सीएसआईआर की पहली महिला महानिदेशक : डेली करेंट अफेयर्स

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वरिष्ठ वैज्ञानिक नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का महानिदेशक बनाया गया है। वह शेखर मांडे का स्थान लेंगी, जो अप्रैल में सेवानिवृत्त हो गए। इनकी नियुक्ति दो साल की अवधि के लिए की गयी है।

नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी के बारे में

तमिलनाडु में तिरुनेलवेली जिले के छोटे-से शहर अंबासमुद्रम की रहने वाली कलाइसेल्वी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तमिल भाषा में प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक बनने का सपना देखा और उन्होंने सीएसआईआर को ज्वाइन किया। कलाइसेल्वी का 25 साल से ज्यादा का अनुसंधान कार्य मुख्यत: विद्युत रासायनिक ऊर्जा प्रणाली, खासतौर से इलेक्ट्रोड के विकास पर केंद्रित रहा है। वह अभी सोडियम-आयन/लिथियम-सल्फर बैटरी और सुपरकैपेसिटर के विकास पर काम कर रही हैं। लिथियम आयन बैटरी के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। कलाइसेल्वी ने नेशनल मिशन फॉर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में अहम योगदान भी दिए हैं। उनके नाम पर 125 से अधिक शोध पत्र और छह पेटेंट भी हैं।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के बारे में

यह भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठन है। इसकी स्थापना 26 सितंबर 1942 को हुई थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह एक अखिल भारतीय संस्थान है जिसमें 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 आउटरीच केंद्र, 3 इनोवेशन कॉम्प्लेक्स का एक सक्रिय नेटवर्क शामिल है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा का वित्तपोषण किया जाता है तथा यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय के रूप में पंजीकृत है।

CSIR का उद्देश्य

राष्ट्रीय महत्त्व से संबंधित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान करना है अर्थात दैनिक उपयोग में आने वाली चीजो का अनुसंधान के माध्यम से हल प्रदान करना है।

CSIR की संगठनात्मक संरचना

  • अध्यक्ष: भारत का प्रधानमंत्री (पदेन अध्यक्ष)
  • उपाध्यक्ष: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (पदेन उपाध्यक्ष)
  • महानिदेशक (Director General) संचालक मंडल का प्रमुख होता है।

गतिविधियाँ

  • संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधानो का सवर्द्धन, मार्गदर्शन और समन्वयन करना।
  • औद्योगिक व व्यापारिक समस्याओं के वैज्ञानिक अध्ययन के लिये विशेष संस्थानों या मौजूदा संस्थानों के विभागों की स्थापना करना और सहायता देना।
  • शोध हेतु छात्रवृत्ति और फैलोशिप प्रदान करना।
  • परिषद के तत्त्वावधान में किये गए अनुसंधान के परिणामों का उपयोग देश में उद्योगों के विकास के लिये करना।
  • वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान में प्रगति के लिये प्रयोगशालाओं, कार्यशालाओं, संस्थानों तथा संगठनों की स्थापना, रखरखाव एवं प्रबंधन।
  • वैज्ञानिक अनुसंधानों संबंधी सूचनाओं के संग्रह और प्रसार के साथ-साथ सामान्य रूप से औद्योगिक मामलों के संबंध में भी सूचनाओं का संग्रह और प्रसार करना।