(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : 80वां पीठासीन अधिकारी सम्मेलन और मुद्दे (80th Presiding Officers' Conference & Issues)


(Video) राज्य सभा टीवी देश देशांतर Rajya Sabha TV (RSTV) Desh Deshantar : 80वां पीठासीन अधिकारी सम्मेलन और मुद्दे (80th Presiding Officers' Conference & Issues)


विषय (Topic): 80वां पीठासीन अधिकारी सम्मेलन और मुद्दे (80th Presiding Officers' Conference & Issues)

अतिथि (Guest):

  • Pradeep Singh, (Senior Journalist) (प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार)
  • V.K. Agnihotri, (Former Secretary General, Rajya Sabha) (वी.के. अग्निहोत्री, पूर्व महासचिव, राज्य सभा)
  • Desh Ratan Nigam, (Advocate, Supreme) (देश रतन निगम, वकील, सुप्रीम कोर्ट)

विषय विवरण (Topic Description):

संविधान दिवस के मौके पर सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नर्मदा के तट पर आयोजित हो रहा 80वां पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन आज से शुरू हो गया हैं जो शताब्दी वर्ष होने की वजह से एहतिहासिक हैं. आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश की संसद व विधानसभाओं के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि एक संसदीय लोकतंत्र में सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विपक्ष भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हमारे देश की संसद और विधानसभाएं हमारे संसदीय व्यवस्था के आधार हैं। उन पर देशवासियों के नियति के निर्धारण का महत्वपूर्ण दायित्व है। पिछले कुछ दशकों में लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं के बढ़ने से संसद और विधानमंडलों की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। वहीं उपराष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि देश की शासन व्‍यवस्‍था के तीन तीनों स्‍तंभों में से कोई भी खुद के सर्वोच्च होने का दावा नहीं कर सकता ऐसा इसलिए क्‍योंकि संविधान ही सर्वोच्च है। हालांकि अदालतों के कुछ फैसलों से लगता है कि न्यायपालिका का हस्तक्षेप बढ़ा है। उपराष्ट्रपति 'विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण समन्वय एवं जीवंत लोकतंत्र पर बल दिया। उपराष्‍ट्रपति ने कहा‍ कि संविधान के अनुसार विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अपने-अपने सीमाक्षेत्र में कार्य करने के लिए बाध्य हैं। शासन व्‍यवस्‍था का हर अंग एक दूसरों के साथ हस्तक्षेप के बिना अपना काम करते हैं जिससे परस्पर सम्मान, जिम्मेदारी और संयम की भावना का संचार होता है। ऐसे में, परस्पर सम्म्मान, जवाबदेही और धैर्य की जरूरत होती है। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे कई उदाहरण हैं जब सीमाएं लांघी गई हैं। उन्‍होंने पटाखों पर अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हाल के कुछ फैसलों से ऐसा ही लगता है. पीठासीन अधिकारियों का इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में उनके सामने चुनौतियाँ और सुझाव के उपाय पर मंथन दो दिन मंथन किया जायेगा .

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Courtesy: RSTV