महामारी पर अंकुश : विज्ञान के प्रचार व शासन के विकेन्द्रीकरण की जरूरत - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


महामारी पर अंकुश : विज्ञान के प्रचार व शासन के विकेन्द्रीकरण की जरूरत - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


संदर्भ

  • केन्द्र सरकार द्वारा मई के अंत तक राज्यों को महामारी के प्रबंधन में अधिक स्वतंत्रता दे दी गई, जो कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी सेवाओं को वितरित करने के लिए निश्चित रूप से बेहतर नीति थी। इससे राज्य सरकारें भी अधिक जवाबदेह हो जाती हैं।
  • मई के मध्य में किए गए ICMR सीरोलॉजिकल सैंपल स्टडी के अनुसार, गैर-महानगरीय भारत का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा संक्रमित है और इस प्रकार जैसे-जैसे संक्रमण फैलता जायेगा तब राज्यों को सुधारात्मक उपाय करने में बहुत मुश्किले होंगी।

भारत की स्थिति

  • देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की सीमाएँ सर्वविदित हैं। सेंटर फॉर डिसीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी (इंडिया) और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन के मुताबिक भारत के अस्पतालों में कुल 7,13,986 बेड हैं जिसमें से गहन देखभाल इकाई में 35699 बेड हैं जबकि वेंटिलेटर युक्त बेडों की संख्या 17,850 हैं।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2018 के अनुसार, भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च देश की जीडीपी के 1 प्रतिशत से भी कम है, जो उसके कुछ पड़ोसी देशों जैसे भूटान (2.5 प्रतिशत), श्रीलंका (1.6 प्रतिशत) और नेपाल (1.1 प्रतिशत) से तुलनात्मक रूप से कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जीडीपी के प्रतिशत खर्च के लिए अपने क्षेत्र के 10 देशों में नीचे से दूसरे स्थान पर है।
  • मालदीव अपने सकल घरेलू उत्पाद का 9.4 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करता है, इसके बाद थाईलैंड (2.9 प्रतिशत) करता है।

सुधार हेतु आधार रणनीति

  • सामुदायिक स्तर पर महामारी से निपटने के लिए अच्छी तरह से डिजाइन किए गए मेट्रिक्स, काफी मदद कर सकते हैं। यह लोगों और प्रशासन का मार्गदर्शन कर सकते हैं और प्रत्येक राज्यों की कार्यों की परस्पर तुलना करने और एक दूसरे से सीखने में मदद कर सकते हैं।
  • किसी भी क्षेत्र के वर्गीकरण में प्रमुख सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय निर्धारक शामिल होने चाहिए, उदाहरण के लिए, क्षेत्र का घनत्व, एक कमरे में रहने वाले लोगों की संख्या या सामुदायिक शौचालय का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या।
  • ICMR द्वारा डिजाइन किया गया स्पेसिमेन रेफरल फॉर्म SRF का उपयोग भी उचित रणनीति बनाने में कर सकते हैं, (जो PCR कोरोना टेस्ट करने के लिए भरा जाता है)। इसमें रोगी की पृष्ठभूमि दर्ज की जाती है। इसमें रोगी के उम्र, स्थान और लक्षण का रिकॉर्ड होता है जो हमें रोग की गतिशीलता और गंभीरता और हमारी प्रक्रियाओं की प्रभावकारिता में पर्याप्त अंतर्दृष्टि प्रदान करने में मदद करते हैं, हालाँकि इस डेटा का तत्काल उपलब्ध कराया जाना एक बड़ी चुनौती है।
  • इसके अलावा हम उन प्रवासियों की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जो सुरक्षित रूप से घर पर पहुंच गए हैं या जो नहीं पहुंचे हैं।
  • हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हमारे गाँव और कस्बे महामारी से लड़ने के लिए तैयार हैं अथवा नहीं। इसे परखने का आधार स्वास्थ्य केंद्र की न्यूनतम तैयारी है जिसके अंतर्गत प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में 1,000 बिस्तर, डॉक्टर और एम्बुलेंस की उपलब्धता है।
  • इसके अलावा महामारी के अल्पीकरण और अनुकूलन के लिए सामाजिक समझ और स्थानीय समाधानों की जरूरत होती है। इसमें क्षेत्रीय संस्थानों द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन और नागरिक समाज के साथ भागीदारी की आवश्यकता है।

उपाय

  • वर्तमान में लॉकडाउन के बाद रोकथाम जोन (कन्टेनमेंट जोन) नामक उपकरण महामारी का प्रबंधन करने के लिए एकमात्र तरीका बचा है। इसमें मोस्ट सेंसिटिव सीमा का सीमांकन, परीक्षण, उपचार, अनुरेखण (ट्रेसिंग) और संगरोध शामिल है ,लेकिन यह सबसे प्रभावी तब होंगे, जब राज्य के साथ भी केंद्र का समन्वय होगा।
  • जिला स्तर पर कोरोना संबंधित डेटा का अधिकांश हिस्सा पहले ही राज्यों द्वारा केंद्रीय डेटा पोर्टल COVID19.nhp.gov.in प्रस्तुत किया जा रहा है।
  • ग्रामीण स्तर पर कुछ अन्य आँकड़ें काफी महत्वपूर्ण होंगे, जिनमें गांव में विद्यमान क्वारंटीन सेंटरों की संख्या, पी-डी-एस- के कामकाज के आँकड़ें एवं पेयजल की उपलब्धता शामिल है।
  • मास्क, सामाजिक दूरी और खुलेपन के महत्व की सराहना करनी होगी साथ ही इसका अनुसरण भी करना होगा। उपयुक्त स्थानों में कैमरे स्थापित करके इसकी निगरानी किया जा सकता है।
  • दूसरी तरफ सामाजिक दूरी के उपाय हेतु संकेतक भी उत्तरदायी होते हैं, इनमें बस की सीटों का प्रबंधन, टिकट वितरण की व्यवस्था, बाजार में पैटर्न के आधार पर व्यापार एवं कलर कोडिंग की लोकप्रियता सामाजिक गतिशीलता में प्रभावी हो सकती है।

निष्कर्ष

  • महामारी के अल्पीकरण और अनुकूलन के लिए सामाजिक समझ और स्थानीय समाधानों की आवश्यकता होती है। इसके लिए सिविल सोसाइटी के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्थानों में वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। जो न केवल जीवन की रक्षा स्वयं करने के लिए प्रेरित करेगा बल्कि यह भय को कम करेगा और सामान्य जीवन को फिर से शुरू करने में मदद करेगा।
  • अंततः हमें वायरस के साथ रहना सीखना चाहिए, साथ ही हमें अपनी खुशियों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए, ताकि एक नए समाज का निर्माण पुनः खुशहाली से कर सके।

सामान्य अध्ययन पेपर-2

  • स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/ सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
  • शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं, नागरिक घोषणा-पत्र, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोविड-19 के बढ़ते खतरों के बावजूद भी केन्द्र सरकार ने राज्यों को महामारी के प्रबंधन में अधिक स्वतंत्रता दी है। यह स्वतंत्रता राज्यों को इस महामारी से लड़ने में कितना कारगर होगा। चर्चा करें।