मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रिपोर्ट (Report on Human-Wildlife Conflict) : डेली करेंट अफेयर्स

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रिपोर्ट (Report on Human-Wildlife Conflict)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में विश्व वन्यजीव कोष (World Wide Fund for Nature -WWF) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UN Environment Programme – UNEP) द्वारा 'ए फ्यूचर फॉर ऑल- ए नीड फॉर ह्यूमन- वाइल्डलाइफ कोएग्जिस्टेंस' (A Future for All–A Need for Human-Wildlife Coexistence) नामक रिपोर्ट जारी की गई है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, मनुष्यों और जानवरों के बीच संघर्ष दुनिया की कुछ सबसे प्रतिष्ठित प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए मुख्य खतरों में से एक है।

प्रमुख बिन्दु

  • इस रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से दुनिया में 75 प्रतिशत से अधिक जंगली बिल्ली की प्रजातियों की मौते हुईं । इसके अतिरिक्त, कई अन्य स्थलीय एवं समुद्री मांसाहारी प्रजातियाँ जैसे- ध्रुवीय भालू, एवं भूमध्यसागरीय मोंक सील के साथ-साथ हाथी आदि जैसे बड़े शाकाहारी जीव भी प्रभावित होते हैं।
  • 1970 के बाद से वैश्विक वन्यजीव आबादी में औसतन 68 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष उन प्रजातियों की महत्वपूर्ण गिरावट को प्रेरित करता है, जो कभी प्रचुर मात्रा में थीं। इसके अतिरिक्त जो प्रजातियां पहले से ही कम मात्रा में थीं, वे अब इन संघर्षों के परिणामस्वरूप विलुप्त होने के कगार पर धकेल दी गईं हैं । ऐसी परिस्थिति में पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता पर खराब प्रभाव पड़ेगा, जो चिंता का विषय है ।

भारत के परिप्रेक्ष्य में

  • भारत में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2014-2015 और 2018-2019 के बीच 500 से अधिक हाथियों की मौत हो गई, जो ज्यादातर मानव-हाथी संघर्ष के कारण हुई।
  • इसी अवधि के दौरान, हाथियों के साथ संघर्ष के परिणामस्वरूप 2,361 लोग मारे गए थे।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मानव आबादी निवास करती है और इसके साथ ही बाघों, एशियाई हाथियों, एक सींग वाले गैंडों, एशियाई शेरों और अन्य प्रजातियों की बड़ी आबादी भारत में पायी जाती है।

मानव वन्यजीव संघर्ष का प्रभाव

  • मानव वन्यजीव संघर्ष वन्यजीव के साथ-साथ मनुष्यों को भी प्रभावित करेगा, विशेषकर विकासशील देशों में जहां जैव विविधता समृद्ध है । इन संघर्षों के फलस्वरूप चोट, मौत या आजीविका को नुकसान हो सकता है।
  • भारत में हाथी जैसे जानवर अपने मूल आवास के केवल 3-4 प्रतिशत तक ही सीमित हैं। उनकी शेष सीमा वनों की कटाई, आक्रामक प्रजातियों और जलवायु परिवर्तन से ग्रस्त है। इस प्रकार जानवर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भोजन खोजने के लिए प्रेरित होते हैं, जहां वे मनुष्यों के साथ संघर्ष करते हैं।

सोनितपुर मॉडल

  • 'ए फ्यूचर फॉर ऑल- ए नीड फॉर ह्यूमन- वाइल्डलाइफ कोएग्जिस्टेंस' (A Future for All–A Need for Human-Wildlife Coexistence) रिपोर्ट ने असम के सोनितपुर जिले का उदाहरण दिया है। यहां जंगलों के विनाश ने हाथियों को फसलों पर हमला करने के लिए मजबूर कर दिया था, जिससे हाथियों और मनुष्यों दोनों की मौत हो गई थी।
  • इसके समाधान हेतु डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने 2003-2004 के दौरान 'सोनितपुर मॉडल' विकसित किया था, जिसमे विभिन्न समुदायों के सदस्यों को राज्य वन विभाग से जोड़ा गया। इन लोगों को, हाथियों को फसलों से सुरक्षित रूप से दूर भगाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।
  • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने हाथियों से फसलों की सुरक्षा को आसान बनाने के लिए एक कम लागत वाली, सिंगल स्ट्रैंड, गैर-घातक बिजली की बाड़ भी विकसित की थी।
  • इस मॉडल के लागू होने के फलस्वरूप फसल का नुकसान शून्य हो गया और मानव और हाथियों की मौत में भी काफी कमी आई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन हेतु पहल

  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने इसी वर्ष देश में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन के लिए परामर्श को मंजूरी दे दी है। इस परामर्श में वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 के अनुसार, संकटग्रस्त वन्य जीवों से निपटने में ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने की परिकल्पना की गई है।
  • इस परामर्श में मानव और वन्यजीव संघर्ष के कारण फसलों के नुकसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति का प्रावधान शामिल है ।
  • इसके तहत वन क्षेत्रों के भीतर चारे और पानी के स्रोतों को बढ़ाने जैसे कुछ महत्त्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
  • मानव -वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में पीड़ित परिवार को अंतरिम राहत के रूप में अनुग्रह राशि के एक हिस्से का भुगतान किया जाएगा।
  • परामर्श में स्थानीय/राज्य स्तर पर अंतर-विभागीय समितियों को निर्धारित करने, पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अपनाने, अवरोधों के निर्माण, 24X7 आधार पर संचालित होने वाले निःशुल्क हॉटलाइन नंबरों के साथ समर्पित क्षेत्रीय नियंत्रण कक्ष, हॉटस्पॉट की पहचान और और उनके कार्यान्वयन को अपनाने की अवधारणा भी की गई है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड

  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का गठन केंद्र सरकार द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 5- ए के तहत किया गया है।