भारत में रोड परिवहन : एक अवलोकन - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


भारत में रोड परिवहन : एक अवलोकन - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


प्रसंग:-

  • हाल ही में सड़क परिवहन तथा हाइवे मंत्री नितिन गडकरी जी ने हरियाणा में लगभग 20000 करोड़ रूपए की लागत के 11 हाइवे के निर्माण हेतु शिलान्यास किया है।

परिचय:-

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आयाम है। यह क्षेत्र भारत के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी है अतः सरकार द्वारा विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा निर्माण हेतु उपाय किये गए हैं । इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बिजली, पुल, बांध, सड़क और शहरी बुनियादी ढांचा विकास शामिल हैं। विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (एलपीआई) 2018 में 167 देशों में से भारत को 44 वें स्थान पर रखा गया। भारत 2019 की एजिंग इमर्जिंग मार्केट लॉजिस्टिक्स इंडेक्स में दूसरे स्थान पर रहा।

वर्तमान स्थिति

  • भारत का सड़क क्षेत्र यात्रा तथा सामानो के आवागमन हेतु सर्वाधिक प्रयुक्त होता है । तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, वाहन की उपलब्धता और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी कारण , सड़कों पर गतिशीलता में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे सड़क परिवहन वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। भारत में पंजीकृत वाहनों की कुल संख्या 2001-02 में 58.9 मिलियन से बढ़कर 2012-13 में 182.4 मिलियन हो गई।
  • हालांकि, सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और गुणवत्ता में निरंतर सुधार की आवश्यकता है। शहरी क्षेत्रों में, व्यक्तिगत वाहनों के परिवहन के बढ़ते उपयोग से सड़क की भीड़, लंबी यात्रा के समय और वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। सार्वजनिक परिवहन बेड़े के विस्तार में वाहनों की कम आपूर्ति से बाधा उत्पन्न हुई है - वित्तीय वर्ष 2017 में बसों की कुल मांग लगभग 3.40 लाख थी, जबकि उपलब्धता / आपूर्ति केवल लगभग 1 लाख थी।

सड़क परिवहन में समस्याएं :-

मौजूदा राजमार्गों की क्षमता:

  • राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की मौजूदा लंबाई 1.22 लाख किमी है, जो देश के 56.03 लाख किमी सड़क के कुल सड़क नेटवर्क का 2.2 प्रतिशत है। 4-लेन और NH मानकों के ऊपर मौजूदा NH लंबाई 27,658 किमी (22.59 प्रतिशत) है, और सिंगल / इंटरमीडिएट लेन (SL / IL) की चौड़ाई 32,395 किमी (26.46 प्रतिशत) है; शेष 62,379 किमी (50.95 प्रतिशत) 2-लेन एनएच है। इसके अतिरिक्त , राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग जो 65 प्रतिशत से अधिक सड़क यातायात हेतु प्रयुक्त होते हैं वे अतिरिक्त भार की समस्या से ग्रस्त हैं । जिनमे मात्र राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के कुल सड़क यातायात का 40 प्रतिशत वहन करता है । मौजूदा बुनियादी ढाँचे का रखरखाव: राष्ट्रीय राजमार्ग के रखरखाव और मरम्मत के लिए निर्धारित वार्षिक परिव्यय आवश्यक निधि का मात्र 40 % है। इसमें भी ठेकेदार - नौकरशाही - राजनेता गठजोड़ से उत्पन्न भ्रष्टाचार स्थिति को और अधिक दुरूह बना देता है। दुर्घटनाएँ और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: देश में सड़क सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा है। कोरोना पेंडेमिक के फलस्वरूप हुए लाकडाउन के पूर्व समय में भारत में औसतन 400 मृत्यु प्रतिदिन रोड दुर्घटना के कारण होती थीं। 2013 में, भारत प्रत्येक 100,000 लोगों के लिए दुर्घटना की मृत्यु दर 18.9 थी सड़कों के लिए लागत में वृद्धि: भूमि प्राप्त करने में देरी परियोजना लागत को प्रभावित कर सकती है क्योंकि भूमि की औसत लागत रुपये से बढ़ गई है। 2012-13 के दौरान 0.80 करोड़ प्रति हेक्टेयर। 2017-18 के दौरान प्रति हेक्टेयर 3.20 करोड़।

सरकारी पहल

  • भारत सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में, मुख्य रूप से राजमार्गों, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी परिवहन में अत्यधिक निवेश करेगी।
  • अप्रैल 2020 में, सरकार ने अगले दो वर्षों में 15 लाख करोड़ रुपये (212.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर) सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा।
  • NHAI अगले पांच वर्षों में टोल और सड़क के किनारे की सुविधाओं से एक लाख करोड़ (US $ 14.31 बिलियन) का राजस्व प्राप्त करने में सक्षम होगा।
  • केंद्रीय बजट 2020-21 में, सरकार ने परिवहन ढांचे को विकसित करने के लिए 1,69,637 करोड़ रुपये (24.27 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आवंटन करके बुनियादी ढाँचे को पर्याप्त सहायता दी है ।
  • सरकार द्वारा रोड निर्माण हेतु 4 मुख्य पहल किये जा रहे हैं जो निम्न हैं
  • भारतमाला परियोजना
  • चारधाम महामार्ग परियोजना
  • पूर्वोत्तर रोड नेटवर्क कनेक्टिविटी
  • अक्सेलरेटेड रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम
  • इसके साथ ही सरकार को भूमिअधिग्रहण पर ध्यान देना चाहिए इसके लिए सरकार ने भूमिराशि पोर्टल बनाया है

आगे की राह :-

  • निस्संदेह सरकार इस क्षेत्र में प्रगति कर रही है। परन्तु इस क्षेत्र में कौशल विकास तथा अनुसन्धान की सर्वाधिक आवश्यकता है। इस क्षेत्र में पर्यपत विकास से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त होगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3

  • अर्थव्यवस्था

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत की रोड परिवहन में उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा करें ? इसके निदान हेतु सरकार के प्रयासों का भी वर्णन करें।