कवल टाइगर रिज़र्व (Kawal Tiger Reserve) : डेली करेंट अफेयर्स

कवल टाइगर रिज़र्व (Kawal Tiger Reserve)

कवल बाघ आरक्षित क्षेत्र तेलंगाना राज्य में स्थित महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व है। इस टाइगर रिजर्व के कोर एरिया के दायरे में आने वाले सड़क मार्गों के विस्तार और उन्हें चौड़ा करने के प्रस्तावों के बाद यह टाइगर रिजर्व चर्चा में आ गया है।

इस निर्णय के चलते तेलंगाना स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्डलाइफ का विरोध भी होना शुरू हो गया है। दरअसल हाल में तेलंगाना स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्डलाइफ ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के क्रियान्वयन के लिए 150 एकड़ वन भूमि के उपयोग की मंजूरी दे दी है और यह भूमि वन्यजीव क्षेत्र में पड़ता है इसलिए इस निर्णय का विरोध हो रहा है कि कवल टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों , बाघों को यह नुकसान पहुँचाने वाला निर्णय है।

कवल टाइगर रिजर्व की कनेक्टिविटी महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व और छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिज़र्व से है । कहने का मतलब यह है कि ये तीनों टाइगर रिजर्व इंटर स्टेट टाइगर कॉरिडोर के रूप में भी काम करते हैं और इससे बाघों का प्राकृतिक विकास भी सुनिश्चित होता है।

कवल टाइगर रिजर्व मुख्य रूप से गोदावरी और दो छोटी नदियों 'कदम' और पेद्दावागु के जलग्रहण क्षेत्र ( catchment area) में पड़ता है जो इस कवल टाइगर रिजर्व और अभयारण्य के दक्षिण में बहती हैं।

यदि हम कवल टाइगर रिज़र्व के वनस्पति विविधता की बात करें तो यहां मुख्य रूप से दक्षिणी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इस टाइगर रिज़र्व में सागौन ( teak) के वृक्ष और बांस बड़ी मात्रा में मिलते हैं। यहां 673 वनस्पति प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा यहां टर्मिनलिया, पेरोकार्पस, एनोगाइसिस और कैसियास के वृक्ष भी पाए जाते हैं।

कवल टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा मॉनिटर लिजर्ड , ब्लैक बक , चिंकारा , तेंदुआ, गौर, चीतल, सांभर, नीलगाय, बार्किंग डियर और स्लॉथ बियर, आदि शामिल हैं।

कवल टाइगर रिज़र्व की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी और इसे वर्ष 1999 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत ‘संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किया गया था। भारत सरकार ने वर्ष 2012 में कवल वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिज़र्व घोषित किया था।