हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) : डेली करेंट अफेयर्स

हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नासा (NASA) ने बताया है कि ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) को लगभग एक महीने तक 'सेफ मोड' पर रखने के बाद ठीक कर लिया गया है।

हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope ...

प्रमुख बिन्दु

  • पॉवर कंट्रोल यूनिट में गड़बड़ी के चलते लगभग एक महीने तक ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) 'सेफ मोड' पर था, किन्तु अब इस खराबी को ठीक कर लिया गया है और हबल का सम्पर्क सभी उपकरणों के साथ बहाल हो गया है।
  • उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पूर्व ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) के एक पेलोड कंप्यूटर में खराबी आ गई थी।
  • इस पेलोड कंप्यूटर में खराबी आने से ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) ने पिछले कुछ दिनों से काम करना बंद कर दिया था। क्योंकि इसी पेलोड कंप्यूटर से ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ के विज्ञान से जुड़े उपकरणों को नियंत्रित किया जाता था।

हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope)

  • यह टेलीस्कोप ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ की है जिसे अंतरिक्ष में पृथ्वी की ‘निम्न भू-कक्षा’ (Low Earth- orbit) में सन् 1990 में स्थापित किया गया था।
  • इसका निर्माण अमेरिकी स्पेस एजेंसी ‘नासा’ ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी के सहयोग से किया था।
  • हबल स्पेस टेलीस्कोप ने 1990 से वर्तमान तक अनवरत रूप से ब्रह्मांड के बारे में कई उल्लेखनीय जानकारी दी हैं। इस टेलीस्कोप के द्वारा ही ब्रह्मांड के ‘फैलाव की दर’ की गणना की गयी है।
  • हब्बल स्पेस टेलीस्कोप पराबैंगनी दृश्य अवरक्त किरणों का उपयोग कर खगोलीय पिण्डों की जानकारी जुटाती है।

भारत एवं विश्व के कुछ अन्य प्रमुख टेलीस्कोप

  • देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोपः आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) ने ‘देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप’ को सन् 2016 में उत्तराखण्ड के देवस्थल में स्थापित किया था। यह 3.6 मीटर व्यास वाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप है। ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने हेतु इसे भारत-बेल्जियम के संयुक्त प्रयास द्वारा स्थापित किया गया था। गौरतलब है कि आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आता है।
  • फास्ट टेलीस्कोपः फ़ास्ट (FAST) का पूरा नाम ‘फाइव हंड्रेड मीटर एपर्चर स्फेरिकल टेलीस्कोप’ है। इस टेलीस्कोप को चीन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित गुइझोऊ प्रांत में स्थापित किया गया है। इस टेलीस्कोप में 500 मीटर व्यास वाला एपर्चर है, अतः इसी कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी टेलीस्कोप कहा जाता है। इसकी स्थापना चीन ने सन् 2011 में की थी।
  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोपः यह भविष्य की टेलीस्कोप है जिसे वर्ष 2021 तक अंतरिक्ष में स्थापित किये जाने की योजना है। इस टेलीस्कोप के निर्माण में तीन अंतरिक्ष एजेंसियाँ संलग्न हैं-नासा, यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडियन अंतरिक्ष एजेंसी। यह टेलीस्कोप विश्व की सर्वाधिक उन्नत अंतरिक्ष टेलीस्कोप होगी। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ‘अवरक्त प्रकाश’ पर आधारित तकनीक पर कार्य करेगी।
  • ग्रोथ-इंडिया टेलीस्कोपः यह टेलीस्कोप भारत के हनले (लद्दाख) में स्थित ‘भारतीय खगोलीय वेधशाला’ (Indian Astronomical Observatory) में स्थापित की गयी है। ग्रोथ-इंडिया टेलीस्कोप कई देशों (यथा-यूएसए, जर्मनी, इजराइल, जापान, यूनाइटेड किंगडम आदि) की संयुक्त पहल ‘ग्रोथ’ (GROWTH- Global Relay of Observatories Watching Transients Happen) का हिस्सा है। ग्रोथ पहल के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं- बाइनरी न्यूट्रॉन के विलय की पहचान करना, सुपरनोवा विस्फोट का अध्ययन और क्षुद्र ग्रहों का अध्ययन।