भारत में आर्थिक बहाली एवं उसका आकार: समय की माँग - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


भारत में आर्थिक बहाली एवं उसका आकार: समय की माँग - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • हाल ही में विश्व बैंक (World Bank) ने कहा है कि कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जबर्दस्त झटका दिया है। इससे देश की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन 1991 के उदारीकरण के बाद सबसे खराब रहेगा। विश्व बैंक ने 'दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रिपोर्ट में कहा कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर 1.5 से 2.8 फीसदी के बीच रहेगी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे जैसे भारत अनलॉक की दिशा में बढ़ रहा है, अर्थव्यवस्था की गति में वृद्धि देखी जा रही है।

प्रमुख बिन्दु

  • कोविड-19 का झटका भारत को ऐसे समय में लगा है जब वित्तीय क्षेत्र पर दबाव की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में पहले से सुस्ती है। दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 4.8 से 5 फीसदी के बीच रहेगी।
  • कोविड-19 की वजह से घरेलू आपूर्ति और मांग प्रभावित होने के चलते 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 1.5 से 2.8 फीसदी रह जाएगी। वैश्विक स्तर पर जोिखम बढ़ने के चलते घरेलू निवेश में सुधार में भी देरी होगी।
  • रिपोर्ट कहती है कि अगले वित्त वर्ष यानी 2021-22 में कोविड-19 का प्रभाव समाप्त होने के बाद अर्थव्यवस्था पांच फीसदी की वृद्धि दर्ज कर सकेगी। हालांकि, इसके लिए अर्थव्यवस्था को वित्तीय और मौद्रिक नीति के समर्थन की जरूरत होगी।

अन्य एजेंसियां भी घटा चुकी हैं अनुमान

  • विश्व बैंक ने भी अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ सुर में सुर मिलाते हुए कोविड-19 के मद्देनजर वृद्धि दर का अनुमान घटाया है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर चार फीसदी किया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया है। फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर दो फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।
  • इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 5.5 से 3.6 फीसदी कर दिया है। मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज ने 2020 के कैलेंडर वर्ष में भारत की वृद्धि दर 2.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। पहले उसने इसके 5.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
  • विश्व बैंक की जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के आठ देशों की वृद्धि दर इस साल 1.8 से 2.8 फीसदी के बीच रहेगी। छह महीने पहले उसने इसके 6.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
  • हालांकि कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगामी वित्त वर्ष (2021-22) से अर्थव्यवस्था में सुधार होना प्रारंभ हो जाएगा। इसके लिए अर्थशास्त्री आर्थिक बहाली के आदर्श आकार पर बहस कर रहे हैं।

आर्थिक रिकवरी का आकार

  • जेड-आकार की रिकवरी (Z-shaped recovery): यह सबसे आशावादी परिदृश्य होता है, इसमें अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद तेजी से वृद्धि देखी जाती है। र्- प्रकार का चार्ट दर्शाता है कि, हालात के सामान्य होने से अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आता है (जैसे, लॉकडाउन हटाए जाने के बाद खरीददारी में वृद्धि इत्यादि)।
  • V-आकार की रिकवरी (V-shaped recovery): जेड-आकार की बहाली के बाद अगला सबसे अच्छा परिदृश्य V-आकार की बहाली है जिसमें अर्थव्यवस्था अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त करती है और सामान्य विकास की प्रवृत्ति-रेखा पटरी पर वापस आ जाती है। इस प्रकार की प्रवृत्ति में आय और रोजगार स्थायी रूप से नहीं खत्म होते हैं और आर्थिक विकास तेजी से ठीक हो जाता है।
  • U-आकार की रिकवरी (U-shaped recovery): U-आकार की बहाली में ऐसा परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था के गिरने, संघर्ष करने और कुछ अवधि के लिए कम विकास दर के बाद भी यह धीरे-धीरे सामान्य स्तर तक वृद्धि करती है। इस प्रवृत्ति में लोगों की नौकरियों के ऊपर असर पड़ता है और लोगों की बचत में कमी देखने को मिलता है।
  • W-आकार की रिकवरी (W-shaped recovery): W-आकार की रिकवरी वाली प्रवृत्ति जोिखम युक्त होती है। इसमें विकास दर में कमी तथा वृद्धि होती है, तथा उभरने के बाद यह फिर गिरती है और पुनः वृद्धि करती है, इस प्रकार, इसमें डब्ल्यू-आकार का चार्ट बनता है। जानकारों का मानना है कि अगर कोरोना महामारी की दूसरी लहर आती है तो इस प्रकार की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।
  • L-आकार की रिकवरी (L-shaped recovery): यह अर्थव्यवस्था की सबसे खराब स्थिति होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद विकास निम्न स्तर पर पहुँच जाता है और यह लंबे समय तक ठीक नहीं हो पता है। इसमें, अर्थव्यवस्था वर्षों के बाद भी वर्तमान जीडीपी के स्तर को हासिल करने में विफल रहती है। L-आकार से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता में स्थायी नुकसान होता है।

चुनौतियाँ

  • COVID-19 के कारण चीन से होने वाले आयात के प्रभावित होने से स्थानीय और बाहरी आपूर्ति शृंखला के संदर्भ में चिंताएँ बढ़ी हैं। सरकार द्वारा COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिये लॉकडाउन और सोशल डिसटेंसिंग (Social Distancing) जैसे प्रयासों से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ है।
  • लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी बढ़ी है, जिससे सार्वजनिक खर्च में भारी कटौती हुई है। लॉकडाउन के कारण कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन और तैयार उत्पादों के वितरण की शृंखला प्रभावित हुई है, जिसे पुनः शुरू करने में कुछ समय लग सकता है।
  • उदाहरण के लिये उत्पादन स्थगित होने के कारण मजदूरों का पलायन बढ़ा है, ऐसे में कंपनियों के लिये पुनः कुशल मजदूरों की नियुत्तिफ़ कर पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था की धीमी प्रगति के रूप में देखा जा सकता है।
  • खनन और उत्पादन जैसे अन्य प्राथमिक या द्वितीयक क्षेत्रें में गिरावट का प्रभाव सेवा क्षेत्र कंपनियों पर भी पड़ा है। जो सेक्टर इस बुरे दौर से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे वहीं पर नौकरियों को भी सबसे ज्यादा खतरा होगा।

आगे की राह

  • भारत को तात्कालिक नीतिगत उपायों की आवश्यकता है, जो न केवल महामारी को रोकने और जीवन को बचाने की दिशा में कार्य करें बल्कि समाज में सबसे कमजोर व्यत्तिफ़ को आर्थिक संकट से बचाने और आर्थिक विकास तथा वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक हों।
  • भारत को सबसे पहले कोरोना महामारी को और फैलने से रोकना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी को भोजन मिल सके। इसके अलावा भारत को विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर अस्थायी रोजगार कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके साथ ही भारत को लघु एवं मझोले उपक्रमों को दिवालिया होने से बचाना होगा।

सामान्य अध्ययन पेपर-3

  • भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोविड-19 का झटका भारत को ऐसे समय में लगा है जब वित्तीय क्षेत्र पर दबाव की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में पहले से ही सुस्ती है। चर्चा कीजिये।