ओजोन परत क्षरण - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


ओजोन परत क्षरण - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


संदर्भ :-

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिको के अनुसार शीत ऋतु में अधिक ठण्ड पड़ने के कारण ओजोन परत का छिद्र बढ़ गया है।

पृष्ठ्भूमि :-

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिको ने बताया कि इस वर्ष तापमान गिरकर -80 डिग्री सेल्सियस  पहुंच गया  के कारण हैलोजन गैस बादलों के बीच फस गई। परन्तु तापमान धीरे धीरे  बढ़ने पर जब बादलों का विखराव आरम्भ हुआ तब गैसें बाहर निकलीं तथा गैसों के उत्सर्जन से ओजोन लेयर में छिद्र बढ़ गया ।

परिचय:-

  • 1970 के दशक के उत्तरार्ध से ओजोन रिक्तीकरण में दो संबंधित घटनाएँ देखने को मिलती हैं: पृथ्वी के वायुमंडल (ओज़ोन परत) में ओज़ोन की कुल मात्रा में लगभग चार प्रतिशत की स्थिर कमी, और पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के आसपास स्ट्रैटोस्फेरिकमोन में एक बहुत बड़ी घटना  घट जाती है।
  • बाद की घटना को ओजोन छिद्र के रूप में जाना जाता है। इन स्ट्रैटोस्फेरिक घटनाओं के अलावा ध्रुवीय ट्रोपोस्फेरिक ओजोन रिक्तीकरण घटनाएं भी हैं।

ओजोन परत की कमी के कारण

  • ओजोन परत की कमी एक प्रमुख चिंता है और कई कारकों से जुड़ी है। ओजोन परत की कमी के लिए जिम्मेदार मुख्य कारण नीचे सूचीबद्ध हैं:

क्लोरोफ्लोरोकार्बन

  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन या सीएफसी ओजोन परत की कमी का मुख्य कारण हैं। ये साबुन, सॉल्वैंट्स, स्प्रे एरोसोल, रेफ्रिजरेटर, एयर-कंडीशनर, आदि द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • समताप मंडल में क्लोरोफ्लोरोकार्बन के अणु पराबैंगनी विकिरणों से टूट जाते हैं और क्लोरीन परमाणुओं को छोड़ते हैं। ये परमाणु ओजोन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और इसे नष्ट कर देते हैं।

अनियमित रॉकेट लॉन्च

  • शोध कहते हैं कि रॉकेटों के अनियमित प्रक्षेपण से सीएफसी की तुलना में ओजोन परत का बहुत अधिक क्षरण होता है। यदि इसे नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो वर्ष 2050 तक ओजोन परत का भारी नुकसान हो सकता है।

नाइट्रोजन युक्त यौगिक

  • ओजोन परत के क्षरण के लिए NO2, NO, N2O जैसे नाइट्रोजनीस यौगिक अत्यधिक जिम्मेदार हैं।

प्राकृतिक कारण

  • ओजोन परत को कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे सौर धब्बे  और स्ट्रैटोस्फेरिक हवाओं से कम पाया गया है। लेकिन यह ओजोन परत के 1-2% से अधिक घटने का कारण बनता है।

ओजोन रिक्तीकरण पदार्थ:

  • ओजोन घटने वाले पदार्थ क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हैलोन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, हाइड्रोफ्लोरोकार्बन आदि जैसे पदार्थ हैं जो ओजोन परत के क्षय के लिए जिम्मेदार हैं।

ओजोन परत के क्षरण के प्रभाव

संमताप मंडलीय ओज़ोन का प्रभाव :-

समुद्री पारितंत्र पर प्रभाव :-

  • यूवी -B विकिरण की अधिक मात्रा फाइटोप्लैंक्टोन के उत्पादन में कमी लाती है। फाइटोप्लैंक्टोन जलीय आहार नाल के आधार का निर्माण करते हैं। अतः यह मछली , श्रिम्प, केकड़ा जैसे जानवरों के पूर्व विकाशीय चरण को क्षति पहुँचती है, जिस कारण लार्वा का विकाश प्रभावित होता है।  यह वैश्विक तापन में भी वृद्धि करता है।

वनस्पति पर प्रभाव :-

  • यूवी -B विकिरण से शारीरिक एवं विकासीय प्रक्रिया प्रभावित होती है
  • पौधों के आकार में परिवर्तन
  • पौधों के पोषक तत्व के वितरण में परिवर्तन
  • विकाशीय समय में परिवर्तन
  • इसके साथ साथ फसल उत्पादन में कमी , बीजो में क्षति , फसल गुणवत्ता में कमी एवं पत्तियों की क्षति जैसे प्रभाव सामने आता है

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव :-

  • UV -B विकिरण के अधिक मात्रा में पृथ्वी की सतह पर पहुंचने में तापमान में बृद्धि होगी जिससे मेलेनोमा त्वचा कैंसर में बृद्धि होगी।  इससे श्वसन तंत्र पर भी प्रभाव पढता है।  साथ ही फसलों एवं जलीय आहार के प्रभावित होने से मानव के लिए खाद्य संकट उत्पन्न होगा।
  • UV -B विकिरण अनुवांशिक पदार्थ ( डीएनए ) को प्रभावित करता है जिससे जीन उत्परिवर्तन तथा आनुवंशिक दोष उत्पन्न  हो सकता है।
  • त्वचा कैंसर में बृद्धि
  • मोतिबिन्द एवं अन्य नेत्र दोष
  • प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होना

जैव भू- रासायनिक तंत्र पर प्रभाव :-

  • पराबैगनी किरणों में बृद्धि से स्थलीय एवं जलीय जैव भू- रासायनिक तंत्र को प्रभावित करता है , जिससे दोनों स्त्रोतों में परिवर्तन होता है एवं ग्रीनहाउस गैसों के भंडार गृह  भी प्रभावित होते हैं।  इन सबके कारण जलवायु परिवर्तन जैसी घटना में बृद्धि होती  है।

क्षोभ मंडलीय ओजोन गैस है प्रभाव :-

  • क्षोभ मंडल में उपस्थित ओजोन हरे पौधों ,वन मनुष्यों हेतु हानिकारक होता है
  • यह पौधों द्वारा कार्बन डाई ऑक्साइड के अंतर्ग्रहण में कमी लाता है। जो वैश्विक तापन में बृद्धि करता है।
  • वोलेटाइल ऑर्गनिक कंपाउंड , सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में NOx से प्रतिक्रिया कर  फोटोकेमिकल स्मोग की उत्पत्ति करता है जो आँखों में जलन,श्वसन तंत्र में समस्याओं को उत्पन्न करता है  

ओजोन परत की कमी का समाधान

कीटनाशकों के  कम प्रयोग

  • रसायनों का उपयोग करने के बजाय कीटों और खरपतवारों से निदान  हेतु  प्राकृतिक तरीकों को लागू किया जाना चाहिए। कीटों को हटाने या मैन्युअल रूप से मातम को दूर करने के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल रसायनों का उपयोग कर सकते हैं।

वाहनों का  कम उपयोग

  • वाहन बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं जो ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ ओजोन रिक्तीकरण का कारण बनते हैं। इसलिए जितना हो सके वाहनों का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए।

पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का उपयोग करें

  • अधिकांश सफाई उत्पादों में क्लोरीन और ब्रोमीन रिलीज करने वाले रसायन होते हैं जो वायुमंडल में रास्ता खोजते हैं और ओजोन परत को प्रभावित करते हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए इन्हें प्राकृतिक उत्पादों के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।

नाइट्रस ऑक्साइड का  निषिद्ध उपयोग

  • सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए और हानिकारक नाइट्रस ऑक्साइड के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जो ओजोन परत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। लोगों को नाइट्रस ऑक्साइड के हानिकारक प्रभावों और गैस का उत्सर्जन करने वाले उत्पादों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए ताकि इसका उपयोग व्यक्तिगत स्तर पर भी कम से कम हो।

आगे की राह :-

यद्यपि  ओजोन क्षरण एक वैश्विक समस्या है तथापि इसका निदान वैश्विक व व्यक्तिगत दोनों ही स्तरों पर होना चाहिए।  अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को मानते हुए व्यक्तिगत स्तर पर वृक्षारोपण इत्यादि  के द्वारा इसे रोकना ही मानव कल्याण हेतु उचित होगा

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र- 3

  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • हाल ही में ओजोन परत में  क्षरण देखा गया है।  इसके संभावित करने को बताते हुए इसके प्रभावों पर चर्चा करें ?

 

 

 

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