भारत में दिव्यांगजनो की समस्या तथा उसका समाधान - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ :-

हाल ही में Covid- 19 के बढ़ते मामलो के कारण सरकार द्वारा दिव्यांगजनो की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं।

परिचय

  • कोविड19 पूरी जनता को प्रभावित कर रहा है, लेकिन शारीरिक, संवेदी और ज्ञान-संबंधी सीमाओं के कारण दिव्यांगजनों कीइस बीमारी की चपेट में आने की संभावना ज्यादाहै। इसको देखते हुए, इस सकंट की स्थिति के दौरान उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उनकी दिव्यांगता विशिष्ट आवश्यकताओं, दैनिक जीवन की गतिविधियों को समझने और उपयुक्तंएवं समयोचित उपाय करने की आवश्यकता है।
  • कोरोना के 2019 में हुए प्रकोप के सन्दर्भ में नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ़ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पर्सन द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट में ऐसे ही तथ्य प्रस्तुत किये थे दिव्यांगों पर किये गए एक सर्वेक्षण से यह पता चला की लगभग 63 % दिव्यांग आवश्यक वस्तु व सरकारी वित्तीय सहायता को प्राप्त करने में कठिनाइयां हो रही हैं। तदोपरांत सरकार के दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग द्वारा आवश्यक उपाय किये गए थे।

दिव्यांगजनों के लिए सुविधा

  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 8 इन स्थितियों में दिव्यांगजनोंके लिए समान संरक्षण और सुरक्षा की गारंटी देती है। यह आपदा प्रबंधन गतिविधियों में दिव्यां गजनोंको शामिल करने और उन्हें इस के बारे में विधिवत जानकारी देने के उपाय करने के लिए जिला/ राज्य/ राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को जनादेश भी देता है।

भारत में दिव्यांगों की स्थिति :-

  • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लगभग 2.68 करोड़ दिव्यांग जनसँख्या है जो सम्पूर्ण जनसँख्या का 2.21 % है। इसमें 1.5 करोड़ पुरुष तथा 1. 18 करोड़ महिला जनसँख्या है। इस जनसँख्या का 69 % ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

दिव्यांगता के कारक :-

  • गरीबी , कुपोषण ,युद्ध तथा आपराधिक गतिविधियां दिव्यांगता का मुख्य कारण होती हैं। इसके साथ ही कुछ दिव्यांगता जन्म से ही होती है।

दिव्यांगों की समस्या :-

  • भावनात्मक हीनता :- दिव्यांगों की सबसे बृहद समस्या भावनात्मक हीनता है। अपनी कमियों के कारण ये इनमे हीनता की भावना जन्म ले लेती है ,जो इनके विकास को बाधित करती है।
  • आवश्यक सुविधा से दूरी :- दिव्यांग जनो की सर्वाधिक समस्या उनकी स्वास्थ्य , रोजगार सुविधा से दूरी है। जो उन्हें और अधिक सुभेद्य बनाती है।
  • सामाजिक बहिष्कार :- दिव्यांग जनो को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। जो उनके सामाजिक स्थिति में गिरावट को जन्म देता है यह स्थिति उन्हें मानसिक उत्पीड़न का शिकार बना कर अवसाद ग्रस्त कर देती है। इसी सामाजिक बहिस्कार को दूर करने हेतु 2016 से विकलांग के स्थान पर दिव्यांग शब्द का प्रयोग प्रारम्भ हुआ।
  • अधिकारों का उपयोग नहीं :- दिव्यांग जन वाक एवं अभिव्यक्ति, गरिमामय जीवन से दूर हो जाते हैं , जिससे वे अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते हैं।
  • अपर्याप्त डाटा :- इनके सम्बन्ध में अपर्याप्त डाटा इनकी सुशासन से पहुंच को दूर करती है।

दिव्यांगों के सम्बन्ध में विधिक उपाय :-

  • संबैधानिक उपाय :- भारतीय संविधान के नीतिनिर्देशक तत्व में अनुच्छेद 41 में दिव्यांगों की सहायता का प्रावधान है। इसके साथ अनुच्छेद 21 में गरिमामय जीवन का प्रावधान है
  • विधिक उपाय :- दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम में इनके हेतु पर्याप्त सुरक्षा का प्रावधान है।
  • दिव्यांग सुरक्षा संबिधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची में वर्णित हैं।

सरकारी पहल

सुगम्य भारत अभियान:

  • यह सार्वभौमिक पहुँच प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रमुख अभियान जो विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर के लिए पहुँच प्राप्त करने और स्वतंत्र रूप से जीने और एक समावेशी समाज में जीवन के सभी पहलुओं में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम करेगा।
  • यह अभियान पर्यावरण ,यातायात , सूचना एवं संचार पर लक्षित है।

दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना:

  • इस योजना के तहत गैर-सरकारी संगठनों को विकलांग व्यक्तियों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जैसे कि विशेष विद्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, समुदाय आधारित पुनर्वास,

छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (RGMF)

  • इस योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए विकलांग छात्रों के लिए अवसरों को बढ़ाना है।
  • योजना के तहत, प्रति वर्ष 200 फैलोशिप विकलांगता वाले छात्रों को दी जाती है।

आगे की राह :-

दिव्यांग जन अत्यंत वंचित वर्ग हैं। इनकी समस्याएं तथा स्थिति सामान्य जनो की अपेक्षा पृथक हल की मांग करती है। सरकार द्वारा पिछले वर्ष भी दिव्यांग जनो के लिए कोरोना से सम्बंधित दिशानिर्देश दिए गए थे। इस महामारी में दिव्यांग जनो की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • सामाजिक न्याय
  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन;
  • इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत में दिव्यांग जनो की स्थिति पर चर्चा करें ? सामान्य तथा विषम परिस्थितियों में सरकार इस वर्ग के सुधार के लिए क्या क्या कदम उठाती है?