रेयर अर्थ एलिमेंट्स : भारत के लिए एक दुर्लभ अवसर - समसामयिकी लेख

प्रासंगिकता/ पाठ्यक्रम से सम्बद्धता

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1- सम्पूर्ण विश्व में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण
  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3- भारतीय अर्थव्यवस्था, संसाधनों का वितरण ।

की वर्ड्स:-: आरईई, परमाणु ऊर्जा विभाग, परमाणु खनिज रियायत अधिनियम (2016), डीआरई, आईआरईएल

चर्चा में क्यों :-

कोविड महामारी के दौरान आपूर्ति श्रृंखला के महत्व को समझा गया। हाल ही में हुई चिपों की कमी के कारण उच्च तकनीक उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस समस्या के उपरान्त इन उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण की मांग में वृद्धि हुई है। इनके विविधीकरण के लिए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट अर्थात आरईई) अत्यंत आवश्यक हैं।

रेयर अर्थ एलिमेंट (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) के विषय में :-

  • दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों (आरईई) को दुर्लभ-पृथ्वी धातु या दुर्लभ-पृथ्वी ऑक्साइड, या लैंथेनाइड्स भी कहा जाता है।
  • दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई) सत्रह धात्विक तत्वों का एक समूह है। इनमें 15 लैंथेनाइड्स सम्मिलित हैं। जो सेरियम (Ce), डिस्प्रोसियम (De), एर्बियम (Er), यूरोपियम (Eu), गैडोलिनियम (Gd), होल्मियम (Ho), लैंथेनम (La), ल्यूटेटियम (Lu), नियोडिमियम (Nd), प्रेजोडिमियम (Pr), प्रोमेथियम (Pm), समैरियम (Sm), टेरबियम (Tb), थ्यूलियम (Tm), और येटरबियम (Yb) हैं। इन 15 लैंथेनाइड्स के अतिरिक्त स्कैंडियम और येट्रियम भी रेयर अर्थ एलिमेंट की श्रेणी में आते हैं।

भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्वों) का उत्पादन :-

भारत में व्यापक मात्रा रेयर अर्थ एलिमेंट्स पाए जाते हैं। लगभग 7 मिलियन टन से अधिक आरईई भंडार के साथ भारत में वैश्विक आरईई भंडार का 5 प्रतिशत से अधिक पाया जाता है। भारत रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन के मामले में विश्व में पांचवे स्थान पर है।

  • भारत ने 1950 के दशक में घरेलू आरईई उत्पादन क्षमता विकसित करने के प्रयास आरम्भ किये। भारत द्वारा रेयर अर्थ एलिमेंट्स के खनन और प्रसंस्करण के लिए उसने इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड (IREL) की स्थापना की है।
  • भारत के पास ऑस्ट्रेलिया की अपेक्षा दो गुने भंडार उपलब्ध हैं। ऐसे में वैश्विक तकनीकी उत्पादों के शीर्ष उत्पादनकर्ताओं के साथ भारत के सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके उपरान्त भी भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स से सम्बंधित उद्योग विकसित नहीं हो सके तथा वैश्विक आरईई बाजार में भारत की भागीदारी नगण्य रही।
  • 2018-19 के पूर्व भारत का रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उत्पादन लगभग औसतन 2000 टन पर स्थिर था, परन्तु वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 4,215 टन के स्तर तक पहुंच गया था।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का वैश्विक उत्पादन

  • 2018 में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का वैश्विक उत्पादन लगभग 132 मिलियन टन होने का अनुमान था। यह मुख्य रूप से चीन, ब्राजील, रूस और वियतनाम में पाए गए। हालाँकि आरईई का खनन और प्रसंस्करण जटिल तथा ऊर्जा गहन है। साथ ही इसके उत्पादन में रेडियोधर्मी वेस्ट का भी उत्पादन होता है। इसीलिए मात्र कुछ ही देश आरईई उद्योग को विकसित करने में सफल रहे हैं।
  • प्रारम्भ में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उद्योग अमेरिका में केंद्रित था। परन्तु अमेरिका में बढ़ रही पर्यावरणीय चिंताओं के साथ यह उद्योग 1990 के बाद चीन में हस्तांतरित हो गया। चीन ने आरईई आपूर्ति श्रृंखला (विशेष रूप से धातु शोधन खंड) पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों के साथ पर्यावरणीय नियमों को भी आसान कर दिया।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के अनुप्रयोग :-

वर्तमान में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का प्रयोग सभी उच्च तकनीकी उपकरणों में हो रहा है। इनका प्रयोग हाइब्रिड वाहन, सेल फोन, सिलिकॉन चिप्स, उच्च शक्ति चुंबक, अगली पीढ़ी की रिचार्जेबल बैटरी, जैव ईंधन उत्प्रेरक, एडवांस लो गाइडेड सिस्टम इत्यादि में होता है। कोरोना के दौरान इन सभी उपकरणों की आपूर्ति बाधित हुई है।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) धातु उद्योग (धातु शोधन और मिश्र धातु), ऑटोमोटिव और पेट्रो-रसायन उद्योग में उत्प्रेरक, कांच/सिरेमिक, फॉस्फोर (एलईडी, कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप, फ्लैट का रंग) पैनल डिस्प्ले, लेजर, रिचार्जेबल सॉलिड स्टेट बैटरी (Ni-MH), फाइबर ऑप्टिक्स इत्यादि के लिए आवश्यक कच्चे माल हैं।

भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के कम उत्पादन के कारण :-

  • रेयर अर्थ एलिमेंट्स में पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन न कर पाने के लिए निष्क्रिय सरकारी रवैये को उत्तरदायी माना जा सकता है।
  • रेयर अर्थ एलिमेंट्स के अन्वेष्ण तथा प्रसंस्करण में वित्तीय, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निदान के लिए प्रारंभिक चरण में स्पष्ट नीति, वित्तीयन तथा सरकारी समर्थन की आवश्यकता है।
  • हालांकि, रेयर अर्थ एलिमेंट्स के महत्व को पहचानने के बावजूद, सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए एक स्पष्ट नीति या रोड मैप तैयार करने में असफल रही है।
  • रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए अलग नीति का आभाव है। सरकार इसे परमाणु खनिजों के साथ जोड़कर देखती है। अतः रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर राज्य का एकाधिकार सुनिश्चित हो गया तथा निजी निवेशक इसके उत्पादन से दूर हो गए। इससे आरईई उद्योग की क्षमता का हास्र हुआ है।
  • विडंबना यह है कि आईआरईएल (जिसे आरईई के उत्पादन के लिए स्थापित किया गया था) ने समग्र रूप से आरईई उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया। आईआरईएल ने सिर्फ थोरियम और अन्य खनिजों जैसे इल्मेनाइट, जिरकोन, रूटाइल जैसे खनिजो पर ही ध्यान दिया जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ।

भारत में आरईई उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास होने चाहिए:-

  • भारत को अपने यथार्थवादी उद्देश्यों की पूर्ती के लिए शीघ्र ही आरईई क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करने की आवश्यकता है।
  • एकाधिकार का समापन :- भारत को परमाणु खनिज रियायत अधिनियम (2016) में संशोधन कर नियमों को आसान करना चाहिए। इस अधिनियम के द्वारा 0.75% से अधिक मोनाज़ाइट (आरईई का स्रोत) वाले समस्त समुद्र तट रेत खदानों को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के लिए आरक्षित कर दिया है।
  • डिपार्टमेंट ऑफ़ रेयर अर्थ एलिमेंट अपस्ट्रीम सेक्टर में सुविधाएं स्थापित करने के लिए कंपनियों को वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान कर रेयर अर्थ एलिमेंट्स रणनैतिक साझेदारियों को बढ़ावा दे सकता है। इससे भारतीय रेयर अर्थ एलिमेंट्स उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
  • निजी कंपनियों के आने के बाद डीआरई इस क्षेत्र का विनियमन करेगा जो अनुसंधान एवं विकास को भी बढ़ावा देगा। इसका एक मात्र लक्ष्य भारत के आरईई उत्पादन को बढ़ाने और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण भागीदार बनाने पर केंद्रित होगा। इस प्रयोजन के लिए आईआरईएल के पर्यवेक्षण को परमाणु ऊर्जा विभाग (डीईए) से डीआरई में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।
  • मूल्य श्रृंखला को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसे निवेश के लिए खोलने पर भी विचार करने की आवश्यकता है। चूंकि अकेले निजी निवेश अपस्ट्रीम प्रसंस्करण को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पायेगा अतः इसमें भारी मात्रा में पूंजी निवेश और सरकारी वित्तपोषण की आवश्यकता होगी। इसके लिए सार्वजनिक-निजी दृष्टिकोण का उपयोग किया जा सकता है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी से अधिक कुशल प्रथाएं विकसित होंगी जो निवेशकों तथा क्रेताओं को आकर्षित करेंगी।
  • सरकार को इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच विवादों को सुलझाने और अनुपालन की जांच करने के लिए एक स्वायत्त नियामक, भारतीय दुर्लभ पृथ्वी नियामक प्राधिकरण (आरआरएआई) की स्थापना करनी चाहिए।
  • भारत वैश्विक आपूर्ति संकटों के विरुद्ध, एक रणनीतिक रिजर्व का निर्माण करते हुए, इस सन्दर्भ में क्वाड जैसे समूहों का निर्माण कर सकता है। इसे लिए भारत को अन्य एजेंसियों तथा देशो से संपर्क करना होगा।

आगे की राह :-

अपस्ट्रीम आरईई उद्योग का विकास संभावित रूप से भारत के लिए एक वरदान हो सकता है। चीनी अनुभव से पता चलता है कि आरईई आपूर्ति की उपलब्धता उच्च तकनीक विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने की प्रभावी क्षमता है।

  • भारत रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग आत्म-निर्भर भारत अभियान को सफल बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता पाने के लिए भी कर सकता है।

स्रोत: The Hindu Businessline

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, 3
  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1- सम्पूर्ण विश्व में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण
  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3- भारतीय अर्थव्यवस्था, संसाधनों का वितरण ।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • वर्तमान में विश्व वैकल्पि आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण के लिए रेयर अर्थ एलिमेंट की तरफ देख रहा है। ऐसे में भारत को अपने रेयर अर्थ मटेरियल्स के भंडार का लाभ उठाना चाहिए। इस संदर्भ में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के महत्व पर चर्चा करें। भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? चर्चा करें।