प्राचीन भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

वर्तमान में भारत की तकनीकी में अपेक्षाकृत बेहतर विकास हो रहा है परन्तु प्राचीन भारत भी विज्ञान की दृष्टिकोण से उन्नत था।

परिचय

  • सिंधु घाटी सभ्यता में मिली कांस्य की नर्तकी की मूर्ती तथा उन्नत नगरीकरण से चन्द्रमा की सतह के अन्वेषण तक भारतीय विज्ञान ने एक लम्बा मार्ग तय किया है। आज सम्पूर्ण विश्व में भारत इसरो , डीआरडीओ , आईटी क्षेत्र के कारण सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्द है परन्तु प्राचीन भारत भी विज्ञान एवं तकनीकी की दृष्टिकोण से उन्नत था। प्राचीन भारत में गणित , भौतिकी , चिकित्सा शास्त्र के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है।

प्राचीन भारत की विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां

गणित के क्षेत्र

  • सिंधु घाटी सभ्यता एक व्यापार मूलक सभ्यता थी। अतः वहां नाप-तौल की प्रणालियाँ विकसित थीं। पुरातत्वविदों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता में 16 के अनुपात वाली मापतौल की प्रणाली विकसित थी।
  • यजुर्वेद में 10 ख़रब तक की संख्याओं का वर्णन है।
  • वर्तमान विश्व में सर्वाधिक प्रचलित संख्या की दाशमिक पद्धति (0 से 9 ) का आविष्कार भारत में हुआ।
  • जैन ग्रन्थ अनुयोगद्वार में सर्वप्रथम असंख्य (इन्फिनिटी) का वर्णन प्राप्त होता है।
  • वेदांग साहित्यो में ज्यामिति का वर्णन है।
  • वराहमिहिर कत 'सर्य सिद्धांत' (छठी शताब्दी) में त्रिकोणमिति का विवरण है
  • ब्रह्मगुप्त ने भी त्रिकोणमिति पर प्रर्याप्त जानकारी प्रदान की तथा उन्होंने एक ज्या (sine ) सारणी का निर्माण भी किया।
  • आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, श्रीधराचार्य आदि प्रसिद्ध गणितज्ञों ने बीजगणित में भी बड़ी दक्षता प्राप्त की थी। बीजगणित के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि ब्रह्मगुप्त द्वारा वर्ग समीकरण का हल प्रस्तुत करना था।

खगोल शास्त्र

  • भारतीय खगोल विज्ञान का उदभव वेदों से माना जाता है। वेदांग साहित्य में ज्योतिष का प्रयोग खगोल विज्ञानं के सिद्धांतो पर ही आधारित था।
  • प्रसिद्ध जर्मन खगोल वैज्ञानिक कोपरनिकस से भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने पृथ्वी की गोल आकति और इसके अपनी धुरी पर चक्कर लगाने के सिद्धांत को बता दिया था।
  • सर आइजैक न्यूटन के पूर्व ही ब्रह्मगुप्त ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत की पुष्टि कर दी थी।

ज्यामिति

  • ज्यामिति का ज्ञान हडप्पाकालीन संस्कृति के लोगों को भी था। ईंटो की उत्पत्ति , भवनों का निर्माण , सड़को का समकोण पर काटना इस बात का प्रमाण है कि उस काल के लोगों को ज्यामिति का ज्ञान था।
  • वैदिक काल में आर्य यज्ञ की वेदियों को बनाने के लिए ज्यामिति के ज्ञान का उपयोग करते थे। जिसका वर्णन वेदांग में भी है।
  • आर्यभट्ट ने वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात "पाई" का मान 3.1416 स्थापित किया है।

चिकित्सा

  • भारतीय चिकित्सा पद्धति के विषय में सर्वप्रथम लिखित ज्ञान 'अथर्ववेद' में मिलता है। अथर्ववेद के 'भैषज्य सूत्र' में विविध रोगों के उपचार की जानकारी दी गई है। सामान्य चिकित्सा और मानसिक चिकित्सा के विषयों पर इसमें विस्तृत विवरण मिलता है।
  • 'सुश्रुत संहिता', 'चरकसंहिता' प्राचीन भारत के चिकित्सा शास्त्र के प्रामाणिक और विश्वविख्यात ग्रंथ हैं। 'सुश्रुत संहिता' में 8 प्रकार की शल्य चिकित्सा का वर्णन है।
  • मनुष्यो की चिकित्सा के साथ ही पशु चिकित्सा का विज्ञानं भी भारत में प्राचीन समय से ही विकसित था। घोडों. हाथियों गाय-बैलों की चिकित्सा से संबंधित अनेक प्रय उपलब्ध हैं। 'शालिहोत्र' नामक पशु चिकित्सक के हय आयुर्वेद', 'अश्व लक्षण शास्त्र' तथा 'अश्व प्रशंसा' नाम के ग्रंथ उपलब्ध हैं। इनमें घोड़ों के रोगों और उनके उपचार के लिए औषधियों का विवरण है।

रसायन विज्ञान

  • भारत को प्राचीन काल से ही धातु विज्ञान में दक्षता प्राप्त है। धातु विज्ञान में भारत की दक्षता उच्च कोटि की थी। 326 ईस्वी पूर्व पोरस ने 30 पौंड वजन का भारतीय इस्पात सिकंदर को भेंट में दिया था। दिल्ली के महरौली इलाके में खडा लौह स्तंभ (चौथी शताब्दी) 1700 वर्षो से गर्मी और वर्षा प्रभाव के बावजूद भी जंगरहित बना हुआ है। यह भारत उत्कष्ट लौह कर्म का नमूना है।
  • इसके अतिरिक्त उडीसा के कोणार्क मंदिर तेरहवीं शताब्दी में निर्मित लगभग 90 टन भार का लौह का स्तंभ भी आज तक जंगरहित है।
  • ऋषि कणाद ने छठी शताब्दी ई.पू. ही इस बात को सिद्ध कर दिया था कि विश्व का हर पदार्थ परमाणओं से मिलकर बना। कणाद का परमाणु सिद्धांत विश्व में सबसे पहले आया हुआ परमाणु सिद्धांत है।

अभियंत्रण तथा वास्तुकला

  • सिंधु घाटी सभ्यता से ही भारत वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में अग्रणी था। सिंधु की नगरीय व्यवस्था वर्तमान नगरों के लिए एक प्रेरणा है।
  • महाजनपद काल तथा मौर्य काल के दौरान हुए भवन ,स्तम्भ , गुफा निर्माण , चैत्य निर्माण भारत की उन्नत वास्तुकला का उदाहरण है।
  • भारत में मूर्ती , मंदिरो की एक उन्नत श्रृंखला है। पहाड़ काट क्र बनाया गया कैलाशनाथ मंदिर अभियंत्रण का एक उन्नत नमूना है।

वैज्ञानिक :-

  • प्राचीन काल में आर्यभट्ट , वाराहमिहिर , ब्रह्मगुप्त, नागार्जुन , चरक ,सुश्रुत , बौधायन जैसे महान वैज्ञानिक रहे हैं।

निष्कर्ष

निस्संदेह प्राचीन भारत गणित , चिकित्सा , भौतिक विज्ञान , जैसे क्षेत्रो में वराहमिहिर , आर्यभट्ट ,नागार्जुन जैसे वैज्ञानिको की उपस्थिति में तकनीकी रूप से उन्नत था। सिंधु घाटी के समकालीन सभ्यताओं में सिंधु जैसी वैज्ञानिकता नहीं है। इसके साथ ही प्राचीन भारत में लगभग भारत तकनीकी तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर विश्वगुरु के रूप में सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्वकर्ता था।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1
  • भारतीय कला एवं संस्कृति
  • भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां उसे तात्कालिक विश्व का तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है। कथन पर चर्चा करें?