कश्मीर में ‘लक्षित हत्या’की बढ़ती घटनाएँ - समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में अन्य प्रदेशों के सामान्य नागरिकों की लक्षित हत्या (टार्गेट किलिंग- जिसमें विशेष धर्म या विशेष क्षेत्र के लोगों की हत्या कर दी जाती है) के मामलों में तीव्र वृद्धि देखने को मिली हैI

पृष्ठभूमि

प्राचीन काल से ही कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण भाग रहा है I सिंघुघाटी सभ्यता स्थल मांडा जम्मू कश्मीर में स्थित थाI कुषाण राजा कनिष्क के शासनकाल में कुंडलवन(जम्मू कश्मीर) में चतुर्थ बौद्ध समित का आयोजन हुआ I कल्हण द्वारा रचित ‘राजतरंगणी’ में कश्मीर के इतिहास की जानकारी मिलती हैI

सन 1330 तक कश्मीर पर हिन्दू शासको का राज्य रहा I उसके बाद शाह मीर ने कश्मीर को जीत कर अपना राजवंश स्थापित कियाI राजा रणजीतसिंह (सिख शासक) ने अपना साम्राज्य कश्मीर तक विस्तृत किया I प्रथम आंग्ल सिख युद्ध में विजित होकर ब्रिटिश साम्राज्य (इसाई धर्म के अनुयायी ) ने कश्मीर को रियासती राज्य (प्रिंसली स्टेट) का दर्जा देकर डोगरा राजवंश को सौंप दियाI

विभिन्न धर्मों के शासकों द्वारा शासित होने के कारण कश्मीर में मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ I कश्मीर घाटी मुस्लिम बाहुल्य, जम्मू हिन्दू-सिख बाहुल्य और लद्धाख बौद्ध बाहुल्य क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ I

जम्मू-कश्मीर का महत्व-

  1. भू-सामरिक दृष्टि से महत्व- जम्मू कश्मीर की सीमा पाकिस्तान और लद्दाख की सीमा चीन से लगती है जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैI स्वतंत्रता पश्चात भारत ने इन दो देशों से ही युद्ध किया है, जिसका कारण सीमा विवाद हैI इस क्षेत्र में दूर्गम पहाड़ियां, बर्फीली चोटियाँ, दर्रे, नदियाँ और घाटियाँ है जहाँ निगरानी कर पाना चुनौती भरा है I पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद चुनौतियों में वृद्धि करता है I
  2. आर्थिक महत्व – प्राकृतिक सुन्दरता जैसे बर्फ की घाटियाँ, श्रीनगर की रमणीक झीले, शिकारा, केसर और फूलों की क्यारियां,शीतोष्णघास के मैदान (मर्ग ) प्रमुख पर्यटन स्थल हैंI अमरनाथ, वैष्णो देवी और चिराग-ए-शरीफ जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैंI जाफरान (केसर), सेव जैसी आर्थिक महत्व की फसलों की कृषि होती है I सिन्धु नदी तंत्र की नदियाँ पं बिजली निर्माण, सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैI
  3. सांस्कृतिक महत्व - अमरनाथ, वैष्णो देवी और चिराग-ए-शरीफ जैसे धार्मिक स्थल भारत की सामासिक संस्कृति (कम्पोजिट कल्चर) को प्रदर्शित करते हैंI जिससे विश्वभर में भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है I

स्वतंत्रता पूर्व कश्मीर की स्थिति

प्रथम आंग्ल सिख युद्ध के बाद “अमृतसर की संधि’ के तहत अंग्रेजों ने राजा गुलाब सिंह से 75 लाख रूपये के बदले कश्मीर के शासक के रूप में मान्यता दीI 1947 (भारत की स्वतंत्रता) तक डोगरा राजवंश का शासन रहा किन्तु अंग्रेजों की नीति ने रियासतों को स्वतन्त्रता दे दी कि या तो भारत में विलय या पाकिस्तान में विलय या अपना स्वतंत्रता अस्तित्व बनाये रखें I कश्मीर के तत्कालीन राजा हरीसिंह कश्मीर को स्विट्जरलैंड की तरह एक देश बनाना चाहते थेI अत: उन्होंने भारत या पाकिस्तान में विलय के प्रति अनिच्छा प्रकट की

स्वतंत्रता के समय के मुद्दे

चूँकि कश्मीर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र था I द्विराष्ट्र सिद्धांत के अनुसार – पाकिस्तान इस पर अपना अधिपत्य करना चाहता था I कश्मीर आर्थिक सामाजिक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र थाI जहाँ विकास की तमाम संभावनाएं उपस्थित थी I राजा हरीसिंह ने भारत और पाकिस्तान दोनों से यथास्थिति बनाये रखने के लिए ‘स्टैंडिंग एग्रीमेंट’कर लिया I

भारतीय नेताओं की स्पष्ट मांग थी कि जनमत संग्रह द्वारा जनता को चयन की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि उन्हें भारत-पाकिस्तान में से किस देश का हिस्सा बनना है क्योंकि पाकिस्तान के रहते कश्मीर का स्वतंत्र अस्तित्व संभव नहीं था I

भारत में विलय एवं पाकिस्तान

पाकिस्तान ने समझौते का उल्लघंन करते हुए कश्मीर में अपनी सेना को नागरिक भेष में भेज दिया I जन्होने घाटी में भीषण लूटपाट रक्तपात किया I राजा हरीसिंह ने माउन्टबेटन से सहायता की गुहार लगाई I

भारत ने ‘विलय पत्र’ (इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेसन) पर हस्ताक्षर की शर्त रखी जिसमें शान्ति स्थापना के बाद कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी I भारत ने जिस प्रकार के विलय पत्र पर अन्य रियासतों के साथ समझौता किया थाI राजा हरीसिंह के साथ भी उसी विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गये I

समझौते के बाद भारत ने अपनी सेना कश्मीर में भेजी और पाकिस्तान भारत के बीच पहला युद्ध किया I भारतीय सेना ने कश्मीर के बड़े भूभाग को स्वतंत्र करवा लियाI किन्तु एक तिहाई भाग पर कबीलाई को अवैध कब्जा बना रहा I जिसे आज पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता हैI

कश्मीर में विदेशी हस्ताक्षेप

1979 के शीतयुद्ध के दौर में,कश्मीर में विदेशी हस्तक्षेप बढ़ गया I अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं ने प्रवेश कर वहां के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया I जिससे नाराज होकर अफगानिस्तान के छात्रों ने तालिबान नामक संगठन बनाया जिसे पाकिस्तानी सेना द्वारा प्रशिक्षित किया गयाI चूँकि तालिबानी लडाके सोवियत सेनाओं के विरुद्ध लड़ रहे थे इसलिए अमेरिका द्वारा तालिबान को आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गये I पाकिस्तान ने अमेरिकी सहायता को अफगानिस्तान की बजाय अपने कश्मीरी एजेंडे के विकास में लगा दिया I भारत के कश्मीर में बड़े स्तर पर आतंकवादी भेजें गये, जिन्होंने कश्मीर घाटी में दहशतगर्दी को बढ़ावा दियाI

कश्मीरी पंडितों का नरसंहार

1989 में कट्टरपंथी इस्लामिक तत्वों ने मजहबी उन्माद में कश्मीर घाटी में बड़े स्तर पर प्रायोजित हिंसा को अंजाम दिया I सैकड़ों कश्मीरों पंडितों की नृशंस हत्या कर दी गईI लाखो कश्मीरी पंडित अपनी जान बचाकर अपनी सम्पत्ति अपना घर छोडकर भारत के अन्य क्षेत्रों में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हो गयेI

अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण

1954 में कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के अंतर्गत विशेष संरक्षण प्रदान किया गया I इस अस्थाई प्रावधान को 5 अगस्त 2019 में भारतीय संसद द्वारा निसप्रभावी कर दिया गया I जिससे अनुच्छेद 35 (A) स्वत: अप्रभावी हो गया I

अनुच्छेद 35 (A)- इस अनुच्छेद में प्रावधान था-

  • जम्मू कश्मीर राज्य की विधायिका को राज्य के स्थाई निवासियों को परिभाषित करने और उन्हें स्थाई निवास प्रमाणपत्र जारी करने की शक्ति प्रदान करता थाI यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर में अन्य राज्यों के निवासियों को कार्य करने या सम्पत्ति के स्वामित्व की अनुमति नहीं देता थाI
  1. भारतीय संसद का कोई भी कानून जम्मू कश्मीर विधानसभा की अनुमति के बिना जम्मू कश्मीर राज्यक्षेत्र में लागू नहीं होते थेI
  2. सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार,अनुसूचित जातियों/जनजातियों संबंधी विशेष प्रावधान जम्मू कश्मीर में लागू नहीं थेI

जम्मू कश्मीर राज्य में शक्ति का केन्द्रीकरण कश्मीर घाटी में सर्वाधिक, जम्मू और लद्दाख में न्यूनतम थाI आर्थिक विकास और राज्य के संसाधनों का वितरण कश्मीर घाटी केन्द्रित थाI

वर्तमान स्थिति

5 अगस्त 2019 ( अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी) के बाद से जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया हैI दोनों जगह स्थानीय चुनाव सम्पन्न करवाए गये जिसमें व्यापक स्तर पर जनभागीदारी देखने को मिलीI गृहमंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के बाद से कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 33% तक की कमी देखने को मिली I बड़े स्तर पर सेना द्वारा आतंकियों के विरुद्ध कार्यवाही की गईI

विकासात्मक कार्यों के अंतर्गत आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के हर नागरिक को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध करवाई गई हैI कश्मीर के केसर को जीआई टैग प्रदान कर व्यापार को प्रोत्साहन देने का कार्य किया गया हैI

लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में पुर्नवापसी के बाद से पाकिस्तान का मनोबल बढ़ा हुआ हैI और वो कश्मीर में आतंकवादियों को भेजने, ड्रोन द्वारा हथियार भेजने की साजिश में जुट गया हैI
हाल के दिनों में बढ़ी आतंकवादियों द्वारा लक्षित हत्याएं (‘टार्गेट किलिंग’) की घटनाएँ सामाजिक सौहार्द के समक्ष चुनौती उत्पन्न कर रही हैंI हिन्दू,सिखों या अन्य राज्यों के नागरिकों की हत्या करने से कश्मीरी पंडितों की घरवापसी के समक्ष प्रश्न उत्पन्न कर दिया हैI

भारत को कश्मीर में सामाजिक सौहार्द को बचाने के लिए इन हमलों को तुरंत रोकना होगाI आतंकियों को मिल रही स्थानीय सहायता ‘स्लीपर सेल’ को खत्म करना होगा I

घाटी के लोगों का विश्वास जीतने के लिए स्थानीय लोकतंlत्रिक संस्थाओं के साथ ही राज्य विधानसभा के चुनाव करवाने, शान्ति स्थापित कर जम्मू कश्मीर को स्वायत्त राज्य बनाने की दिशा में प्रयास तीव्र करने होंगेI

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • आंतरिक सुरक्षा