और सीईओ के कार्यकाल सीमित किए जाएं. किसी बैंक का कोई प्रमोटर या मेजर शेयरहोल्डर सीईओ या पूर्णकालिक निदेशक के पद पर अधिकतम 10 साल तक रह सकता है या 70 साल के उम्र तक रह सकता है, इस समय अवधि के बाद उसे पेशेवर प्रबंधन पद को हर हाल में छोड़ना होगा. अच्छे शासन के हित में कोई प्रबंधन फंक्शनरी जो प्रमोटर या मेजर शेयरहोल्डर नहीं है वह किसी बैंक के पूर्णकालिक निदेशक या सीईओ के पद पर 15 साल तक लगातार रह सकता है. उसके बाद यह व्यक्ति तीन साल की अवधि बीत जाने के बाद ही फिर से पूर्णकालिक निदेशक या सीईओ के पद पर नियुक्ति पाने का पात्र हो सकेगा. इस तीन साल की अवधि के दौरान वह व्यक्ति किसी भी रूप में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में बैंक से जुड़ा नहीं रहेगा. यदि कागज के आधार पर ऐसा कोई नियम बनाया गया है तो सीईओ या पूर्णकालिक निदेशक जिन्होंने बैंक में ऐसे 10 या 15 वर्ष पूरे किए हैं, उनके कार्यकाल के दो वर्ष या कार्यकाल समाप्त होने तक दो साल पूरे हो जाएंगे. व्यक्ति को एक उत्तराधिकारी की पहचान करने और नियुक्त करने के लिए एक लंबी समय सीमा है, यह तब कुछ निजी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के मामले को बंद कर देता है जब वे 70 साल के हो जाने के बाद पुन: नियुक्ति पाने की कोशिश करते हैं और उत्तराधिकार योजना के माध्यम से उन पर दबाव डालते हैं. बैंक बोर्ड की बैठकों में मिनटों को रिकॉर्ड करना चाहिए, यहां तक कि असंतुष्ट सदस्यों के विचार भी.

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Courtesy: RSTV