2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-deoxy-D-glucose) मेडिसिन : डेली करेंट अफेयर्स

2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-deoxy-D-glucose) मेडिसिन

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में डीजीसीआई ने डीआरडीओ द्वारा विकसित कोविड-19 महामारी की दवा ‘2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज’ (2-deoxy-D-glucose) के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खाद्य ...

प्रमुख बिन्दु

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) द्वारा '2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी)' दवा का एक ‘एंटी कोविड-19’ चिकित्सकीय अनुप्रयोग विकसित किया गया है।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) ने यह कार्य 'डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज (डीआरएल), हैदराबाद' के सहयोग से किया है।
  • नैदानिक परीक्षण परिणामों (Clinical trial results) से ज्ञात हुआ है कि यह मेडिसिन (2-डीजी) अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों की तेजी से रिकवरी में मदद करती है।
  • इसके अलावा, यह बाहर से ऑक्सीजन देने पर निर्भरता को भी कम करती है। इसलिए यह दवा कोविड-19 से पीड़ित लोगों के लिए काफी फायदेमंद है।
  • यही कारण है कि डीजीसीआई ने ‘2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज’ (2-deoxy-D-glucose) के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। ताकि वर्तमान में कोविड-19 महामारी की चुनौतियों से निपटा जा सके।

‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (DCGI)

  • ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (Drug Controller General of India- DCGI), भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
  • दरअसल डीजीसीआई, केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organization-CDSCO) का प्रमुख होता है। यह एक भारतीय दवा नियामक संस्था है।
  • यह भारत में विभिन्न दवाओं और टीके आदि के लाइसेंस के अनुमोदन के लिए जिम्मेदार है।
  • इसके अलावा, डीसीजीआई भारत में दवाओं के विनिर्माण, बिक्री, आयात और वितरण के लिए मानक भी निर्धारित करता है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defense Research and Development Organization) भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है।
  • यह संगठन भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक इकाई के रूप में काम करता है।
  • इसकी स्थापना 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी।
  • वर्तमान में संस्थान की अपनी इक्यावन प्रयोगशालाएँ हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान में कार्यरत हैं।