अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस - 2021 (World Thalassemia Day - 2021) : डेली करेंट अफेयर्स

अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस - 2021 (World Thalassemia Day - 2021)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में 8 मई को अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस-2021 (World Thalassemia Day-2021) को मनाया गया है।
  • वर्ष 2021 के अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस की थीम “एड्रेसिंग हेल्थ इनइक्वलिटी एक्रोस द ग्लोबल थैलेसीमिया कम्युनिटी” है।

अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस (World Thalassemia Day)

  • 8 मई को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस (World Thalassemia Day) मनाया जाता है।
  • इस दिवस को मनाने का उद्देश्य थैलेसीमिया के बारे में निर्णय और नीति निर्माणकर्ता, स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले पेशेवरों, रोगियों और उनके परिवारों तथा समुदाय के मध्य जागरूकता बढाना है।

थैलेसीमिया रोग क्या है?

  • थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार रोग जो कि जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में संचारित होता है।
  • इस रोग में हीमोग्लोबिन निर्माण के उत्तरदायी जींस या तो नष्ट हो जाते है या अनुपस्थित होते हैं।
  • उल्लेखनीय है कि हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाला एक प्रोटीन है, जो कि शरीर के अंगों और ऊतकों में ऑक्सीजन के परिवहन का कार्य करता है।
  • हीमोग्लोबिन की क्षति या अपर्याप्तता के कारण; लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, जिससे एनीमिया उत्पन्न हो सकता है।
  • थैलेसीमिया रोग में शरीर में लाल रक्त कण/रेड ब्लड सेल(आरबीसी) नहीं बन पाते हैं और जो थोड़े बन पाते हैं वह केवल थोड़े समय तक ही रहते हैं।
  • थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसा न करने पर बच्चा जीवित नहीं रह पाता है।

थैलेसीमिया के प्रकार

  • α-थैलेसीमिया (अल्फा थैलेसीमिया): यह तब होता है जब ‘α-globin प्रोटीन’ से संबंधित जीन या जीन समूह अनुपस्थित या परिवर्तित (उत्परिवर्तित) हो जाते हैं।
  • β-थैलेसीमिया (या बीटा थैलेसीमिया): यह तब होता है जब समान जीन दोष ‘β-globin प्रोटीन’ के उत्पादन को प्रभावित करते हैं।

थैलेसीमिया के उप-प्रकार:

  • थैलेसीमिया के α और β प्रकारों के कई उपप्रकार भी हैं। इनमें तीन प्रमुख रूप शामिल हैं:
  • थैलेसीमिया मेजर (गंभीर): इस प्रकार के रोग में रोगी को माता-पिता दोनों से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होते हैं। इस रोग से पीड़ित लोगों को गंभीर एनीमिया, धीमी विकास गति, परिपक्वता में विलंब के साथ प्लीहा, यकृत, हृदय या हड्डियों के साथ समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • थैलेसीमिया इंटरमीडिया- इसमें थैलीसीमिया के हल्के से लेकर गंभीर तक लक्षण देखने को मिलते हैं।
  • थैलेसीमिया माइनर (हल्का): इस प्रकार के विकार से पीड़ित लोग रोग के वाहक होते हैं। अधिकांश समय उनमें लक्षण नहीं होते हैं। थैलेसीमिया माइनर (हल्का) तब प्रकट होता है, जब माता-पिता दोनों में से रोगी को एक से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होता है।

थैलेसीमिया का इलाज

  • थैलेसीमिया का पता रक्त परीक्षण से किया जाता है। यह उपचार योग्य रोग है।
  • थैलेसीमिया मेजर के रोगियों के इलाज में क्रोनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन थेरेपी, आयरन कीलेशन थेरेपी आदि शामिल हैं।
  • इसमें कुछ ट्रांसफ्यूजन भी शामिल होते हैं, जो मरीज को स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की अस्थायी रूप से आपूर्ति करने के लिए आवश्यक होते हैं, ताकि उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो सके और रोगी के शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम हो।
  • कुछ बच्चों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) से ठीक किया जा सकता है।
  • इस प्रकार थैलेसेमिया अब घातक रोग नहीं है। प्रमाण दर्शाते हैं कि थैलेसेमिया से पीड़ित व्यक्ति उचित देखभाल और उपचार से लंबा और रचनात्मक जीवन जी सकता है तथा समाज में समाहित होकर अपना योगदान भी दे सकता है।

थैलेसेमिया से संबंधित राष्ट्रीय प्रयास

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), थैलेसेमिया सहित आनुवंशिक विकारों से पीड़ित बच्चों को प्रारंभिक जांच और उपचार प्रदान करता है।
  • थैलेसेमिया से पीड़ित रोगी को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के अंतर्गत राष्ट्रीय रक्त संचरण परिषद द्वारा नि:शुल्क रक्त प्रदान किया जाता है।
  • 'थैलेसेमिक्स इंडिया' जैसे कई गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) भारत में थैलेसेमिया से मुकाबला करने में मदद करने के लिए कार्य कर रहे हैं।