फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम (Fragile X Syndrome) : डेली करेंट अफेयर्स

फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम (Fragile X Syndrome)

हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम ( Fragile X syndrome ) बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह एक अनुवांशिक बीमारी ( genetic disease) है जो बौद्धिक दुर्बलताओं ( intellectual disabilities) जैसे ऑटिज्म , स्पीच डिले , अटेंशन डेफिसिट ( ध्यान दे पाने में कमी) , हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर का महत्त्वपूर्ण कारण बनती है और 25 प्रतिशत मरीजों में दौरे ( seizures) का कारण बनती है।

यह सिंड्रोम फ्रेजाइल एक्स मेन्टल रिटारडेशन 1 जीन में बड़े म्यूटेशन के चलते होता है और यही जीन नार्मल ब्रेन डेवलपमेंट के लिए जरूरी एक प्रोटीन को बनाती है। ऐसा आंकलन किया गया है कि भारत में करीब 2 लाख से 4 लाख के बीच बच्चे इस समस्या का शिकार होते हैं और अधिकांश के इस रोग को डायग्नोज भी नहीं किया जा पाता।

ब्लड जेनेटिक टेस्टिंग के जरिये ही इस सिंड्रोम को डायग्नोज किया जा सकता है। इस जीन को 1990 के दशक में खोजा गया था। वैसे तो जेनेटिक डिसऑर्डर्स का कोई इलाज नही है लेकिन ट्रीटमेंट के जरिये बच्चें को महत्वपूर्ण कौशल ( skills) जैसे चलना और बोलना तथा दूसरे से इंटरएक्ट करना।

आमतौर पर इस सिंड्रोम से बौद्धिक विकास में विलंब हो जाता है और वो भी खासकर लड़कों में। यह हाइपर एक्टिविटी और ऑटिज्म को उत्पन्न कर सकता है। इस बीमारी का कोई इलाज नही है। अगर एक बच्चे को यह सिंड्रोम है तो दूसरे में भी इसके होने का खतरा रहता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के 2.5 माह बाद एक जेनेटिक टेस्ट कराया जा सकता है और यदि दूसरे बच्चे में भी जीन म्युटेशन है तो डॉक्टर्स के अनुसार प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट किया जा सकता है।