“सिमलीपाल मुद्दे पर नैतिक मानको की स्थिति” - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

हाल ही में सिमलीपाल बायोस्फियर रिजर्व में लगी भयानक आग के उपरान्त मीडिया तथा आम जनता के मध्य इस विषय को ज्यादा महत्व न दिया जाना कहीं न कहीं नैतिक मानकों में पतन को प्रदर्शित कर रहा है।

परिचय :-

  • नीतिशास्त्र मानव के जीवन में सही या गलत के निर्णय में सहायता करता है, पर यह वह माध्यम नहीं है जहा प्रत्येक व्यक्ति समान समाधान पर पहुंचे। किसी नैतिक मुद्दे पर निर्णय पर आने के लिए परिस्थितियां भी उत्तरदायी होती हैं । कुछ समय पहले ऑस्ट्रलिया के बुशफायर अथवा अमेज़ॉन के जंगलो में लगे आग से हम सभी द्रवित थे भारत का मीडिया भी निरंतर वहां के जन्तुओ ,पशुओ तथा पंक्षियों की पीड़ा को बता रहे थे परन्तु हाल ही में ओडिशा के सिमलीपाल वनो में लगी आग पर मीडिया सहित प्रबुद्ध वर्ग का मौन वर्तमान समय के नैतिक मानकों के परीक्षण के आह्वान करता है।

नैतिक मानकों के स्रोत

कठिन नैतिक प्रश्नों पर हमें मार्गदर्शन करने के लिए दार्शनिक, धार्मिक शिक्षकों व अन्य चिंतकों ने नीतिशास्त्रीय निर्णयन के लिए कई दृष्टिकोणों को सामने रखा है। मुख्य रूप से नैतिक मुद्दों को हल करने के लिए मुख्यत: पांच अलग-अलग दृष्टिकोण हैं:

  • उपयोगितावाद दृष्टिकोण
  • अधिकार आधारित दृष्टिकोण
  • निष्पक्षता या न्याय का दृष्टिकोण
  • सार्वजानिक भलाई का दृष्टिकोण
  • सद्गुण दृष्टिकोण

उपयोगितावाद दृष्टिकोण

  • इसका विकास 19वीं शताब्दी में जेरेमी बेंथम तथा जॉन स्टुअर्ट मिल ने किया। इस सिद्धांत के अनुसार नीतिशास्त्रीय या नीतिपरक कार्रवाई वह है, जो बुराई के ऊपर अच्छाई का सर्वाधिक संतुलन स्थापित करे।
  • इस दृष्टिकोण के अनुसार किसी मुद्दों के विश्लेषण के लिए तीन आवश्यक कदम होते हैं
  • सर्वप्रथम कार्रवाई के उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की पहचान करनी होती है।
  • प्रत्येक कार्रवाई से कौन-कौन प्रभावित होगा तथा प्रत्येक कार्रवाई से क्या-क्या हानियां हो सकती है?
  • हम उस क्रियाकलाप को चुनेंगे जो 'सर्वाधिक अच्छाई दे व कम बुराई।
  • नीतिपरक कार्रवाई वह है जो सर्वाधिक लोगों के लिए सर्वाधिक अच्छाई उपलब्ध करवाये। यह सिद्धांत यह कहता है कि “किन्ही दो कार्रवाइयों में से सर्वाधिक नीतिपरक वह होगा जो हानि की तुलना में लाभ का सर्वाधिक संतुलन उत्पन्न करे।"

अधिकार आधारित दृष्टिकोण

  • यह दृष्टिकोण इम्मैनुअल कांट के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • इस दृष्टिकोण का संबंध ' व्यक्ति के अधिकारों से है।
  • इस दृष्टिकोण में बात पर बल दिया कि 'प्रत्येक व्यक्ति गरिमा व आदर के साथ व्यवहार का अधिकार रखता है।' मनुष्य को जो अन्य से अलग करता है, वह केवल यह है कि अपने जीवन के साथ वे क्या करेंगे, उसे स्वतंत्र रूप से चनने का उनके पास गारमा आधारित क्षमता है और उनके इस विकल्प का सम्मान किया जाये क्योंकि वह उनका मौलिक नैतिक अधिकार है। मनुष्य कोई वस्तु नहीं है जिसे तोड़ा-मोड़ा जाये।
  • वैधानिक अधिकार विधि में संहिताबद्ध है, वहीं नैतिक अधिकार समाज 'सामान्य रूप से स्वीकृत नैतिक मानकों द्वारा उचित ठहराये जाते हैं। नैतिक अरूप से हमेशा फल के रूप में सोचा जाना चाहिए, न कि साधन के रूप में इसका। मतलब यह है कि किसी दूसरों को साधन के रूप में इस्तेमाल करना, अपने लाभ का लिए व्यक्ति का इस्तेमाल करना है।
  • अधिकार, कर्तव्य आरोपित करता है। ये कर्तव्य या तो कुछ करने से रोकता। है या कुछ करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • अधिकार दष्टिकोण उन वैधानिक दावों पर भी लागू होता है, जिसे हम एक-दूसरे पर करते हैं यथा; जीवन व स्वतंत्रता।

निष्पक्षता या न्याय का दृष्टिकोण

  • यह दृष्टिकोण प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक अरस्तू की शिक्षाओं से उद्धृत है। अरस्तू का कहना था कि "समान के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और असमान के साथ असमान"
  • इस दृष्टिकोण के मूल में नैतिक प्रश्न है, 'कोई कार्रवाई या कदम कितना उचित है? क्या यह प्रत्येक को समान रूप से व्यवहार करता है या फिर वह पक्षपात या भेदभाव दर्शाता है?' पक्षपात, कुछ लोगों को बिना किसी उचित तर्क के फायदा पहुंचाना है। वहीं भेदभाव, उन लोगों पर बोझ डालना है जो उन लोगों से अलग नहीं है जिन पर बोझ नहीं डाला गया है। दोनों अनुचित व अलग है।

सार्वजानिक भलाई का दृष्टिकोण

  • यूनानी दार्शनिकों ने ही इस अवधारणा में भी योगदान दिया कि 'समुदाय में जीवन अपने आप में हितकर है और हमारा कार्य उस सामुदायिक जीवन में योगदान करने वाला होना चाहिये।
  • ' यह दृष्टिकोण सलाह देता है कि समाज का अंतरसंबंधित संबंध नीतिशास्त्रीय तर्क का आधार है और इस प्रकार सभी के प्रति, विशेषकर कमजोर वर्गा के प्रति आदर व दया इस तर्क की आवश्यकताएं हैं।
  • यह दृष्टिकोण आम परिस्थितियों के प्रति भी ध्यानाकर्षित करता है जो कि सभी के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। यह विधि की व्यवस्था, प्रभावी पुलिस व अग्निशामक विभाग, स्वास्थ्य देखभाल, सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था और यहां तक कि सार्वजनिक मनोरंजन क्षेत्र भी हो सकता है।

सद्गुण दृष्टिकोण :-

  • नीतिशास्त्र का काफी प्राचीन दृष्टिकोण यह है कि नीतिशास्त्रीय कार्यों को कुछ आदर्श सद्गुणों के सुसंगत होना चाहिये जो कि हमारी मानवीयता के पूर्ण विकास के लिए उपलब्ध कराता है। ये सद्गुण स्वभाव व आदते हैं जो हमारे चरित्र के उच्चतम क्षमता तथा सत्य व सुदंर जैसे मूल्यों की ओर से उसी अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • ईमानदारी, साहस, दया, उदारता, सौहार्द्र, प्यार, वफादारी, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, आत्म नियंत्रण तथा विवेक सद्गुण के उदाहरण हैं।

नीतिशास्त्रीय दृष्टिकोण तथा सिमलिपाल का मुद्दा :-

  • सिमलीपाल की त्रासदी में विभिन्न वर्गों में सौहार्द ,जनजीवो के प्रति प्यार , मीडिया की अपने कार्य के प्रति सत्यनिष्ठा का आभाव दिखा है जो इन वर्गों को सद्गुण दृष्टिकोण के अनुरूप नहीं मानता। सरकार द्वारा तात्कालिक सहयता तथा स्थिति नियंत्रण के लिए किये गए प्रयासों शासन में ईमानदारी का बोध होता है।
  • सिमलीपाल की त्रासदी से जैव विविधता की हानि हो रही है जो पर्यावरण , सतत विकास , मनुष्य के भविष्य ,वैश्विक तापन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी इस प्रकार यह सार्वजानिक भलाई का दृष्टिकोण भी नहीं है।
  • भारत के इसी प्रबुद्ध वर्ग द्वारा अमेजॉन तथा ऑस्ट्रलिया बुशफायर मामलो में अपनी संवेदनाएं व्यक्त की गई थीं। सोशल मीडिया , टेलीविज़न मीडिया सबने उस मामले को जनता तक पहुंचाया था। परन्तु सिमलीपाल मामले में इसका आभाव देखा गया जो न्याय तथा निष्पक्षता के सिद्धांत का उलंघन करता है।
  • अधिकार आधारित दृष्टिकोण के अनुसार हमें यह समझना चाहिए कि जब हम प्रकृति से संसाधन लेकर अपने अधिकार स्वरुप उसका प्रयोग कर रहे हैं तो प्रकृति , वन ,वन्य जीवो के प्रति हमारा कुछ कर्तव्य भी है। परन्तु इस मामले पार अधिकांश सिविल सोसाइटीज़ शांत रहीं जो नैतिकता के अधिकार आधारित दृष्टिकोण का उलंघन है।

निष्कर्ष

वास्तव में यह त्रासदी तथा इस त्रासदी पर मौन बढ़ती निष्क्रियता तथा गिरती नैतिकता का चित्रण कर रहा है। वास्तव में अब समय आ गया है कि हम अपने नैतिक मानकों का परीक्षण करें।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 4
  • नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि
  • नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • नैतिक मानकों के स्त्रोत के आधार पर सिमलीपाल त्रासदी का मूल्याङ्कन करें ? क्या आप सहमत हैं कि नैतिक मानकों के स्रोतों के प्रभाव अब सीमित होते जा रहे हैं?