डब्ल्यूटीओ की सार्थकता: वैश्विक व्यापार के बेहतर विनियमन की जरूरत - आवश्यकता एवं चुनौतियाँ - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

संदर्भ

  • विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जिस संकट से गुजर रहा है वह किसी से छुपा नहीं है। मौजूदा समय में वैश्विक व्यापार नियमों में विश्व व्यापार संगठन की प्रासंगिकता को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जहां कोविड महामारी ने वैश्विक आपूर्ति शृंखला और व्यापार को बाधित किया है, वैश्विक व्यापार को संरक्षित करने और उसके भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए डब्ल्यूटीओ को पुनः सक्रिय किए जाने की आवश्यकता है।

डब्ल्यूटीओः कार्य और संरचना

  • विश्व व्यापार संगठन 1 जनवरी, 1995 को बहुआयामी व्यापार समझौते के उरुग्वे दौर में तात्कालिक सदस्यों की सहमति से अस्तित्व में आया। डब्ल्यूटीओ का मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है और इसके सदस्यों की संख्या 164 है।

विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख कार्य निम्नलििखत हैं-

  • व्यापार समझौतों को प्रशासित करना,
  • व्यापार प्रतिनिधियों के लिए फोरम की स्थापना करना,
  • व्यापार विवादों को सुलझाना,
  • व्यापार नीतियों की निगरानी करना,
  • विकासशील देशों के लिए तकनीकी सहयोग व प्रशिक्षण देना तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से सहयोग करना।

विश्व व्यापार संगठन की संरचना तीन स्तरीय होती है-

  • मंत्री स्तरीय सम्मेलन
  • सामान्य परिषद
  • महानिदेशक एवं सचिवालय
  • डब्ल्यूटीओ की शीर्ष इकाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है। डबल्यूटीओ के सभी नीतिगत निर्णय एवं समझौते इसी इकाई द्वारा किए जाते हैं। इसमें प्रत्येक सदस्य देश का एक-एक प्रतिनिधि होता है। इसकी बैठक प्रत्येक दो वर्षों की अवधि में एक बार अनिवार्य रूप से होती है।
  • मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के निर्णयों एवं समझौतों के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए एक सामान्य परिषद (General council) की व्यवस्था की गई है जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि रहते हैं। सामान्य परिषद को अन्य समितियों के लिए नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।
  • सामान्य परिषद की सहायता के लिए सेवा व्यापार परिषद, वस्तु व्यापार परिषद एवं व्यापार से जुड़े बौद्धिक सम्पदा अधिकार परिषद बनाई गयी है जो सामान्य परिषद की देखरेख एवं सामान्य निर्देशन के अंतर्गत कार्य करती है।
  • विश्व व्यापार संगठन के निर्णयों एवं समझौतों के कार्यान्वयन के लिए जेनेवा में एक सचिवालय है, जिसके महानिदेशक की नियुक्ति मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के द्वारा की जाती है। इसके अधिकार, कर्तव्य एवं सेवा शर्तों का निर्धारण भी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन द्वारा ही किया जाता है।

विश्व व्यापार संगठन का महत्व

  • विश्व व्यापार संगठन का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांत पर आधारित है।
  • इसमें प्रत्येक देश को एक समान मतदान का अधिकार प्राप्त है।
  • एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन-MFN) तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि व्यापार में सभी सदस्यों के अधिकार सुरक्षित हों।
  • विवाद निपटान निकाय (Dispute Settlement Body) व्यापार नियमों को लागू करता है और सभी देशों के मुद्दों पर समान रूप से विचार करता है।
  • इसलिए नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए डब्ल्यूटीओ जैसे संस्था का सक्रिय रूप से कार्य करना बहुत महत्वपूर्ण है।

डब्ल्यूटीओ से जुड़े हालिया मुद्दे

  • डब्ल्यूटीओ निम्नलििखत प्रमुख मुद्दों के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा हैः
  • सर्वसम्मति बनाने की समस्याः डब्ल्यूटीओ 164 सदस्य देशों का एक बड़ा निकाय है, इसलिए इतने सदस्यों के बीच किसी मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाना कठिन कार्य हो जाता है।
  • प्राथमिकताओं में विचलनः दोहा विकास एजेंडे की प्राथमिकताएं विकासशील और अविकसित देशों की ओर अभिमुिखत हैं। दोहा एजेंडा का सीधा संबंध विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा से है एवं इसके तहत विकसित देशों को अपने यहाँ कृषि सब्सिडी में कटौती करनी है। दोहा एजेंडे पर सहमति नहीं बन पायी। उरुग्वे दौर भी इन देशों के विकास को बढ़ावा देने और इनके साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने पर केन्द्रित है। जबकि विकसित राष्ट्र ई-कॉमर्स, निवेश सुगमता, सेवा व्यापार, लिंग मानदंडों जैसे मुद्दों के आधार पर नया एजेंडा प्रस्तावित कर रहे हैं।
  • विवाद निपटान निकाय (DSB) की निष्क्रियताः अमेरिका द्वारा पिछले कुछ वर्षों से WTO के अपीलीय निकाय में सदस्यों की नियुक्ति को अवरुद्ध किया जा रहा है और इसका गंभीर प्रभाव WTO की विवाद निपटान प्रणाली पर पड़ रहा है।
  • क्षेत्रीय व्यापार समझौतों में वृद्धि और WTO के बौद्धिक सम्पदा और श्रम कानूनों के बढ़ते प्रावधान भी नई चुनौतियों को प्रस्तुत करते हैं। प्रशांत देशों के बीच ट्रांस-पैसिफिक साझेदारी इसी का एक उदाहरण है।
  • विश्व व्यापार संगठन को दरकिनार करते हुए व्यापार युद्ध जैसे परिस्थितियां को पैदा किया जाना।
  • विकासशील देशों के वर्गीकरण मानदंडों जैसे कई मुद्दों के नाम पर यूएसए द्वारा डबल्यूटीओ के साथ सहभागिता में अनिच्छा जाहिर करना।
  • पिछले कुछ वर्षों से अधिकांश देशों द्वारा आर्थिक नीतियों में संरक्षणवादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया गया है एवं WTO इन संरक्षणकारी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने में विफल रहा है। कोविड 19 महामारी के कारण इन संरक्षणवादी प्रवृत्तियों को और बढ़ावा मिला है जो कि चिंता का विषय है।

डब्ल्यूटीओ की प्रासंगिकता

  • डब्ल्यूटीओ की प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए निम्नलििखत प्रमुख सुझावों को अपनाया जा सकता हैः
  • डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों को नए महानिदेशक की शीघ्रता से नियुक्ति करनी चाहिए। महानिदेशक का मुख्य कार्य सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना होता है। इसके लिए आवश्यक है कि महानिदेशक राजनीतिक रूप से तटस्थ और निष्पक्ष हो।
  • डब्ल्यूटीओ के सुचारू संचालन के लिए यूएसए को इसमें संलग्न किया जाना चाहिए। डब्ल्यूटीओ की प्रक्रिया के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए सदस्य देशों की वास्तविक चिंताओं को संबोधित किया जाना चाहिए।
  • विवाद निपटान निकाय (DSB) को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए, क्योंकि बिना विवाद निपटान तंत्र के डब्ल्यूटीओ की प्रासंगिकता ही धूमिल हो जाती है। इसके लिए यूएसए को भी आश्वस्त किया जाना चाहिए।
  • जून 2021 में होने वाले आगामी मंत्रीस्तरीय सम्मेलन के एजेंडे को सीमित किया जाना चाहिए ताकि इसकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। इससे संगठन की कार्य क्षमता में भी वृद्धि हो सकती है।
  • इसके अलावा डब्ल्यूटीओ को चीन और उसकी व्यापार प्रथाओं पर फिर से विचार करना करना होगा। यह सिर्फ इसलिए नहीं की चीन विश्व व्यापार संगठन का एक महत्वपूर्ण सदस्य है बल्कि इसलिए भी क्योंकि कई देश चाहते हैं कि संगठन चीन के राज्य स्वामित्व वाले उद्यमों, उसके द्वारा तकनीकी हस्तांतरण और गैर-बाजार अर्थव्यवस्था की भूमिका जैसे मुद्दों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
  • विश्व व्यापार संगठन ई-कॉमर्स, निवेश और सेवाओं व्यापार जैसे मुद्दों के लिए मध्यम अवधि में भविष्य की बातचीत का एजेंडा भी तय करना चाहिए और इसमे विकासशील देशों की समस्याओं को भी संबोधित किया जाने समेत दोहा एजेंडा की दिशा में आगे बढ़ा जाना चाहिए।
  • बहुपक्षीय व्यापार समझौतों को डब्ल्यूटीओ के अंतर्गत लाया जा सकता है और भविष्य में इन समझौतों में अन्य देशों के शामिल होने की गुंजाइश भी होनी चाहिए।

निष्कर्ष

  • महामारी, संरक्षणवाद और व्यापार युद्ध जैसे चुनौतियों के बीच वैश्विक व्यापार एक अनिश्चित समय का सामना कर रहा है। कोविड-19 के बाद की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को संरक्षित करने और व्यापार वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए डब्ल्यूटीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए विश्व की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक निकाय का कायाकल्प किया जाना आवश्यक है।

सामान्य अध्ययन पेपर-2
  • महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच-उनकी संरचना, अधिदेश।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोविड-19 के दौर में WTO की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। चर्चा करें।