विश्व हीमोफीलिया दिवस 2021 (World Hemophilia Day 2021) : डेली करेंट अफेयर्स

‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ (World Hemophilia Day)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ (World Hemophilia Day-WHD) को मनाया गया है।

‘विश्व हीमोफीलिया दिवस’ (World Hemophilia Day-WHD)

  • विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस (डब्लूएचडी) हीमोफ़ीलिया एवं अन्य आनुवंशिक खून बहने वाले विकारों के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के लिए प्रतिवर्ष 17 अप्रैल को मनाया जाता है। यह ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया’ (World Federation of Hemophilia-WFH) की एक पहल है।
  • इस दिवस को मनाने की शुरुआत 1989 से की गई थी। विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस (डब्लूएचडी) को हीमोफीलिया तथा रक्तस्राव संबंधी अन्य आनुवंशिक विकारों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
  • वर्ष 2021 के विश्व हीमोफीलिया दिवस की थीम 'एडाप्टिंग टू चेंज' (Adapting To Change) रखी गई है।

क्या है “हीमोफ़ीलिया रोग?

  • यह एक ऐसा आनुवंशिक रोग है, जिसमें मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर 8 नहीं बनता, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' भी कहा जाता है। कई बार इस बीमारी की वजह से लीवर, किडनी, मसल्स जैसे इंटरनल अंगों में बिना किसी कारण रक्तस्त्राव होने लगता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो ख़ून में थक्के बनाने के लिए ज़रूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे ख़ून बहना अपने आप रुक जाता है। जिन लोगों को हीमोफीलिया होता है उनमें थक्के बनाने वाले घटक बहुत कम होते हैं। इसका मतलब है कि उनका ख़ून ज़्यादा समय तक बहता रहता है।
  • यहाँ "आनुवंशिक" का मतलब है, कि यह रोग जींस के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में पारित होता है। हीमोफिलिया रोग के वाहक एक्स गुणसूत्र में पाए जाते है। लगभग 10,000 पुरुषों में से 1 पुरुष के हीमोफीलिया से पीड़ित होने का ज़ोखिम होता है। महिलाएं ज्यादातर इस रोग के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक इकाइयों की वाहक की भूमिका निभाती हैं।

हीमोफिलिया के प्रकार

  • हीमोफिलिया ए- यह हीमोफिलिया का बेहद सामान्य प्रकार है। इसमें रक्त में थक्के बनने के लिए आवश्यक ‘फैक्टर 8’ की कमी हो जाती है।
  • हीमोफिलिया बी- यह बेहद कम सामान्य है। हीमोफिलिया से पीड़ित लगभग बीस प्रतिशत लोगों में हीमोफिलिया बी होता है। हीमोफिलिया बी में क्लॉटिंग कारक (फैक्टर-9) की कमी हो जाती है।

हीमोफीलिया रोग के वाहक कौन हैं?

  • हीमोफिलिया की वाहक महिलाएं हैं, जिनमे हीमोफिलिया जीन युक्त असामान्य X गुणसूत्र होता है। उनके दो X गुणसूत्रों में से एक ‘फैक्टर 8’ या ‘फैक्टर 9’ जीन में परिवर्तन हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ‘फैक्टर 8’ और ‘फैक्टर 9’ के स्तर में कमी हो जाती है।
  • अधिकांश वाहक महिलाओं में हीमोफिलिया के खून बहने वाले लक्षण दिखाई नहीं देते है। लेकिन ‘फैक्टर 8’ या ‘फैक्टर 9’ के स्तर में कमी की गतिविधि से पीड़ितों को सर्जरी के समय कुछ खून बहने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है या कुछ अन्य लक्षण जैसे कि मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक या बहुत ज़्यादा खून बहना एवं शरीर पर नीले धब्बे हो सकते है।

हीमोफिलिया बी के कारण

  • हीमोफिलिया बी, एक आनुवंशिक रक्त विकार है। यह माता-पिता से बच्चों में आने वाले जीन में खराबी से होता है। अक्सर महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चें में इस बीमारी के होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन कभी-कभी यदि जन्म से पहले जीन में किसी प्रकार का बदलाव आ जाए (म्यूटेशन), तो ऐसी स्थिति में भी होने वाले बच्चें को हीमोफिलिया बी हो सकता है।

हीमोफीलिया रोग के लक्ष्ण

  • हीमोफीलिया के रोगियों शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना, नाक से खून का बहना, आंख के अंदर खून का निकलना तथा जोड़ों की सूजन आदि लक्ष्ण दिखायी देते है।

कैसे होती है हीमोफीलिया की पहचान?

  • हीमोफीलिया के मरीजों की पहचान जेनेटिक टेस्टिंग से होती है। यह टेस्ट काफी विश्वसनीय माना जाता है। हालाँकि इसकी सुविधा कुछ ही प्रयोगशालाओं में है।

क्या है हीमोफीलिया का इलाज?

  • हालाँकि अभी हीमोफीलिया के उपचार की कोई दवा अभी नहीं बनायीं जा सकी है।
  • वैज्ञानिकों ने हीमोफीलिया के उपचार के लिए नई दवा विकसित करने में सफलता की ओर अग्रसर है। जीन थेरेपी उपचार को इस विकार से रोगियों को निजात दिलाने में प्रभावी पाई गई है।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, हीमोफीलिया ए पीड़ितों पर एक साल तक जीन थेरेपी दवा की एकल उपचार विधि आजमाई गई। यह दवा रक्त का थक्का बनने में मददगार प्रोटीन का स्तर सामान्य करने और रोगियों को ठीक करने में प्रभावी पाई गई।

हीमोफीलिया में बचाव के तरीके

  • चोट लगने की स्थिति में खून जमाने और घाव भरने के लिए मुंह से खाने वाली दवाएं और चोट वाली जगह पर लगाने की दवाएं आदि भी दी जाती हैं। मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए नियमित व्यायाम करना आवश्यक है जिससे सामान्य तंदुरूस्ती के साथ जोड़ों को भी स्वस्थ रखने और उनमें इंटरनल ब्लीडिंग से बचाव में लाभदायक होगा। बच्चा को खेलते समय हेलमेट, एल्बो और नी पैड्स एवं प्रोटेक्टिव जूते पहनाकर रखना चाहिए जिससे उन्हें चोट से बचाव हो सके।