राष्ट्रीय लॉजिस्टिक उत्कृष्टता पुरस्कार (National Logistics Excellence Award) : डेली करेंट अफेयर्स

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक उत्कृष्टता पुरस्कार (National Logistics Excellence Award)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक उत्कृष्टता पुरस्कारों की शुरुआत की है।
  • इन पुरस्कारों से लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल विभिन्न कंपनियों को पहचान मिलेगी।

प्रमुख बिन्दु

  • लॉजिस्टिक क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक उत्कृष्टता पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की है।
  • इन पुरस्कारों की रूपरेखा को लॉजिस्टिक संगठनों और उपयोगकर्ता उद्योग भागीदारों के साथ परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। पुरस्कार की दो श्रेणियां हैं, पहले समूह में लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर/ सेवा प्रदाता शामिल हैं और दूसरी विभिन्न उपयोगकर्ता उद्योगों के लिए है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक उत्कृष्टता पुरस्कार का उद्देश्य

  • इन पुरस्कारों में प्रक्रिया मानकीकरण, तकनीक सुधार, डिजिटल बदलावों और टिकाऊ प्रक्रियाओं सहित सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं पर जोर दिया जाएगा।
  • इन पुरस्कारों के माध्यम से लॉजिस्टिक सेवा प्रदाताओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है, जिन्होंने अन्य उपलब्धियों के साथ ही परिचालन उत्कृष्टता हासिल की है, डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी को अपनाया है, ग्राहक सेवा में सुधार किया है और टिकाऊ प्रक्रियाओं को लागू किया है।
  • इन पुरस्कारों के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, आपूर्ति व्यवस्था का विकास, कौशल विकास, स्वचालन और अन्य कार्यों की दिशा में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों का प्रदर्शन किया जाएगा।
  • ये पुरस्कार संगठनों के असाधारण कदमों की सराहना का एक अवसर भी होंगे, जो उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आई कमियों के समाधान के लिए उठाए हैं। इनमें लास्ट माइल डिलिवरी स्टार्ट-अप, शीत भंडारण सुविधाओं का विकास, ऑक्सीज़न की प्रभावी आपूर्ति और जरूरतमंद लोगों को आवश्यक वस्तु एवं सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति शामिल हैं।

भारतीय लॉजिस्टिक क्षेत्र

  • भारतीय लॉजिस्टिक क्षेत्र जहां वर्ष 2020 में लगभग 215 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के साथ 10.5 प्रतिशत सीएजीआर दर से बढ़ रहा है, वहीं इसके साथ समस्याएं भी जुड़ी हैं; जिनमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
  • भारत के जीडीपी में लॉजिस्टिक की समग्र लागत लगभग 14 प्रतिशत आती है। 8 प्रतिशत के वैश्विक औसत की तुलना में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता के अंतर को कम करने के लिए भारतीय लॉजिस्टिक क्षेत्र को वैश्विक लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में शीर्ष 25 देशों में शामिल होने की महत्वाकांक्षा के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तरह उन्नत, संगठित और कुशल बनाना होगा।