कोविड-19 के दौरान संसद की भूमिका पर उठते सवाल - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


कोविड-19 के दौरान संसद की भूमिका पर उठते सवाल - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • कोविड-19 महामारी से जूझते हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिर इस दौरान भारतीय लोकतंत्र की महत्त्वपूर्ण संस्था 'संसद' की कार्यशैली 'र कई विद्वानों ने सवाल खड़े किये हैं।

संसद

  • संसद, भारत सरकार का विधायी अंग है। भारतीय संविधान में संसदीय प्रणाली अपनाये जाने के कारण देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद एक विशेष स्थान रखती है।
  • भारतीय संविधान के भाग-5 में संसद के गठन, संरचना, अवधि, विशेषाधिकार, शक्ति, प्रक्रिया आदि के बारे में वर्णन किया गया है।

भारत की संसद के तीन अंग हैं-

  • भारत का राष्ट्रपति
  • राज्यसभा (द्वितीय सदन) या उच्च सदन या काउंसिल ऑफ स्टेट्स
  • लोकसभा (प्रथम सदन या लोकप्रिय सदन) या निम्न सदन या हाउस ऑफ द पीपल

संसद से सम्बन्धित अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • संसद के निम्न सदन (लोकसभा) के अध्यक्ष का पद (लोकसभा अध्यक्ष) एक आधारभूत पद होता है। इस पद के विषय में यह कहा जाता है कि संसद के सदस्य अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रें का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि अध्यक्ष सदन के पूर्ण अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। लोकसभा अध्यक्ष को संसदीय लोकतंत्र की परम्पराओं के सच्चे अभिभावक के रूप में देखा जाता है।
  • लोकसभा के नियमों के अनुसार 'सदन के नेता' से आ'य प्रधानमंत्री से है, यदि वह लोकसभा का सदस्य हो। इसी प्रकार राज्यसभा में सदन का नेता प्रधानमंत्री द्वारा नामित कोई ऐसा मंत्री होता है जो राज्यसभा का सदस्य हो।
  • संसद के किसी सदन में उसकी कुल संख्या से कम से कम 10 प्रतिशत सीटें हासिल करने वाली सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता, सदन में विपक्ष का नेता कहा जाता है। इसका मुख्य कार्य सरकार की नीतियों की रचनात्मक आलोचना करना तथा वैकल्पिक सरकार का गठन करता है। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता को वर्ष 1977 में वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष वेतन, भत्ते तथा सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

संसद के प्रमुख कार्य

  • देश की व्यवस्था चलाने हेतु विविध प्रकार के कानूनों की आवश्यकता होती है जिन्हें केन्द्रीय विधायिका या संसद द्वारा बनाया जाता है।
  • संसद, संसदीय कार्यवाही के विविध साधनों के द्वारा कार्यपालिका (आम बोल-चाल में सरकार) की जवाबदेही को सुनिश्चित करती है।
  • संसद सदस्य पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों से आते है, अतः वह अपने संसदीय क्षेत्र के मुद्दों को संसद में उठाते है।
  • संसद में राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों एवं मुद्दों पर सार्थक चर्चा होती है और इन विषयों पर सरकार की क्या प्रगति है, यह भी जानने को मिलता है।
  • सरकार (अर्थात् कार्यपालिका) के खर्चों को संसद द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है।

विश्लेषण

  • पिछले कुछ महीनों से देश कोविड-19 महामारी का सामना कर रहा है और इस दरम्यान देशव्यापी लॉकडाउन ने लोगों के समक्ष आर्थिक से लेकर अन्य प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में संसद को सत्र आयोजित करना अति आवश्यक था लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जो इस महत्त्वपूर्ण संस्था की कार्यपालिका पर प्रश्न-चिन्ह लगाता है।
  • केन्द्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने हेतु आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत लॉकडाउन लगाया था, क्योंकि भारत में महामारी को रोकने हेतु अन्य कानून नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब लॉकडाउन पहली बार लगाया गया था तो उस समय संसद का सत्र चल रहा था तो संसद कोविड-19 महामारी के सम्बन्ध में एक विशेष कानून को पारित कर सकती थी, किन्तु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ।
  • कोविड-19 महामारी के दरम्यान कार्यपालिका ने कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिया है लेकिन ये सभी निर्णय संसद की समीक्षा से बाहर हैं क्योंकि लॉकडाउन की स्थिति में संसद का सत्र आयोजित नहीं हो सका।
  • केन्द्र सरकार ने हाल ही में आत्मनिर्भर अभियान के तहत 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। यह धनराशि भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ता प्रदान करने हेतु घोषित की गयी है। किन्तु विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय संविधान ने संसद (मुख्यतः लोकसभा) को राष्ट्रीय वित्त के नियंत्रण हेतु विशिष्ट शक्तियाँ सौंपी है। देश की कार्यपालिका या सरकार के पास बिना संसद की मंजूरी के धन व्यय करने का अधिकार नहीं है। इस हेतु प्रत्येक वर्ष वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में इसकी मंजूरी के लिए बजट प्रस्तुत किया जाता है। इसके साथ ही, लेखा समिति एवं प्रॉक्कलन समिति तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, व्यय की वैद्यता की जाँच करते हैं और संसद में चर्चा के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान देश में कई बड़े मुद्दे उभरकर सामने आये, यथा-प्रवासी श्रमिक, स्वास्थ्य क्षेत्र में चुनौतियाँ इत्यादि। लेकिन इन विषयों पर संसद में किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं हो पायी क्योंकि सत्र का आयोजन नहीं हो सका।
  • संसद की समितियाँ कार्यपालिका पर एक वॉचडॉग की तरह कार्य करती हैं किन्तु इनका भी महामारी एवं लॉकडाउन के कारण कार्य प्रभावित हुआ है।
  • यदि संसद के सत्र का आयोजन होता तो विपक्ष का नेता भी सरकार का उन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करता, जिन पर कोविड-19 महामारी एवं लॉकडाउन के दौरान सरकार से चूक हुई है।

कोविड-19 महामारी के पहले भी संसदीय व्यवस्था में अन्य चुनौतियाँ विद्यमान थीं, यथा-

  • लोकसभा अध्यक्ष पर समय-समय पर यह आरोप लगता है कि उनके निर्णय सत्ताधारी पार्टी की तरफ अधिक झुकाव रखते हैं।
  • प्रधानमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा नामित दोनों सदन के नेता की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये गये हैं।
  • संसद सदस्यों पर ऐसे भी आरोप लगते हैं कि सदन में वो प्रश्नकाल, शून्यकाल आदि के दौरान उस तरह के मुद्दे उठाते हैं जिनसे उनका राजनीतिक हित सह सके।
  • किसी भी सुदृढ़ राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक मजबूत विपक्ष का होना अति आवश्यक है लेकिन संसद में विपक्ष के नेता की भूमिका भी समय के अनुसार कमजोर हुई है।

दूसरे देशों की संसद

  • जहाँ एक तरफ भारतीय संसद कोविड-19 महामारी के दौरान अपने कार्यों एवं जिम्मेदारियों के प्रति बेपरवाह (missing) है; वहीं दूसरी तरफ कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, अर्जेण्टीना, इटली, न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया, ब्राजील आदि की संसद या इसकी समकक्ष संस्थाओं के सत्र का आयोजन हुआ।
  • ब्रिटेन में हाइब्रिड मॉडल का अनुपालन किया गया है अर्थात् जो सदस्य संसद तक आने में इच्छुक है तो वह संसदीय सत्र में संसद में ही आकर शामिल हो सकता है और जो भी सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संसद सत्र से जुड़ना चाहता है, तो वह यह भी कर सकता है।

सुझाव

  • भारत के संविधान में मना नहीं किया गया है कि संसद का सत्र वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा आयोजित नहीं किया जा सकता है। जब हम विश्व का सबसे बड़े लोकतंत्र है तो हमारी और अधिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि संसद जैसी अति महत्त्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के माध्यम से सत्र आयोजित करायें।
  • भारत का इंफार्मेशेन टेक्नॉलाजी (आईटी) ढाँचा काफी मजबूत है। भारत को दुनिया का आईटी हब माना जाता है। इस स्थिति में संसद का सत्र वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा आसानी से आयोजित किया जा है।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संसद के सत्र के आयोजन में कुछ लोग सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएँ जाहिर करते हैं तो इसके विपरीत विशेषज्ञों का कहना है कि जब संसद की कार्यवाहियों को टेलीविजन पर प्रसारित किया जाता है तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा संसदीय सत्र के आयोजन से सुरक्षा की बात अप्रासंगिक है।
  • हालाँकि आईटी विशेषज्ञों की मदद से संसद के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के सत्र को सुरक्षित किया जा सकता है।
  • संसदीय समितियों को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से जोड़ा जा सकता है। इन समितियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए ताकि इन पर साइबर अटैक की गुजांइश न के बराबर हो; क्योंकि कुछ समितियाँ अति महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों से जुड़ी होती हैं।

निष्कर्ष

  • कोविड-19 महामारी ने लगभग सभी क्षेत्रें को आमूल-चूल रूप से प्रभावित किया है और इनके समक्ष विविध चुनौतियों को उत्पन्न किया है। इन चुनौतियों से निपटने हेतु सरकार के सभी अंगों (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका) को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन पेपर-2

  • संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य संचालन, शक्तियां एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद, एक अतिमहत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। कोविड-19 जैसी अभूतपूर्व महामारी के दरम्यान संसद की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

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