(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : विवाहित महिलाओं के अधिकार (Married Women's Rights)


(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : विवाहित महिलाओं के अधिकार (Married Women's Rights)


विषय (Topic): विवाहित महिलाओं के अधिकार (Married Women's Rights)

अतिथि (Guest):

  • Rekha Aggarwal, (Advocate Supreme Court) (रेखा अग्रवाल, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट)
  • Dr. Alok Sharma, (Women Rights Activist) (डॉ. आलोक शर्मा, महिला अधिकार कार्यकर्ता)
  • Aditi Tandon, (Special Correspondent, The Tribune) (अदिति टंडन, विशेष संवाददाता, द ट्रिब्यून)

विषय विवरण (Topic Description):

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मुकदमे में फैसला सुनाते हुए कहा कि शादीशुदा बेटी भी पिता की मृत्‍यु के बाद उनकी जगह नौकरी पा सकती है. कोर्ट ने बेंगलुरू की रहने वाली भुवनेश्‍वरी वी. पुराणिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया. जस्टिस एम. नागपन्‍ना की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बेटी के शादीशुदा होने का मतलब ये नहीं है कि अब वो परिवार का हिस्‍सा नहीं रही. बेटा और बेटी बराबर हैं. उनके अधिकार बराबर हैं. बेटी की शादी कर देने का मतलब ये नहीं होता कि अब वो पिता के परिवार का हिस्‍सा नहीं रही. अगर कोई कानून बेटे को कोई अधिकार देते हुए उसके मैरिटल स्‍टेटस की इंक्‍वायरी नहीं करता तो बेटी को ये हक देते हुए उसका शादीशुदा होना क्‍यों आड़े आना चाहिए? दरअसल कर्नाटक समेत बाकी राज्‍यों में भी यह नियम है कि विवाहित पुत्री को पुरुष पर आर्थिक‍ रूप से निर्भर व्‍यक्तियों की श्रेणी से बाहर रखा जाता है. बेटा, अविवाहित बेटी और विधवा पत्‍नी को ही पुरुष पर निर्भर लोगों की सूची में जगह दी गई है. पंजाब और हरियाणा में भी यही नियम था, लेकिन इसी साल जुलाई में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे लैंगिक समानता का उल्लंघन मानते हुए ‘पंजाब में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति योजना-2002’ से विवाहित बेटी को बाहर रखे जाने वाला क्लॉज हटा दिया. अब वहां शादीशुदा बेटी भी पिता के स्‍थान पर नौकरी की उतनी ही हकदार है, जितना कि बेटा..

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Courtesy: RSTV