यूएई और इजराइल के बीच शांति समझौता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा का कारण

  • हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल के बीच एक शांति समझौता हुआ है, जिसे ‘द अब्राहम एकॉर्ड्स’ (The Abraham Accords) या 'वाशिंगटन-ब्रोकेड समझौता' (Washington-brokered Deal) नाम दिया गया है।

यूएई और इजराइल के बीच शांति समझौता के बारे में

  • ‘द अब्राहम एकॉर्ड्स ‘(The Abraham Accords) या 'वाशिंगटन-ब्रोकेड समझौता' (Washington-brokered Deal) के तहत दोनों देश (संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल) आपस में राजनयिक संबंधों को सामान्य करेंगे और संबंधों को व्यापक बनाएंगे।
  • इस समझौते में दोनों देशों ने पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिये सहमति व्यक्त की है।
  • इस समझौते में इज़राइल ने वेस्ट बैंक (West Bank) के अधिकार वाले क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने पर रोक लगाने के लिए सहमति व्यक्त की है अर्थात इज़राइल, वेस्ट बैंक के बड़े हिस्से पर कब्जा करने की अपनी योजना को निलंबित कर देगा। इसके अतिरिक्त, इसमें क्षेत्रीय शक्ति ईरान का दृढ़ विरोध किया गया है।
  • अभी तक अरब क्षेत्र के दो देशों (मिस्र और जॉर्डन ) को छोड़कर कोई भी इज़राइल को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं देता था लेकिन अब यूएई ने भी इज़राइल को मान्यता दे दी है।संयुक्त अरब अमीरात खाड़ी क्षेत्र का प्रथम तथा तीसरा अरब देश है जिसके इज़राइल के साथ सक्रिय राजनयिक संबंध स्थापित हुए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले मिस्र ने वर्ष 1979 तथा जॉर्डन ने वर्ष 1994 में इज़राइल के साथ इसी प्रकार के ‘शांति समझौते’ किये थे।
  • अमेरिका के अलावा, मिस्र ने भी यूएई और इज़राइल के बीच हुए शांति समझौते की प्रशंसा की है तथा इसे एतिहासिक व महान हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

क्या थी दोनों देशों के मध्य विवाद की वजह?

  • वेस्ट बैंक क्षेत्र पर इज़राइल और फिलिस्तीन, दोनों ही अपना- अपना दावा करते हैं। यह क्षेत्र इज़राइल और जॉर्डन के बीच स्थित है। गौरतलब है कि सन 1967 में इज़राइल ने अरब-इज़राइली युद्ध के दौरान वेस्ट बैंक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और बाद के वर्षों में वहाँ बस्तियाँ स्थापित की हैं।
  • यही कारण है कि संयुक्त अरब अमीरात, फिलिस्तीनियों की भूमि पर इज़राइल के नियंत्रण को मान्यता नहीं देता है। उसका मानना है कि वेस्ट बैंक क्षेत्र की भूमि फिलिस्तीनियों की है और इज़राइल का यहाँ अवैधानिक कब्जा है।

यूएई और इज़राइल में निकटता के कारण

  • पिछले कुछ समय से ईरान की खाड़ी क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां बढ़ी है, जिसे इज़राइल के साथ–साथ खाड़ी के अन्य देश (यथा – यूएई, सऊदी अरब आदि) इस क्षेत्र की शांति के लिए खतरा मानते हैं। इस प्रकार ईरान के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल की साझा दुश्मनी ने शांति समझौता के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
  • लेबनान में सक्रिय आतंकवादी समूह हिज़्बुल्लाह (जिसे ईरान का सहयोग प्राप्त है) के कारण संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल के बीच निकटता बढ़ी है। इसके अतिरिक्त, फिलिस्तीन में सक्रिय आतंकवादी समूह ‘हमास’ और ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के कारण भी ये दोनों देश एक –दूसरे के काफी नजदीक आए हैं।

यूएई और इजराइल शांति समझौते के विभिन्न देशों हेतु निहितार्थ

द अब्राहम एकॉर्ड्स और फिलिस्तीन

  • फिलिस्तीन के कुछ राजनीतिक संगठनों ने द अब्राहम एकॉर्ड्स की आलोचना की है, जैसे फिलिस्तीन के प्रमुख राजनीतिक संगठन ‘हमास’ ने कहा है कि यह सौदा फिलिस्तीनीयों के हित में नहीं है। हालांकि कुछ लोग इसे लाभकारी रूप में भी देख रहे हैं, क्योंकि इज़राइल अब वेस्ट बैंक क्षेत्र में विस्तार नही करेगा।
  • इस प्रकार यूएई और इज़राइल के बीच एक शांति समझौते को फिलिस्तीन के लिये एक जीत और हार दोनों के रूप में चिह्नित किया या देखा जा रहा है।
  • फिलिस्तीनी स्वतंत्रता संघर्ष, अरब राष्ट्रों के विश्वास तथा सहयोग पर आधारित है। अतः जिस प्रकार के इज़राइल और अरब देशों के संबंध होंगे, उसी अनुसार फिलिस्तीनी स्वतंत्रता संघर्ष भी प्रभवित होगा। द अब्राहम एकॉर्ड्स और अमेरिका
  • यूएई और इज़राइल दोनों ही मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। इसीलिए अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल के बीच एक शांति समझौता ‘द अब्राहम एकॉर्ड्स’ में प्रमुख भूमिका निभाई है।
  • अमेरिका और ईरान बीच पिछले कुछ समय से काफी तनाव व्याप्त है। अमेरिका के एक हमले में ईरान के सुप्रीम कमांडर की म्रत्यु हो गयी थी। इसके अतिरिक्त अमेरिका, ने ईरान के साथ परमाणु समझौते से भी बाहर निकाल आया है और ईरान पर कई प्रकार के प्रतिबंध भी लगाए हैं।
  • हाल ही में ईरान ने अपने यहाँ निवेश को लेकर चीन के साथ एक डील पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इससे अमेरिका की चिंताएँ और भी बढ़ गयी हैं।
  • इन सब परिस्थितियों के चलते अमेरिका की कोशिश है कि अपने सहयोगियों के साथ ईरान के प्रभाव को पश्चिम एशिया में कम किए जाएँ और हितों को साधा जाए ।
  • अमेरिका और उसके सहयोगी, इस समझौते को ऐतिहासिक बता रहे हैं । कहा ये भी जा रहा है कि इससे भविष्‍य में एक नई राह निकलेगी, जो इस समूचे इलाके के साथ-साथ अरब जगत के लिए भी नया सवेरा लेकर आएगी।

द अब्राहम एकॉर्ड्स और भारत

  • भारत की जहां तक बात है तो इज़राइल और संयुक्‍त अरब अमीरात दोनों ही भारत के बेहद करीबी देश हैं। ऐसे में भविष्‍य में इस्‍लामिक देशों के संगठन ओआईसी में कश्‍मीर का मुद्दा हमेशा के लिए खत्‍म हो सकता है।
  • भारत का एक विशाल डायस्पोरा खाड़ी देशों में रहता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में शांति व समृद्धि आएगी तो भारत को निश्चित तौर पर लाभ होगा।
  • भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अरब देशों से आयात होने वाले कच्चे तेल पर निर्भर करता है। यदि इस क्षेत्र में शांति रहेगी तो तेल की कीमतों में उतार – चढ़ाव देखने को कम मिलता है।
  • तुर्की के सहयोग सहयोग से पाकिस्तान द्वारा भारत के प्रति दुष्प्रचार के कारण इस्‍लामिक देशों के संगठन में भारत विरुद्ध माहौल का निर्माण हो रहा था जिसको अब विराम लगाना संभव होगा क्योंकि सऊदी अरब इस संगठन का सबसे प्रभावशाली देश है।
  • इसके साथ ही तुर्की मलेशिया और पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक देशों के संगठन के समानांतर दूसरा इस्लामिक संगठन बनाकर भारत पर दबाव डालने की कवायद पर भी अंकुश लगेगा।
  • ईरान इस समझौते को अपने खिलाफ मान रहा है इसलिए भारत के इस सदाबहार सदाबहार मित्र को चीन के खेमे में जाने की चिंता प्रबल हो जाएगी। जिसके दुष्परिणाम स्वरूप भारत और ईरान के संबंध व्यापक रूप से प्रभावित होंगे।

चुनौतियाँ

  • कुछ विशेषज्ञ इस समझौते को खास तो मानते हैं, लेकिन ऐतिहासिक नहीं मानते हैं। ऐसा इसलिए है, क्‍योंकि उनकी राय में इससे पहले इजरायल ने जो चार (1979, 1983 1994, 1993) समझौते किए थे उनको भी एतिहासिक बताया गया था, लेकिन उन समझौतों के बाद भी इस पूरे क्षेत्र में शांति जैसी कोई चीज दिखाई नहीं दी। ये सभी समझौते इस क्षेत्र के अलग-अलग देशों के साथ हुए थे।
  • यूएई और इज़राइल के बीच एक शांति समझौते के एक बिंदु ‘वेस्‍ट बैंक’ पर इज़राइल के दावे के सवाल पर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल की तरफ से फिलहाल इसको सस्‍पेंड करने की बात कही गई है। वेस्‍ट बैंक पर दावा छोड़ने की बात नहीं कही गई है। भविष्य मे ‘वेस्‍ट बैंक’ क्षेत्र फिर से फिलिस्तीन और इज़राइल के बीच विवाद का कारण बन सकता है।
  • कुछ विशेषज्ञ का कहना है कि इस समझौते को ईरान की बढ़ती ताकत के मद्देनजर किया गया है। इनका मानना है कि यह समझौता अरब क्षेत्र में शांति लाने हेतु कम, बल्कि ईरान को संतुलित करने की दिशा में अधिक प्रतीत हो रहा है। गौरतलब है कि यूएई और इजरायल दोनों ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरोध में हैं। दोनों ही देश नहीं चाहते हैं कि वो अपनी सैन्‍य क्षमता में इजाफा करे, जिससे इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ जाए। ऐसे में ईरान के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए इज़राइल का साथ जरूरी है। आगे की राह अरब क्षेत्र में शांति व स्थिरता सभी के लिए हितकर है, अतः यूएई और इज़राइल के बीच एक शांति समझौता होने से इस दिशा में काफी मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, अन्य हितधारकों को भी अरब क्षेत्र में शांति व स्थिरता लाने हेतु प्रयास करना चाहिए।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत में बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? बाढ़ प्रबंधन को और अधिक बेहतर करने के उपाय बताइये।