शरणार्थी संकट से जूझता विश्व - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

सीमाई द्वन्द के कारण निर्मित शरणार्थी संकट विश्व हेतु बड़ा खतरा है। वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व मुख्य रूप से ,पोलैंड , रूस , यूरोपीय संघ इत्यादि को शरणार्थियों के कारण अपनी नीति पर ध्यान देना होगा।

परिचय

पूर्वी यूरोप में बेलारूस तथा पोलैंड की सीमा पर हजारों शरणार्थियों के प्रवेश से तनाव में वृद्धि हो गई है। बेलारूस तथा पोलैंड की सीमा यूरोपीय संघ की सीमा का निर्धारण करती है। पश्चिमी एशिया के युद्ध करते ग्रस्त क्षेत्रों विशेष रुप से कुरूद सीरिया शरणार्थी इत्यादि बेलारूस पोलैंड सीमा से यूरोपीय संघ में प्रवेश कर रहे हैं। पोलैंड द्वारा शरणार्थियों पर पानी तथा आंसू गैस तोपों का प्रयोग किया गया जिससे वे पीछे हट सके इस स्थिति में लगभग 15 शरणार्थियों की मृत्यु हो गई। इस प्रकार यह शरणार्थी संकट यूरोपीय संघ पोलैंड बेलारूस रूस यूक्रेन में मध्य तनाव का कारण बन रहा है।

कौन हैं शरणार्थी

  • यूएनएचआरसी (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) के अनुसार , शरणार्थी वो होता है जिसे उत्पीड़न , युद्ध या हिंसा के कारण अपने देश से पलायन हेतु विवश किया गया हो तथा वह किसी अन्य देश में विस्थापित होकर रहने लगा हो।
  • आधुनिक वैश्विक शरणार्थी संकट’ की उत्पत्ति सर्वप्रथम द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के दौरान हुई थी।

शरणार्थियों के साथ संबद्ध समस्याएं

राज्य विहीनता

आधुनिक राष्ट्र राज्य के सिद्धांत के अनुसार एक नागरिक के लिए किसी न किसी राष्ट्र की सदस्यता अनिवार्य है। राष्ट्र की नागरिकता के अभाव में वह उस देश में मिले गए अधिकारों को प्राप्त नहीं कर पाता इसके साथ ही साथ अन्य देशों में उसे घुसपैठिया शरणार्थी तथा अराजक तत्व के रूप में देखा जाता है। यही स्थिति शरणार्थियों को अत्यंत सुभेद्य बनाती है। वर्तमान समय में सीरिया संकट, रोहिंग्या शरणार्थी ,चकमा शरणार्थी इत्यादि मुख्य शरणार्थी समूह है।

शोषण

राज्य विहीन होने की स्थिति में इन शरणार्थियों पर आर्थिक संकट, भूख ,महामारी ,कुपोषण इत्यादि की समस्या बनी रहती है। अतः आर्थिक तथा भूख की विवशता के कारण यह शरणार्थी शोषण हेतु अत्यंत सुभेद्य हो जाते हैं तथा इनका मानव दुर्व्यपार बलात श्रम यौन शोषण इत्यादि होता है।कई बार शरणार्थियों को देश (जहाँ वे शरण लिए रहते हैं ) द्वारा हिंसक कार्यवाही का शिकार होना पड़ता है।

अधिकारों का अभाव

शरणार्थी जिस देश के निवासी होते हैं वो उस देश को छोड़ चुके होते हैं । तथा वो जिस देश में शरण हेतु जाते हैं वहां के निवासी नहीं होते ।इस स्थिति में दोनो ही देशों में उन्हे अधिकार प्राप्त नहीं होता ।यह एक मानव के रूप में उनके मानवाधिकारों का उलंघन है।

अपराध में वृद्धि

भूख ,महामारी इत्यादि समस्याओं से ग्रस्त अधिकांश शरणार्थियों की प्रवृत्ति आपराधिक हो जाती है । जिससे ये शरणार्थी क्षेत्र में अराजकता वृद्धि का कारण बनते हैं ।कई बार ये शरणार्थी संगठित अपराधिक गतिविधियों तथा आतंकवादी समूह में भी संलग्न होकर एक बड़ा संकट बन जाते हैं ।

स्थानीय निवासियों से तनाव

रोजगार तथा निवास की प्रतिस्पर्धा प्रतिस्पर्धा के कारण इन शरणार्थियों का स्थानीय निवासियों के साथ निरंतर तनाव बना रहता है। भारत में रोहिंग्या शरणार्थी तथा बांग्लादेश से आए चकमा शरणार्थी के कारण असम में हो रहा संघर्ष विश्व विदित है

वर्तमान विश्व में मुख्य शरणार्थी संकट

  • संघर्षों रही वृद्धि के कारण भारी मात्रा में पलायन हो रहा है जो शरणार्थी संकट का कारक बन रहा है । उदाहरण के लिए, 2010 में, दुनिया में प्रति दिन 11,000 लोगों को संघर्ष के कारण विस्थापित किया गया था। 2011 में 14,000, 2012 में 26,000 और 2014 में दुनिया में संघर्ष के कारण प्रतिदिन 42,500 लोग विस्थापित हुए ।
  • वर्ष 2019 के अंत तक लगभग 79.5 मिलियन लोग विभिन्न कारणों से विस्थापित हुए। 26 मिलियन क्रॉस-बॉर्डर शरणार्थी थे, 45.7 मिलियन लोग आंतरिक रूप से विस्थापित थे,
  • वर्तमान समय में अफगानिस्तान , सीरिया , म्यांमार , अजरबेजान ,वेनुजुएला जैसे देशो में हो रहे संघर्ष इस पलायन का मुख्य कारण बन रहे हैं।
  • अफगानिस्तान, सोमालिया, कांगो, सूडान और इरीट्रिया बीते एक दशक भर (2010-2019) में सीमा पार विस्थापन के लिये स्रोत देशों कीबने हुए हैं। जबकि इनके निकटवर्ती देश यथा भारत , यूरोपीय संघ इन शरणार्थियों की शरणस्थली बन रहे हैं।

शरणार्थी संकट से निदान हेतु प्रयास

‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय, 1951

  • 1948 के मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 14 पर आधारित यह अभिसमय संयुक्त राष्ट्र संघ की एक बहुपक्षीय संधि है, जो उत्पीड़न के से विवश होकर अन्य देशों में शरणागत हुए व्यक्तियों के अधिकार सुनिश्चित करने का भी प्रावधान करता है।
  • यह अभिसमय ‘शरणार्थी’ शब्द को परिभाषित करता है तथा यह निर्धारित करता है कि किस श्रेणी के आव्रजक शरणार्थी होंगे।उदाहरणार्थ, ‘युद्ध अपराधियों’ को शरणार्थी की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
  • यह अभिसमय शरणागत की रक्षा तथा उसके अधिकारों के संरक्षण में राष्ट्रों के उत्तरदायित्व को निर्धारित करता है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय, 1951’ में स्पष्ट रूप से जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी विशेष सामाजिक समूह से संबद्धता या राजनीतिक गतिरोध के कारण उत्पीड़ित शरणार्थियों को संरक्षण देता है
  • इस अभिसमय के साथ 1967 का एक शरणार्थी प्रोटोकाल है जो वैश्विक स्तर पर शरणार्थी संकट को प्रबंधित करता है।

भारत तथा शरणार्थी संकट

  • भारत भी शरणार्थी संकट से ग्रस्त है। भारत के सीमावर्ती देशो यथा अफगानिस्तान ,म्यांमार ,बांग्लादेश इत्यादि स्थानों से शरणार्थी भारत में आते हैं।
  • रोहिंग्या तथा चकमा शरणार्थियों के कारण असम सहित उत्तरपूर्वी क्षेत्रो में अत्यंत तनाव देखने को मिला है।
  • असम में लाया गया एनआरसी जैसे कानून ,जो भारी विवाद का कारक रहे , उनके मूल में शरणार्थी संकट ही है।
  • चुकी भारत अभी विकासशील है जहाँ गरीबी,कुपोषण , भुखमरी ,रोजगार जैसी कई समस्याएं हैं अतः यहाँ शरणार्थियों का आना एक अलग दबाव को जन्म देता है।
  • भारत ने ‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय, 1951’ को हस्ताक्षरित नहीं किया है परन्तु भारत शरणागति को महत्व देता है।
  • हाल ही में भारत द्वारा नागरिकता संसोधन अधिनियम द्वारा पाकिस्तान,अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के धार्मिक उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यको ,जो 31 दिसंबर 2014 तक शरणागति प्राप्त कर चुके हैं ,उन्हें नागरिकता प्रदान करने की बात की गई है।

निष्कर्ष

यह सत्य है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवश विस्थापन एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय आरंभ हुई या भयावह स्थिति आधुनिकता के इस दौर में भी समाप्त नहीं हो सकी है। शरणागत राष्ट्रों की समस्या यह है कि वह अभी भी पर्यावरण तथा विकास के मध्य सामंजस्य स्थापित कर अपने नागरिकों को सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय प्रदान करने में सक्षम नहीं हो पाए हैं इस स्थिति में वह शरणागत शरणार्थियों की रक्षण तथा उनके अधिकारों का संरक्षण किस प्रकार कर सकेंगे। सीरिया सोमालिया इरिट्रिया जैसे देशों में सत्ता संघर्ष अन्य देशों के लिए एक बड़ी समस्या बन रहा है। वर्तमान समय में यूरोप पोलैंड भारत जैसे देश शरणार्थी संकटों का सामना कर रहे हैं संपूर्ण विश्व को इस समस्या को मिलकर सुलझाना होगा जिससे वैश्वीकरण के तत्वार्थ को सही मायनों में प्राप्त किया जा सके।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • अंतरराष्ट्रीय संबंध