इथेनॉल: जीवाश्म ईधनों का विकल्प : डेली करेंट अफेयर्स

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार ने 2025 तक गैसोलीन के साथ 20% इथेनॉल मिश्रण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इथेनॉल मिश्रण करने से 2023 से चीनी में दी जाने वाली सब्सिडी में कमी करने में मदद मिलेगी।

इथेनॉल-

इथेनॉल एक जैव ईधन है जिसका उत्पादन गेंहूं, आलू, गन्ना आदि कृषि उत्पादों से होता है। भारत में इथेनॉल का उत्पादन गन्ने के शीरे के किण्वन प्रक्रिया द्वारा होता है। इसका उपयोग कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण के रूप में भी किया जाता है।

सरकार द्वारा उठाये गये कदम-

परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा कुछ उपाय किये गये है, जो निम्नलिखित है-

  1. इथेनॉल ब्लेडिंग प्रोग्राम- हाल ही में भारत सरकार ने इथेनॉल सम्मिश्रण के लिए एक रोडमैप जारी किया है। जिसमें इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को परिवर्तित करके (2030 के लक्ष्य को) 2025 तक पूरा करने को कहा गया है। जिसके तहत पेट्रोल में 20% तक इथेनॉल का मिश्रण किया जाना है। वर्तमान में यह मिश्रण 8.5% का है।
  2. हाइड्रोजन ईधन- हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन भी शुरू किया है। इस मिशन के तहत हरित ऊर्जा संशोधनों से हाइड्रोजन उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। इस मिशन में भारत की बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता को हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था से जोड़ना भी शामिल है।
  3. इलेक्ट्रिक वाहन नीति- भारत सरकार द्वारा जारी इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2020 का लक्ष्य 2024 तक कुल वाहनों में 25% इलेक्ट्रिक वाहन तथा बसों में 50% इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करना है। इलेक्ट्रिक नीति का मुख्य लक्ष्य वायु प्रदूषण को कम करना है क्योंकि बढ़ते वायु प्रदूषण ने दिल्ली जैसे शहरों में स्वास्थ्य चिंताओं को बढ़ा दिया है।

भारत को अन्य देशों से सीखने की जरूरत-

भारत में इथेनॉल मिश्रण का स्तर अन्य देशों की तुलना में कम है। आज दुनिया के अधिकांश देश जीवाश्म ईधन के प्रयोग को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रण के अनुपात को बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए ब्राजील पेट्रोल में इथेनॉल 48% तक मिश्रित कर रहा है। इथेनॉल के मिश्रण से वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इथेनॉल सम्मिश्रण के संभावित लाभ:-

  • फसल जलाने में कमी लाने और कृषि संबंधी अवशिष्ट को जैव ईधन में बदलकर ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • फसलों के लिए वैकल्पिक बाजार उपलब्ध होगा जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकेगी।
  • जीवाश्म ईधन के आयात निर्भरता में कमी आयेगी।

बैटरी चालित वाहन और इथेनॉल ईधन से चलने वाले वाहनों में तुलना:-

  • इथेनॉल ईधन से चलने वाले वाहन इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में ज्यादा दक्ष किफायती व सुविधाजनक होते हैं।
  • बैटरी चलित वाहनों में बैटरी को बिजली से चार्ज करना पड़ता है, जिसके लिए ऊर्जा सामान्यतया कोयले से प्राप्त होती है। अतः यह अप्रत्यक्ष रूप से अनवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देता है। जबकि इथेनॉल ईधन से चलने वाले वाहनों में अधिकांश में स्वच्छ ऊर्जा की खपत होती है।
  • बैटरी चलित वाहन कम सुविधाजनक होते है क्योंकि चार्जिंग स्टेशन के लिए आधारभूत संरचना की समस्या विद्यमान है तथा यह ज्यादा दूरी की यात्रा के लिए दक्ष नहीं होते है। जबकि इथेनॉल ईधन में यह समस्या नहीं है।
  • बैटरी वाहनों में बैटरी की जीवन अवधि 8 से 10 वर्ष की होती है जिससे लागत में बढ़ोतरी होती है।

नवीकरणीय स्रोत से प्राप्त ऊर्जा से संबंधित सीमाएं-

  • अभी भी नवीकरणीय स्रोत से पर्याप्त मात्र में उत्पादन क्षमता प्राप्त नहीं हुई है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा सामान्यतया अविश्वसनीय होती है क्योंकि यह प्राकृतिक घटनाओं से अधिक प्रभावित होती है जैसे सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा आदि।
  • नवीकरणीय ऊर्जा में लागत खर्च ज्यादा है। इसके साथ ही रखरखाव का खर्च कुल खर्च को बढ़ा देता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा के कारण परम्परागत इंजनों में भी बदलाव की आवश्यकता होगी जो वाहन के उत्पादन के खर्च को बढ़ा सकता है।

आगे की राह-

भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को स्वास्थ्य पर्यावरण देना हमारा कर्तव्य है जिनके लिए आवश्यक है जीवाश्म ईंधनों के विकल्प की ओर अग्रसर होना। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम हमारे लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग प्रदान कर सकता है। इसके लिए आवश्यकता है एक एकीकृत दृष्टिकोण और सुसंगत नीति की। सरकार को जीवाश्म ईंधन से अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा प्रणालियों की निर्भरता दूर करके टिकाऊ और लचीले भविष्य का निर्माण करना चाहिए।