दक्षिणी चीन सागर तथा अमेरिका चीन सम्बन्ध - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


दक्षिणी चीन सागर तथा अमेरिका चीन सम्बन्ध - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


सन्दर्भ :-

हाल ही में अमेरिका के दो युद्धपोत विवादित दक्षिण चीन सागर में घुस गए हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस ताजा घटनाक्रम के चलते वायरस की उत्पति को लेकर पहले से ही उलझे अमेरिका और चीन में तनाव काफी हद तक बढ़ गया है।

पृष्ठ्भूमि :-

  • कोरोना संकट से जूझने के दौरान भी बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में अपनी गतिविधियां कम नहीं की थीं। महामारी के दौरान भी चीन ने इस विवादित समुद्री क्षेत्र में अपना आक्रामक रवैया बरकरार रखा। आस्ट्रेलियन स्ट्रैटिजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के  अनुसार, ‘चीन का मानना है कि वर्तमान में अमेरिका की क्षमता कम हो गई है। लिहाजा वह पड़ोसियों को दबाने की रणनीति पर जानबूझ कर तेजी से अमल कर रहा है।’
  • जनवरी में जब कोरोनावायरस ने तेजी पकड़ना शुरू किया, उस समय से चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य गतिविधियां अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दी। इस दौरान उसने समुद्र में दावेदारी करने वाले देशों और उनके मछुआरों को तंग करना शुरू कर दिया। इस महीने के शुरू में वियतनाम ने आरोप लगाया कि चीन के एक पोत ने टक्कर मारकर उसके मछली मारने की एक नौका को डुबो दिया।
  • दक्षिण चीन सागर में  बीजिंग की कार्यवाही यहीं समाप्त  नहीं हुआ। पिछले महीने उसने फिलीपींस और दूसरे देशों की दावेदारी वाले जल क्षेत्र के टापू पर जबरन  अपने दो रिसर्च सेंटर खोल दिए। चीन ने यहां पर अपने सैन्य ठिकाने व एयरबेस पर भी स्थापित कर दिए। पिछले हफ्ते तो र्बींजग ने यह घोषणा भी कर दी कि उसने दक्षिण चीन सागर में दो नए जिले गठित कर दिए हैं। इन जिलों में कई विवादित द्वीप और टापू शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, पानी में डूबे होने के चलते इन पर किसी भी देश का अधिकार नहीं हो सकता।
  • इसी  बीच अमेरिका के दो युद्धपोत विवादित दक्षिण चीन सागर में घुस गए हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस ताजा घटनाक्रम के चलते वायरस की उत्पति को लेकर पहले से ही उलझे अमेरिका और चीन में तनाव काफी हद तक बढ़ गया है। इतना ही नहीं वाशिंगटन के इस कदम से विवादित समुद्री क्षेत्र में कायम गतिरोध में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।

अमेरिका चीन विवाद के कारण

विचारधारात्मक अंतर :-

एक तरफ जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका लोकतंत्रात्मक विचारधारा से ओतप्रोत हैं वहीँ चीन साम्यवाद का स्तम्भ है।

रणनीतिक महत्वाकांछा :-

अमेरिका जहाँ वैश्विक नेतृत्वकर्ता है वहीँ चीन स्वयं को क्षेत्रीय से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढा रहा है जो दोनों के मध्य तनाव का मुख्य कारण है।

वैश्विक संस्थाओ में वर्चस्व :-

वैश्विक संस्थाओ पर  दोनों देश सदैव एक दूसरे पर पक्षपात का आरोप लगते हैं।  चीन जहाँ विश्व बैंक , आईएमएफ जैसे संस्थाओ में अमेरिकी वर्चस्व का हवाला देता है वहीं अभी हाल ही में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर अपना वित्तीयन रोक दिया, तथा उसपर चीन के कोरोना वायरस के सन्दर्भ में कार्यवाही  में देरी का आरोप लगाया है।

पर्यावरणीय मुद्दों पर विवाद :-

पर्यावरणीय मुद्दों पर अमेरिका व चीन के मध्य "उत्तरदायित्व के सिद्धांत" को लेकर मतभेद है।

वैश्वीकरण :-

2008 की वैश्विक मंदी  के उपरांत जहाँ अमेरिका वैश्वीकरण को छोड़कर संरक्षणवाद के सिद्धांतो पर बढ़ा है वहीँ दूसरी तरफ चीन बेल्ट एंड रोड के माध्यम से "चाइना  लेड ग्लोबलाइज़ेशन" के सिद्धांत को प्रचारित कर रहा है।

चीन का साम्राज्यवाद :-

चीन की साम्राज्यवादी नीतियां प्रशांत महासागर में एक अनिश्चितता का कारण बन रही हैं

अमेरिका की अनिश्चित नीतियां  :-

इस नीति के अंतर्गत अमेरिका  सभी वैश्विक संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्थान , पेरिस जलवायु संधि , से स्वयं का अलगाव कर रहा है ।  जिसका लाभ उठा कर  चीन अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ा रहा है।  यह दोनों देशो के मध्य तनाव को बढ़ा रहे हैं

व्यापार युद्ध :- 

2018 से ही दोनों देशो के मध्य व्यापार युद्ध चल रहा है।

कोरोना वायरस :-

कोरोना वायरस प्रकोप से सर्वाधिक अमेरिका तथा यूरोप प्रभावित हैं। तथा यह संदेह है कि यह चीन द्वारा किये जा रहे जैविक युद्ध का हिस्सा है।

विश्व पर प्रभाव :-

इस समय विश्व यूक्रेन संकट , अमेरिका -ईरान तनाव , आतंकवाद , वैश्विक तापन जैसी समस्याओं से ग्रस्त है।  इसी दौरान कोरोना वायरस प्रकोप द्वारा सम्पूर्ण विश्व चिंतित है। ऐसे में एक और वैश्विक समस्या वैश्विक संकट को बढ़ा सकती है।

भारत हेतु स्थिति :-

  • प्रारम्भ से ही भारत को दक्षिणी चीन सागर के द्वीपय देश सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखते हैं।  इसके साथ ही हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में भारत अमेरिका का रणनीतिक सहयोगी है तथा अमेरिकी क्वाड का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है।  भारत ने अमेरिका -ईरान संकट के समय , आतंकवाद , वैश्विक तापन के मुद्दों पर मानवता के हित में लिए गए फैसलों का समर्थन किया है।
  • छोटे देश भारत को अपना नेतृत्वकर्ता मानते हैं।  इसके साथ ही साथ भारत ने कोरोना के विषय पर जनकल्याण तथा वसुधैव कुटुंबकम की भावना को प्रसारित कर यथासंभव सबकी सहायता ही की है। 
  • भारत वियतनाम के दो तेलकुओं को इस क्षेत्र में प्रयोग भी कर रहा है।  अतः समय को ध्यान में रखते हुए भारत सर्वशांति का पक्षधर होगा।  तथा सभी देशो को इस विषय पर अपना उत्तरदायित्व समझना होगा।

दक्षिण चीन सागर:-

  • दक्षिण चीन सागर एक सीमांत सागर है, जो प्रशांत महासागर का हिस्सा है, जिसमें करीमाता और मलक्का क्षेत्र से  क्षेत्र सम्मिलित हैं। जो ताइवान के स्ट्रेट से अधिक वर्ग किलोमीटर (1,400,000 वर्ग मील) तक फैला है।
  • समुद्र अत्यंत  सामरिक महत्व रखता है; दुनिया का एक-तिहाई शिपिंग हर साल 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार इसी क्षेत्र से होता है ।
  • इसमें आकर्षक मछलियां शामिल हैं, जो दक्षिण पूर्व एशिया में लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। माना जाता है कि इसके सीबेड के नीचे विशाल तेल और गैस का भंडार है। जो इसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती हैं।
  • चीन का 80 प्रतिशत ऊर्जा आयात और चीन का कुल व्यापार का 39.5 प्रतिशत दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरता है

दक्षिण चीन सागर का विवाद

दक्षिण चीन सागर विवाद में क्षेत्र के भीतर कई संप्रभु राज्यों के बीच द्वीप और समुद्री दावे शामिल हैं, जैसे ब्रुनेई, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी), (आरओसी / ताइवान), इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, और वियतनाम।
विवादों में समुद्री सीमा और द्वीप दोनों शामिल हैं कई विवाद हैं,:

  • चीन गणराज्य द्वारा दावा किया गया नौ-डैश लाइन क्षेत्र, बाद में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी), जो दक्षिण चीन सागर के अधिकांश भाग को कवर करता है और ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस ,ताइवान और वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्र के दावों के साथ ओवरलैप करता है, ।
  • पीआरसी, ताइवान और वियतनाम के बीच वियतनामी तट के साथ समुद्री सीमा विवाद
  • पीआरसी, मलेशिया, ब्रुनेई, फिलीपींस और ताइवान के बीच बोर्नियो के उत्तर की समुद्री सीमा विवाद
  • दक्षिण चीन सागर में द्वीप समूह, रीफ्स, बैंक और शॉल्स, जिनमें पैरासेल द्वीप समूह, प्रैटस द्वीप समूह, मैक्स्सफील्ड बैंक , स्कारबोरो शोल और पीआरसी, ताइवान और वियतनाम  के बीच स्प्रैटली द्वीप समूह शामिल हैं, और क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मलेशिया ने भी दावा किया था।
  • पीआरसी, इंडोनेशिया और ताइवान के बीच नटुना द्वीप के उत्तर में जल में समुद्री सीमा।
  • पीआरसी, फिलीपींस और ताइवान के बीच पलावन और लूजोन के तट से समुद्री सीमा।
  • समुद्री सीमा, भूमि क्षेत्र और इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस के बीच अंबाला सहित सबा के द्वीप।
  • PRC, फिलीपींस और ताइवान के बीच लूजॉन स्ट्रेट में समुद्री सीमा और द्वीप।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र- 2

  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • हाल ही में दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में की गई गतिविधियों ने वैश्विक अनिश्चितता को जन्म दिया है ? विश्लेषण करें ?

 

 

 

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