स्टार्टअप दिवस (Startup Day) : डेली करेंट अफेयर्स

मौजूदा वक्त में देश में लगभग 60,000 स्टार्टअप्स हैं। इनमें से 44 यूनिकॉर्न हैं। यूनिकॉर्न का मतलब ये होता है कि उस स्टार्टअप का वैल्यूएशन 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। साथ ही, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। अकेले साल 2020 में यहां लगभग 15,000 से अधिक स्टार्टअप्स की स्थापना हुई। यही कारण है कि स्टार्टअप्स और इसके इकोसिस्टम को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

दरअसल हाल ही में प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि अब से हर साल 16 जनवरी को देश में स्टार्टअप दिवस मनाया जाएगा। इसके अलावा, अभी हाल ही में 46 स्टार्टअप्स के साथ एक इनक्यूबेटर और एक एक्सेलेरेटर को राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कारों 2021 का विजेता घोषित किया गया। इसमें विजेता स्टार्टअप संस्थापकों को 5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार और संबंधित सरकारी प्राधिकरणों एवं कॉरपोरेट्स के सामने अपने सलूशन को पेश करने का मौका मिलेगा। इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर को जीत की राशि के रूप में 15 लाख रुपए मिलेंगे।

स्टार्टअप नई आईडिया वाली एक ऐसी कंपनी होती है जिसने हाल ही में अपना कामकाज शुरू किया हो। नए कारोबारी एक नए आइडिया पर मिलकर काम करते हैं। इस तरह की कंपनी के जरिए ग्राहकों को एक नए तरह के प्रोडक्ट या सर्विस दी जाती है। स्टार्टअप सफल होने के बाद ये एक बड़ी कंपनी के तौर पर अपनी पहचान बना लेते हैं। भारत सरकार ने स्टार्टअप्स की कुछ परिभाषा तय की हुई है जैसे कि ऐसे कंपनी का मुख्यालय भारत में स्थित होना चाहिए; उसकी वार्षिक आय 100 करोड़ रूपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए; इसकी शुरुआत हुए 10 वर्ष से अधिक न हुआ हो और उसके पास कुछ नया आईडिया होना चाहिए। मौजूदा वक्त में 5 सेक्टर में स्टार्टअप ग्रोथ सबसे ज्यादा देखी जा रही है, जिसमें क्लाउड कंप्यूटिंग और बिग डाटा, शिक्षा, मोबाइल, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स शामिल हैं।

देश में नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने साल 2016 में एक स्टार्टअप इंडिया पहल लॉन्च किया था। इसमें तीन-चार मुख्य बातों पर फोकस किया गया जैसे कि सरलीकरण और हैंडहोल्डिंग, वित्तपोषण सहायता एवं प्रोत्साहन, उद्योग-अकादमी भागीदारी और इन्क्यूबेशन आदि। कार्यक्रम को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा डिजाइन किया गया था। इसके अलावा, भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई अन्य कदम भी उठाए गए हैं। जिसमें स्टार्टअप इकोसिस्टम के आधार पर राज्यों की रैंकिंग तैयार करना, SCO स्टार्टअप फोरम, 'प्रारंभ' (Prarambh) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाना, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना और फिशरीज़ स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज जैसे पहल शामिल हैं। हालाँकि, अभी भी कई ऐसी चुनौतियाँ मौजूद हैं जो भारत में स्टार्टअप्स की वास्तविक क्षमता को साकार करने की राह में बाधा बनी हुई हैं, उदाहरण के तौर पर क्षेत्रीय असंतुलन, डिजिटल डिवाइड, फंडिंग की समस्या और अच्छे कर्मचारियों की हायरिंग जैसे मुद्दे अगर सुलझते हैं तो इससे स्टार्टअप इकोसिस्टम को और गति मिल सकती है।

इस दिशा में और भी बेहतर करने के लिए विशेषज्ञ सुझाते हैं कि हमें स्कूली स्तर पर भी उद्यम कौशल के बारे में बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके अलावा, कृषि से संबंधित स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर जम्मू में डोडा ज़िले के गाँवों के लगभग 500 किसान जो कि पहले मक्के की खेती किया करते थे बाद में धीरे-धीरे वे लैवेंडर की खेती करने लगे। लैवेंडर की खेती की वजह से इन किसानों की आय में चौगुनी वृद्धि हुई है। इसे ही ‘बैगनी क्रांति’ का नाम दिया जा रहा है। यह अरोमा मिशन के तहत की गई पहल के कारण संभव हो पाया है। बता दें कि मेंथा, खस, पामारोजा, जिरेनियम जैसी कई सगंध फसलें उन इलाकों में भी हो सकती हैं जहां पानी कम बरसता है और वहां भी जहां कई बार बाढ़ आ जाती है। कम लागत में पैदा होने वाली ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एरोमा मिशन शुरु किया है।