कोविड-19 महामारी के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा की चुनौती - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


कोविड-19 महामारी के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा की चुनौती - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • विश्व के कई देशों पर विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण लागू की गई तालाबंदी व अन्य सख्त पाबंदियाँ हटाने के लिए दबाव बढ़ रहा है, जिससे वायरस के फिर से उभरने की आशंका भी गहरा रही है। इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने विभिन्न देशों की सरकारों से कार्यस्थलों पर कोविड-19 की रोकथाम के लिए समुचित प्रबंध करने का आग्रह किया है।

परिचय

  • कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए पूरी दुनिया की सरकारों, नियोत्तफ़ा, श्रमिक और पूरे समाज को काम करने वाली जगहों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया के कुछ हिस्सों में कोविड-19 संक्रमण बढ़ रहा है और दूसरों में घटती दरों को बनाए रखने की क्षमता पर जोर दिया जा रहा है। कार्यस्थल पर स्वस्थ मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण इत्यादि से बचा जा सके।
  • कोविड-19 के कारण कई तरह की अड़चने उत्पन्न हो गई हैं। कोरोना वायरस ने व्यवसायी जीवन की रूपरेखा की कायापलट कर डाली है। इन दिनों घर, नए कार्यालय का रूप ले चुका है। इंटरनेट नया मीटिंग रूम है। सहकर्मियों के साथ होने वाले ऑफिस ब्रेक्सी कुछ समय के लिए इतिहास बन चुके हैं।
  • कोविड-19 संकट आने के पहले भारतीय अर्थव्यवस्था नॉमिनल जीडीपी के आधार पर 45 साल के न्यूनतम स्तर पर थी जबकि रियल जीडीपी के आधार पर 11 साल के न्यूनतम स्तर पर थी। बेरोजगारी की दर पिछले 45 साल में सबसे अधिक थी और ग्रामीण मांग पिछले 40 साल के सबसे न्यूनतम स्तर पर थी। अतः अर्थव्यवस्था को लम्बे समय तक ठप नहीं रखा जा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के उपायों के साथ-साथ सरकारों के समक्ष लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की भी चुनौतियाँ है।

चुनौतियाँ

  • कम आय वाली नौकरियाँ (जैसे रसोइया, नर्स, किराने की दुकान के कर्मचारी आदि) कार्यस्थल से दूर रहकर नहीं की जा सकतीं और प्रायः देखा गया है कि ज्यादातर कम आय वाली नौकरियों में बीमारी के दिनों का भुगतान नहीं किया जाता। ऐसे ज्यादातर लोगों के पास या तो बीमा नहीं होता या होता भी है, तो कम राशि का होता है। ऐसे अनेक लोगों के लिए खाद्य पदार्थ इकट्टòा करके रखना वित्तीय बाधा के चलते असंभव हो सकता है।
  • सरकार द्वारा लोगों को घर से काम करने, भीड़भाड़ से बचने, कोरोना से मिलते-जुलते लक्षणों की अनदेखी न करने, बार-बार साबुन से हाथ धोने और सैनिटाइजर का उपयोग करने के लिए कहा गया है। लेकिन व्यवसाय और रोजगार ऐसे हैं जिन्हें ना तो घर से किया जा सकता है और ना ही सरकार द्वारा दिये गये सभी दिशा-निर्देशों का हुबहु पालन किया जा सकता है।
  • अगर कोरोना वायरस का संक्रमण स्थानीय स्तर पर होता है, तो आबादी का गरीब तबका, मसलन, ड्राइवर, घरेलू नौकर, प्रवासी मजदूर और अन्य लोग निश्चित रूप से भारी नुकसान में रहेंगे, क्योंकि वे उतने शिक्षित नहीं हैं कि नए कोरोना वायरस के बारे में पर्याप्त रूप से जागरूक हों।
  • कार्यस्थल पर या खरीदारी करते समय एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैल सकता है और वैसे लोगों से भी संक्रमण फैलता है, जिन्हें संभवतः पता नहीं होता कि वे संक्रमित हैं।

सरकारी प्रयास

  • भारत में रक्षा क्षेत्र के स्वदेशीकरण से संबंधित कई चुनौतियाँ व्याप्त हैं:
  • भारत पर ऐसे आरोप लगते हैं कि यहाँ रक्षा हथियारों की खरीद (Procurement) प्रक्रिया काफी धीमी रहती है, जो उत्पादकों को हतोत्साहित करती है।
  • रक्षा क्षेत्र की भारतीय कम्पनियाँ जिन हथियारों या अन्य सामग्रियों का निर्माण करती हैं, उनमें उन्नत प्रौद्योगिकी सीमित तौर पर उपस्थित होती है जिससे वे विश्व के अन्य अत्याधुनिक हथियारों से प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर पाते हैं। इसलिए भारतीय सेना स्वेदशी हथियारों की खरीद पर कम बल देती है।
  • भारत सरकार ऐसी कोई भी नीति को निर्मित नहीं करती है जिससे कि स्वदेशी कम्पनियों को पता चल सके कि आने वाले समय में सरकार किस तरह के और कितने हथियारों या अन्य रक्षा सामग्री की खरीद करेगी। ऐसा न करने से भारतीय रक्षा कम्पनियाँ पहले से तैयारी नहीं कर पाती हैं।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारत सरकार का सलाहकार, विकासकर्ता और मूल्यांकनकर्ता है (रक्षा क्षेत्र से सम्बन्धित)। जब कोई निजी कम्पनी सरकार के लिए रक्षा सामग्री का उत्पादन करती है तो डीआरडीओ ही उसका मूल्यांकन (Evaluation) करता है, लेकिन कभी-कभी देखने में आता है कि डीआरडीओ और निजी कम्पनी एक ही प्रकार के उत्पाद बनाती हैं तो इस स्थिति में डीआरडीओ का निजी कम्पनी के परिप्रेक्ष्य में हितों का टकराव (Conflict of interests) हो जाता है जो निजी क्षेत्र के लिए घातक है।

सरकार के प्रयास

  • कोविड-19 कंटेनमेंट जोन में रह रहे लोगों के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप इस्तेमाल करना जरूरी होगा। केन्द्रीय गृह मंत्रलय के आदेश के मुताबिक, पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के सभी कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। सभी संस्थानों (सरकारी और प्राइवेट सेक्टर) के प्रमुख की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों द्वारा ऐप का इस्तेमाल किया जाए।

सुझाव

  • सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में रक्षा अधिग्रहण के लगभग 200 प्रस्तावों की स्वीकृति दी है। (जिनका मूल्य लगभग 400 ट्रिलियन रुपये है)। अब सरकार को चाहिए कि जो रक्षा अधिग्रहण प्रस्ताव अपने शुरूआती स्तर पर हैं, उनका पुनर्निरीक्षण किया जाये और जहाँ-जहाँ हो सके वहाँ स्वदेशी रक्षा हथियारों की खरीद को बढ़ावा दिया जाये।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ को रक्षा अधिग्रहण के समय तीनों सेनाओं (थल, वायु और जल) को ध्यान में रखना चाहिए ताकि रक्षा खरीद में दोहराव से बचा जा सके अर्थात् एक ही सामान को तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग न खरीदा जाये।
  • यदि सरकार विदेश से रक्षा हथियारों को आयात करती है तो इस पर ध्यान दिया जा सकता है कि उससे संबंधित अन्य उपकरणों का भारत में ही निर्माण हो। इसके अतिरिक्त, विदेशी रक्षा समझौते के कुछ हिस्से को भारत में विनिर्मित करने हेतु शर्त रखी जा सकती है, यथा-राफेल विमान समझौते आदि।
  • सरकार को रक्षा क्षेत्र से संबंधित दीर्घकालिक एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना (Long-term Integrated Perspective Plan) को घोषित करना चाहिए। इसमें यह बताया जाये कि भारतीय सेना को आगे आने वाले वर्षों में किस तरह के और कितने रक्षा हथियारों एवं अन्य सामग्री की जरूरत है। इससे देशी रक्षा कम्पनियाँ अपनी क्षमता को समय रहते विकसित कर पायेंगी।
  • सरकार को रक्षा क्षेत्र के निर्यात में भी पारदर्शिता लानी होगी।

आगे की राह

  • बिना किसी व्यवधान के कार्यस्थलों पर सुरक्षित वापसी के लिए निम्न शिफारिशों को अमल में लाया जा सकता है-
  • कार्यस्थल पर संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से काम पर लौटने से पहले कर्मचारियों की जांच का प्रावधान होना चाहिये साथ ही कार्यस्थल पर आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षा उपायों के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए और इस महामारी के समय में एहतियात बरतने चाहिए।
  • संक्रामक महामारी के फैलने के दौरान, हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा जिस तरह करते हैं उसी से समुदायों की सुरक्षा व व्यवसायों की सहन-क्षमता निर्धारित होगी।
  • पेशेवर सुरक्षा व स्वास्थ्य उपाय अमल में लाकर ही हम कर्मचारियों, उनके परिवारों, और बड़े समुदायों की जिंदगियों की रक्षा कर सकते हैं, कामकाज जारी रखना सुनिश्चित कर सकते हैं और आर्थिक रूप से उबर सकते हैं।
  • जोखिम पर नियंत्रण पाने के उपायों में कर्मचारियों की जरूरतों के अनुरूप बदलाव करना अहम होगा, खासकर अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों के लिए ऐहतियाती उपाय ध्यान में रखने होंगे। इनमें स्वास्थ्यकर्मी, नर्सें, डॉक्टर, आपात स्थिति के लिए नियुत्तफ़ कर्मचारी और खुदरा भोजन व्यापार व साफ-सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
  • हम जानते हैं कि कोविड-19 एक नया वायरस है। इसका अब तक कोई टीका नहीं बना है। लेकिन बुनियादी स्वच्छता और रोकथाम के उपाय द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

सामान्य अध्ययन पेपर-2

  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
  • शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं, नागरिक घोषणा-पत्र, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कार्यस्थल पर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रमुख सुझाव दीजिये।

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