फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी सरकार : डेली करेंट अफेयर्स

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी सरकार

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार ने फ्लेक्स इंजनों (flex engines) का उपयोग करने वाले लचीले ईंधन वाहनों (flexible fuel vehicles– FFVs) के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने का संकेत दिया है।

प्रमुख बिंदु

  • केंद्र सरकार फ्लेक्स इंजनों (flex engines) का उपयोग करने वाले लचीले ईंधन वाहनों (flexible fuel vehicles– FFVs) के उपयोग के लिए नए दिशानिर्देश चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक जारी कर सकती है।
  • ये निर्देश ईंधन मिश्रण में निर्धारित परिवर्तनों के हिसाब से इंजन कॉन्फिगरेशन और वाहनों में आवश्यक बदलावों के बारे मे होंगे।

फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल

  • एफएफवी यानि फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल(flexible fuel vehicles) सामान्य वाहनों का एक संशोधित संस्करण है जो इथेनॉल मिश्रणों के विभिन्न स्तरों के साथ गैसोलीन और डोप्ड पेट्रोल(doped petrol) दोनों पर चल सकता है। ये वर्तमान में ब्राजील में सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे लोगों को कीमत और सुविधा के आधार पर फ्यूल (गैसोलीन और इथेनॉल) स्विच करने का विकल्प मिल रहा है।
  • फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को सभी मिश्रणों का उपयोग करने और बिना मिश्रित ईंधन पर चलने की अनुमति देगा। भारत के लिए, FFV व्हीकल एक अलग लाभ पेश करेंगे क्योंकि वाहनों को देश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के विभिन्न मिश्रणों का उपयोग करने की सुविधा मिल जाएगी।
  • मौजूदा नियम पेट्रोल में 10 फीसदी तक एथेनॉल मिलाने की इजाजत देते हैं। हालांकि, कम आपूर्ति और परिवहन चुनौतियों के कारण, 10 प्रतिशत मिश्रित पेट्रोल केवल 15 राज्यों में उपलब्ध है, जबकि अन्य राज्यों में जैव-ईंधन 0 से 5 प्रतिशत के बीच है।

लाभ

  • वर्तमान में, भारत में जैव-इथेनॉल का सबसे स्पष्ट और विश्वसनीय स्रोत गन्ना है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी बाजार, भारत लगभग 800 अरब रुपये की चीनी का उत्पादन करता है और लगभग 4 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है, इसलिए इथेनॉल कार्यक्रम के अनिवार्य सम्मिश्रण से किसानों को उच्च आय हासिल होने में मदद मिलेगी।
  • फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल (FFVs) के माध्यम से प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम किया जा सकता है जिससे वातावरण में हानिकारक उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • वर्तमान में भविष्य का कहे जाने वाले ईंधन इथेनॉल की कीमत, पेट्रोल और डीजल के मुक़ाबले 40 फीसद तक कम है, इसलिए इथेनॉल का उपयोग करने से पैसे की बचत होगी ।

चुनौतियाँ

  • फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल (FFV ) लागू होने के बाद ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन लाइन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का खर्च बढ़ जायेगा । गौरतलब है कि पहले से ही 10 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के उपयोग और बीएस-6 फ्यूल की शुरूआत ने वाहन बनाने की लागत में इजाफा किया हुआ है।
  • जैव-इथेनॉल का प्रमुख स्रोत गन्ना है,जिसे पानी की बहुत आवश्यकता होती है, महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र पहले से ही सूखे की मार झेल रहा है।
  • चूंकि महाराष्ट्र में गन्ने के लिए 6 प्रतिशत भूमि उपयोग होता है, मगर राज्य में इसकी सिंचाई के लिए 70 प्रतिशत पानी की खपत करनी पड़ती है। ऐसे में इथेनॉल कार्यक्रम को अपनाना आसान नहीं है ।