कोविड से प्रभावित अर्थव्यवस्था में मनरेगा की भूमिका - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक मामलो के विभाग द्वारा राज्यवार तैयार किये गए हीट मैप द्वारा यह निष्कर्षित हुआ है कि कोविड प्रभाव से अर्थव्यवस्था को संभालने वाली 5 गतिविधियों में मनरेगा भी महत्वपूर्ण रही है।

परिचय:-

  • कोविड-19 महामारी और लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियां ठप्प रहने के कारण सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर विशेषकर प्रवासियों, दिहाड़ी मजदूरों और ठेका मजदूरों के बीच स्वास्थ्य एवं आय की असुरक्षा उत्पन्न हो गई । लाखों लोगों की आजीविका पर इस अभूतपूर्व स्थिति का प्रभाव के निदान हेतु सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत' अभियान आरंभ करने का आहवान किया गया ।इस दौरान
  • प्रवासी श्रमिक तथा ग्रामीण मजदूरों हेतु मनरेगा एक वरदान सिद्ध हुई । राज्यवार हीट मैप के अनुसार अन्य मनरेगा के साथ देश की अर्थव्यवस्था को सँभालने वाली अन्य आर्थिक गतिविधियां
  • विद्युत् उपभोग
  • मनरेगा
  • ई-वे बिल
  • जीएसटी कलेक्शन
  • व्हीकल रजिस्ट्रेशन

ग्रामीण रोजगार और मनरेगा

  • कृषि के जोखिम और अनिश्चितताएं, खेती योग्य जमीन पर आबादी का बढ़ता दबाव, वैकल्पिक व्यवसायों की कमी, ग्रामीण और शहरी आय में अंतर तथा गांवों में बढ़ती आर्थिक परेशानी के कारण पहले बड़ी संख्या में लोग गांव छोड़कर शहर आए थे। लेकिन प्रवासी कामगार देश में कोविड-19 के के प्रसार के कारण पुनः गॉव की तरफ लौटने हेतु विवश हुए । जिससे गॉव के संसाधनों पर दबाव बढ़ा । इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि गांवों के लाखों कामगारों को व्यवसाय के अधिक विकल्पों के जरिए पर्याप्त आजीविका मिल सके ऐसे में मनरेगा की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई।

मनरेगा के विषय में :-

  • गुणवत्तापूर्ण तथा उत्पादक सामुदायिक संपत्तियां एवं उद्यम तैयार करने के साथ ही गांव में अतिरिक्त श्रमबल को बेहतर ढंग से उपयोग करने के फलस्वररूप मांग-आधारित पारिश्रमिक गारंटी कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू किया गया।
  • पारिश्रमिक केंद्रित एवं स्वयं लक्ष्य तय कर रोजगार सृजन करने वाली योजना मनरेगा का लक्ष्य गांवों में गरीब परिवारों की आजीविका एवं आर्थिक सुरक्षा बढ़ाना है।
  • आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत में मनरेगा की भूमिका सार्वजनिक कामकाज का कार्यक्रम होने कारण मनरेगा में ग्रामीण बेरोजगारों की उत्पादक क्षमता को कारगर तरीके से बढ़ाकर उनका सामाजिक-आर्थिक विकास करने का माद्दा है।
  • महामारी के दौरान रोज़गार सृजित करने की इसकी संभावना एवं अतिरिक्त श्रमबल को फलदायी तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता देखकर सरकार ने 2020-21 के लिए अपने मूल आवंटन 1,01,500 करोड़ रुपये में इजाफा किया और 'आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत इसके लिए 40,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित किए।

मनरेगा- कोविड के दौरान क्रियान्वयन की स्थिति

  • मनरेगा को 693 जिलों में लांच किया गया । मई 2020 में 14 करोड़ पंजीकृत ग्रामीण परिवारों में से 25 प्रतिशत इस योजना में सक्रिय सहभाग कर सके थे। वर्ष 2016-17 से 2019-20 भारत सरकार ने मनरेगा हेतु 2,29,445 करोड़ रुपये जारी किए हैं। 2019-20 में एक श्रमिक दिवस का रोजगार सृजित करने में औसतन 251 रुपये खर्च हुए। इस हिसाब से जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की सटीक रणनीति बनाई जाए तो मनरेगा के अंतर्गत पर्याप्त रोजगार सृजित हुआ है।
  • कोविड हॉटस्पॉट क्षेत्रों में मनरेगा की मांग लगभग दो गुनी रही जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन हुआ।
  • मनरेगा 2020-21 की उपलब्धियां वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत अब तक का सर्वाधिक 1,01,500 करोड रुपये का आवटन, 31,493 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है।
  • इस वित्तीय वर्ष में अब तक 6.69 करोड व्यक्तियों को कार्य प्रदान किया गया: मई 2020 में औसतन 2.51 करोड व्यक्तियों को प्रतिदिन कार्य दिया गया, जो पिछले साल मई में प्रदान किए गए कार्यों से 73 प्रतिशत अधिक है।
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान आजीविका को बढ़ावा देने के लिए जल-संरक्षण और सिंचाई, वृक्षारोपण, बागवानी से संबंधित कार्यों तथा व्यक्तिगत लाभकारी कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
  • इसके साथ ही कई अन्य योजनाएं यथा दीन दयाल ग्रामीण सड़क योजना जैसी योजनाओ में भी मनरेगा को सम्मिलित कर रोजगार सृजन कर आय संकट को हल किया जा रहा है।

मनरेगा से लाभ :-

  • देश के ग्रामीण श्रमबल में शिक्षा का निम्न स्तर और सीमित कौशल हमेशा से श्रम उत्पादकता पर असर डालते रहे है, जिससे आय में वृद्धि भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में सीमित कौशल तथा सीमित शिक्षा वाले कामगारों हेतु मनरेगा बेहतर विकल्प है।
  • इसके लिए गुणवत्तापूर्ण सामुदायिक संपत्तियां तैयार करने का परियोजनाओं के जरिए उनकी उत्पादकता का इस्तेमाल किया जाएगा। मनरेगा के तहत 261 तरह के कामकाज को इजाजत मिली है।
  • मनरेगा गरीब ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट का सामना ताकत देने में सक्षम है। यह भारत जैसी विशाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कामकाज के चक्रों के प्रभावों से निपटने के लिए स्थिति संभाल सकता है। कोविड महामारी के कारण देशभर में लॉकडाउन करना पड़ा और इसके कारण लंबे समय तक कारोबारी माहौल बिगड़ा रहने के संकेत मिल चुके हैं।
  • मनरेगा आय वितरण के जरिए ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में प्रभावी रूप से वृद्धि कर सकता है, जिससे ग्रामीण आबादी की क्रय क्षमता बढ़ेगी।
  • व्यक्तिगत आय में वृद्धि से खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं पर खर्च भी बढ़ेगा, जिससे महामारी के बाद के दौर में संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी।

मनरेगा में समस्याएं :-

  • पंचायत स्तर का भ्रष्टाचार मनरेगा हेतु सबसे महत्वपूर्ण समस्या है जिसमे ग्राम प्रधान के साथ अधिकार भी सम्मिलित रहते हैं।
  • आय सृजित करने की व्यक्ति की जीवटता हानि पहुँचता है तथा ग्रामीण क्षेत्र का व्यक्ति आगे नहीं बढ़ना चाहता।
  • इसके साथ ही यह राजकोष पर बोझ डालता है।

निष्कर्ष

  • निश्चित ही मनरेगा के क्रियान्वयन में कुछ खामिया हैं परन्तु कोरोना प्रभाव के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को सँभालने में मनरेगा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 & 3

  • गवर्नेंस तथा अर्थव्यवस्था

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सँभालने में मनरेगा की भूमिका का अवलोकन करें ? चर्चा करें ?