भारतीय ऊर्जा क्षेत्रक के विभिन्न आयाम - समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

भारतीय ऊर्जा एक्सचेंज (IEX) के विद्युत बाज़ार ने मार्च 2021 के महीने में 8,248.52 MU (मिलियन यूनिट्स) का उच्च स्तर हासिल किया है। यह भारत के ऊर्जा क्षेत्रक के लगातार बढ़ने का प्रमाण है।

परिचय

  • ऊर्जा बुनियादी ढांचे के सबसे महत्वपूर्ण घटक में से एक है, जो आर्थिक विकास और राष्ट्रों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय अर्थव्यवस्था की निरंतर वृद्धि के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे का अस्तित्व और विकास आवश्यक है।
  • भारत का बिजली क्षेत्र दुनिया में सबसे अधिक विविध है। बिजली उत्पादन के स्रोत पारंपरिक स्रोतों जैसे कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस, तेल, पनबिजली और परमाणु ऊर्जा से लेकर पवन, सौर और कृषि और घरेलू कचरे जैसे व्यवहार्य गैर-पारंपरिक स्रोतों तक हैं।
  • बढ़ती अर्थव्यवस्था , बढ़ते जीवन स्तर से देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है और आने वाले वर्षों में इसके बढ़ने की उम्मीद है।

भारत में ऊर्जा का बाजार

  • सतत आर्थिक विकास के लिए भारत को ऊर्जा की आवश्यकता है ।भारत सरकार का 'सभी के लिए शक्ति' प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने से देश में क्षमता वृद्धि में तेजी आई है। इसी समय, बाजार और आपूर्ति पक्ष (ईंधन, रसद, वित्त और जनशक्ति) दोनों में प्रतिस्पर्धी तीव्रता बढ़ रही है।
  • 2022 तक, सौर ऊर्जा 114 GW योगदान करने का अनुमान है, इसके बाद पवन ऊर्जा से 67 GW और बायोमास और जल विद्युत से 15 GW का योगदान होता है।
  • भारत में पावर स्टेशनों की कुल स्थापित क्षमता अक्टूबर 2020 तक 373.43 GW थी।
  • भारतीय ऊर्जा एक्सचेंज (IEX) के विद्युत बाज़ार भारत में विद्युत के भौतिक वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र और ऊर्जा बचत प्रमाण-पत्र के लिये एक राष्ट्रव्यापी, स्वचालित व्यापार मंच प्रदान करने वाला पहला और सबसे बड़ा ऊर्जा एक्सचेंज है। यह ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ (NSE) और ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) के साथ सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी है।इसे केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा विनियमित किया जाता है।
  • दिसंबर 2020 में, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने मेघालय में घरों, उद्योगों और व्यवसायों को आपूर्ति की जाने वाली बिजली की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और सुधारने के लिए $ 132.8 मिलियन के ऋण पर हस्ताक्षर किए।
  • मार्च 2020 में, केंद्र सरकार ने कामराजार पोर्ट लिमिटेड, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) में रणनीतिक बिक्री को समाप्त करने के लिए 13,500 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए।

भारतीय ऊर्जा क्षेत्रक की चुनौतियाँ

  • भारत की ऊर्जा आपूर्ति का अधिकांश भाग (लगभग 53.4%) कोयले पर निर्भर है जो प्रदूषण का कारक होता है। यद्यपि सरकार इस क्षेत्र में तेजी से प्रयासरत है।
  • भारत की राज्य विद्युत् वितरण कम्पनिया घाटे में हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में डिस्कॉम का कुल ऋण 3.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया था।
  • सरकार द्वारा किये गए कई प्रयासों के बावजूद भी वर्तमान में देश में मात्र 10% उपभोक्ताओं को ही निजी क्षेत्र द्वारा विद्युत आपूर्ति की जाती है, इसमें से अधिकांश शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित हैं।
  • कोरोना महामारी के कारण औद्योगिक गतिविधियों के बंद होने से विद्युत खपत में भारी गिरावट [मार्च (-8.7%), अप्रैल (-23.2%), मई (-14.9%) और जून (-10.9%)] देखने को मिली।

विद्युत् क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार के प्रयास

भारत सरकार ने निरंतर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए फोकस के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बिजली क्षेत्र की पहचान की है। भारतीय बिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कुछ पहलें निम्नानुसार हैं:

  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमान के अनुसार, 2029-30 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन की हिस्सेदारी 18% से बढ़कर 44% हो जाएगी, जबकि थर्मल के 78% से 52% तक कम होने की उम्मीद है।
  • सरकार ने ऊर्जा मॉडलिंग पर अनुसंधान और अध्ययन को आगे बढ़ाने के लिए NITI Aayog के तहत एक अंतर-मंत्रालय समिति गठित करने की योजना की घोषणा की।
  • वित्त वर्ष 2019-25 के लिए नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के तहत 111 लाख करोड़ का व्यय किया जाएगा । वित्त वर्ष 2019-25 के दौरान ऊर्जा क्षेत्र के लिए 24% पूंजीगत व्यय का अनुमान है।
  • केंद्रीय बजट 2020-21 में विद्युत मंत्रालय के लिए 15,875 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • मार्च 2019 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्या) का शुभारंभ किया गया।
  • राज्य के स्वामित्व वाली विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMS) के परिचालन और वित्तीय बदलाव को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (UDAY) शुरू की गई थी।

ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति

  • मई 2018 में,समग्र ऊर्जा उपयोग के मामले में भारत 25 देशों में से एशिया प्रशांत क्षेत्र में चौथे स्थान पर था।
  • भारत 2018 तक पवन ऊर्जा में चौथे, सौर ऊर्जा में पांचवें और नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में पांचवें स्थान पर था।
  • भारत ने 90 अरब अमेरिकी डॉलर में स्वच्छ ऊर्जा में महत्वपूर्ण निवेश करने के लिए देशों की सूची में छठा स्थान प्राप्त किया।
  • भारत G20 राष्ट्रों में एकमात्र देश है जो पेरिस समझौते के तहत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए की स्थिति में है ।

निष्कर्ष

भारत की बढ़ती युवा जनसँख्या तथा आर्थिक संवृद्धि को पाने के लिए ऊर्जा की निरंतर आवश्यकता है। भारत सरकार ने 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा (सौर ऊर्जा के 114 GW और 67 GW पवन ऊर्जा सहित) में 227 GW क्षमता प्राप्त करने के लिए अपना रोडमैप जारी किया है जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग करेगा। भारत की नीति इस समय पर्यावरण पर अधिक दबाव न बनाते हुए ऊर्जा लक्ष्यों को पाने की है तथा भारत इसमें सफल हो रहा है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था
  • बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत की नीति इस समय पर्यावरण पर अधिक दबाव न बनाते हुए ऊर्जा लक्ष्यों को पाने की है तथा भारत इसमें सफल हो रहा है। क्या आप कथन से सहमत हैं ? उत्तर के पक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत करें?