पीएम-किसान योजना: एक समग्र मूल्यांकन - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केंद्रीय सरकार के द्वारा ‘पीएम-किसान योजना’ के तहत 8.5 करोड़ किसानों को 17,000 करोड़ रुपये की धनराशि की छठी किस्त जारी की गयी।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) पहली सार्वभौमिक बुनियादी आय की योजना है जिसमें भूमिधर किसानों को लक्षित किया गया है।
  • इस योजना को देश भर के सभी भूमिहीन किसानों के परिवारों को आय सहायता प्रदान करके किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, ताकि वे कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों के लिए भी खर्च कर सकें।

क्या पीएम-किसान योजना?

  • इस योजना को “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना” के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना को 1 दिसंबर 2018 को लागू किया गया था।
  • पीएम किसान भारत सरकार से 100% वित्त पोषण के साथ एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है।
  • प्रारम्भ में इस योजना के तहत, 2 हेक्टेयर तक के भू-स्वामित्व वाले छोटे और सीमांत किसान परिवारों को 6000/- प्रति वर्ष की आय सहायता प्रदान की जानी थी, लेकिन अब इसे सभी किसानों के लिए लागू कर दिया गया है।
  • इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि को सीधे किसानो के बैंक अकाउंट में भेजा जायेगा।
  • किसानों को मिलने मिलने वाली यह सहायता राशि 2-2 हजार रूपये की तीन किस्तों में दी जाएगी।
  • इस योजना के लाभार्थी परिवार की परिभाषा में पति-पत्नी और उनके नाबालिग बच्चे ही शामिल किए गए हैं।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए बजट में कुल 75,000 करोड़ रूपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिसका लाभ देश के क़रीब 12 करोड़ किसानों को मिलेगा।
  • इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित भू-स्वामियों को शामिल नहीं किया गया है:
  • संस्थागत भू-स्वामित्व
  • ऐसे भू-स्वामी जो वर्तमान अथवा पूर्व में संवैधानिक पदों पर रहे हों
  • जिला पंचायत अध्यक्ष और उससे उपर के सभी जनप्रतिनिधि
  • वर्तमान और पूर्व लोक सेवक
  • लॉकडाउन के दौरान किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने में पीएम-किसान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में शामिल किया गया था। 28 मार्च को यह घोषणा की गई कि किसानों को जून में मिलने वाली 2,000 रुपये क़िस्त अप्रैल में ही उनके खाते में भेजी जाएगी।

पीएम-किसान योजना को लागू करने में प्रमुख चुनौतियाँ

  • उचित भू-अभिलेखों की अनुपस्थिति में पीएम-किसान योजना के सही लाभार्थियों की पहचान कर पाना एक बड़ी समस्या बनी हुयी है।
  • पीएम-किसान योजना अपने उद्देश्यों के अनुरूप सभी किसान परिवारों तक नहीं पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के अधिकांश किसानों के पास जमीन है जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए लेकिन इस योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है।
  • किसानों पर किये गए एक सर्वे के अनुसार सवें में शामिल किसानों में से केवल 21 फीसदी किसानों को ही इस योजना का लाभ मिल रहा है। हरियाणा और राजस्थान की तुलना में उत्तर प्रदेश में यह अधिक देखने को मिल रहा है।
  • इस योजना की एक बड़ी समस्या इसके क्रियान्वयन में है। चूंकि सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खातों में पहुंचाई जाती है लेकिन इसकी क़िस्त समय पर नहीं मिलती है, इसके दो प्रमुख कारण है-
  • किसान के भू-अभिलेखों और उसके बैंक खाते का सही समय पर मिलान न होना
  • किसानों की पहचान के लिए बैंक खातों से उनके आधार के जुड़ाव की समस्या
  • पीएम-किसान योजना की पहुंच और उसके लक्ष्य प्राप्ति में अनिश्चितता को देखते हुए, इस महामारी की अवधि के दौरान योजना की प्रासंगिकता का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

पीएम-किसान की सीमाएं

  • इस आय सहायता योजना में भूमिहीन किसानों, बटाईदार किसानों और कृषि मजदूरों को शामिल नहीं किया गया है जिससे किसानो का एक बड़ा वर्ग इस प्रत्यक्ष नकद सहायता से बाहर है।
  • यह योजना किसानों की समस्याओं के लिए कोई दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत नहीं है। यह सिर्फ कुछ समय के लिए और कुछ लोगों के लिए जीवन को थोड़ा आसान बना सकती है।
  • यह योजना गरीब समर्थक नहीं भी है। पीएम-किसान योजना के लाभार्थी पहले से भू-स्वामित्व धारण करते है और उन्हें प्रत्यक्ष आय सहायता भी मिल रही है जबकि भूमिहीन किसान, बटाईदार किसानों और कृषि मजदूरों को कोई आय सहायता नहीं मिल रही है।

किसानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण आय सहायता योजनाएँ:

  • रायथु बंधु योजना (तेलंगाना)
  • यह भारत में पहली प्रत्यक्ष किसान निवेश सहायता योजना है, जिसमें सीधे नकद भुगतान किया जाता है।
  • इस योजना की शुरुआत 10 मई 2018 को की गई थी। इस योजना के अंतर्गत सभी किसान को शामिल किया गया है जिनके पास भू-स्वामित्व है। हालांकि इस योजना में भूमिहीन या बटाईदार किसानों को शामिल नहीं किया गया है।
  • यह मदद ख़रीफ़ और रबी फ़सल के अनुसार दो चरणों में दी जाती है। किसानों को चेक के ज़रिए प्रति एकड़ 4 हज़ार रुपए दिए जाते हैं और इसकी अधिकतम राशि 8 हज़ार रुपए प्रतिवर्ष तक हो सकती है।

आजीविका और आय संवर्धन के लिए कृषक सहायता (KALIA):

  • ओडिशा सरकार ने आजीविका और आय संवर्धन के लिए कृषक सहायता (Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation-KALIA) योजना की शुरुआत की है।
  • इस योजना के तहत किसानों को दो चरणों में 10 हज़ार रुपए तक की आय सहायता दी जाती है।
  • इस योजना में छोटे और बटाईदार किसान भी शामिल किए गए हैं।

निष्कर्ष:

  • पीएम-किसान जैसे कल्याणकारी उपायों के प्रभाव को वित्तीय सहायता के माध्यम प्राप्त किया जा सकता है जो किसानों को उनकी दैनिक बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्रय शक्ति प्रदान करती है। इसलिए किसी भी नगद हस्तांतरण योजना की प्रभाविकता को सुनिश्चित करने के लिए यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि उस योजना के तहत हस्तांतरित की जा रही नगदी प्रभावित समुदाय को गरीबी से बाहर लाने में मदद करने के लिए पर्याप्त है या नहीं।
  • PM-KISAN जैसी प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजना निश्चित रूप से एक परिवर्तनकारी योजना है। यदि इसकी किस्तों का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाता है तो इसका किसानों की स्थिति में महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। सही समय पर धन हस्तांतरण सुनिश्चित करने एवं रिसाव को रोकने हेतु भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण करते हुए आधार कार्ड के साथ बैंकों के खातों की सीडिंग को पूर्ण करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • इसके साथ ही इस आय सहायता योजना में भूमिहीन किसानों, बटाईदार किसानों और कृषि मजदूरों को शामिल किया जाये जिससे किसानो का एक बड़ा वर्ग इस प्रत्यक्ष नकद सहायता की परिधि में सामिल कर कृषि से जुड़ें इन लोगों के भी कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
अभ्यास प्रश्न
  • कोविड-19 के दौर मे भारत के बड़े – बड़े महानगर किस प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं ? भारत सरकार को इन चुनौतियों से निपटने हेतु किस प्रकार के प्रयास करने चाहिए ।