समुद्र में तेल रिसाव - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा का कारण

  • हाल ही में हिंद महासागर में स्थित भारत के पड़ोसी मॉरीशस (Mauritius) ने देश के दक्षिण-पूर्वी तट पर फंसे जापान के स्वामित्व वाले एक जहाज से तेल का रिसाव शुरू होने के बाद 'पर्यावरणीय आपातकाल' (environmental emergency) की घोषणा कर है।

पृष्ठभूमि

  • एमवी वाकाशिवो नामक जापानी तेल टैंकर 25 जुलाई से मॉरीशस के दक्षिण-पूर्वी तट पर फंसा हुआ है। मॉरीशस सरकार का कहना है कि जहाज के निचले हिस्से में दरारें आ गई हैं और तेल का रिसाव तेजी से हो रहा है।
  • इस खतरे को देखते हुए मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने पर्यावरणीय आपातकाल की घोषणा की है।
  • सैटेलाइट द्वारा जारी तसवीरों में नीले रंग के समुद्री पानी पर गहरे रंग का तेल फैलता नजर आ रहा है।
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु काम करने वाली संस्था ‘ग्रीनपीस’ का कहना है कि इससे मॉरीशस में अब तक का सबसे भयावह पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है और हिन्द महासागर के एक बड़े भाग में पारिस्थितिकी तंत्र व उसमें निवास करने वाले जीव-जंतुओं को भारी मात्रा में नुकसान होने की संभावना है।
  • मॉरीशस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद का आह्वान किया है। फ्रांस ने अपने रीयूनियिन द्वीप (मॉरीशस के समीप फ़्रांस के स्वामित्व वाला द्वीप) से प्रदूषण नियंत्रण करने वाले उपकरणों के साथ सैन्य विमान , मॉरीशस की मदद के लिए भेजे हैं।
  • भारत ने भी भारतीय तटरक्षक बल की 10 सदस्यीय टीम को अपने सागर (SAGAR) विजन के तहत भेजा है। भारतीय तटरक्षक बल का यह दल मॉरीशस के समुद्री क्षेत्र में हुए तेल रिसाव के संबंध मे कार्य करेगा।

क्या होता है समुद्री तेल रिसाव?

  • समुद्री तेल रिसाव ,एक प्रकार का प्रदूषण है; जिसमें मानवीय व प्राकृतिक गतिविधियों के कारण तरल पेट्रोलियम हाईड्रोकार्बन (यथा – कच्चा तेल, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद व उनके उप-उत्पाद ,बेड़े में प्रयुक्त होने वाले भारी ईंधन जैसे बंकर ईंधन, तैलीय अवशिष्ट या अपशिष्ट तेल आदि) समुद्री पर्यावरण (यथा- तटीय क्षेत्र आदि ) में मुक्त हो जाता है।
  • समुद्री प्रदूषण के एक प्रमुख कारण तेल रिसाव भी है। यह मानवीय और प्राकृतिक, दोनों ही प्रकार से हो सकता है; हालांकि यह मुख्यतः मानवीय गतिविधियों के कारण ही होता है जो कभी –कभी भयानक रूप ले लेता है।
  • पेट्रोलियम हाईड्रोकार्बन का रिसाव मुख्यतः टैंकर, अपतटीय प्लेटफार्म, खुदाई उपकरण, जहाज, तेल के कुओं इत्यादि से होता है।

समुद्री तेल रिसाव के नुकसान

  • समुद्री या तटीय प्रदूषण के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण आदि सभी क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • पक्षियों के डैनों पर तेल चिपक जाने से उनके परों का वह इन्सुलेटिंग गुण प्रभावित होता है, जो उन्हें पानी में भीगने से बचाता है। भीगने पर उन्हें ठंड लगती है और तब तैरने और उड़ने में भी परेशानी होती है। तेल में मौजूद रासायनिक पदा्रथों से इनकी त्वचा और आंखों में जलन भी होती है।
  • महासागरों में तेल रिसाव प्रदूषण से समुद्री प्रजातियों के गलफड़ ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। इसका प्रभाव वाणिज्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समुद्री प्रजातियों पर भी पड़ता है, जिससे समुद्री खाद्य के बाजार मूल्य घट जाते हैं।
  • तेल की चिकनाई (समुद्र में तेल रिसाव) के कारण समुद्री जीव-जंतुओं और पक्षियों को हानि होती है तथा मैंग्रोव वनों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जिनमें तेल फंस जाता है और फूल खिलने, फल बनने तथा अंकुरण पर प्रभाव पड़ता है।
  • इससे प्रभावित मछलियों और समुद्री खाद्य वस्तुओं की गंध अप्रिय हो जाती है अतः तेल रिवाव के कारण मछलियों की उत्पादन सुविधाओं को होने वाली आर्थिक क्षति से समुद्री खाद्य उद्योग को काफी खतरे का सामना करना पड़ता है।
  • समुद्री तल पर फेंका गया ड्रिल का कचरा ऑक्सीजन को समाप्त कर देता है और इससे निचले तलछटों पर विषैले सल्फाइड बनते हैं जिससे समुद्र तल पर रहने वाले जीव मर जाते हैं।
  • महासागरों में तेल रिसाव प्रदूषण से, इनसे प्राप्त होने वाली सुविधायें (यथा- औषधि पौधे एवं जीव, खाद्य पदार्थ, तटीय पर्यटन तथा अन्य समुद्री पौधे एवं जीव आदि) दूषित हो जाती हैं, जिससे मानव को काफी सामाजिक-आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
  • महासागरों में तेल रिसाव प्रदूषण से समुद्री पारितंत्र की जैवविविधता पर भी गम्भीर खतरा उत्पन्न होता है।
  • समुद्री प्रदूषण के अधिक होने पर वहां उपस्थित वनस्पति व जीव तेजी से मरने लगते हैं जिनके अपघटन हेतु पानी में घुलित ऑक्जीवन की डिमांड अधिक हो जाती है।
  • समुद्री तेल रिसाव का नुकसान सिर्फ समुद्री जीवों और वन्यजीवों तक सीमित नहीं है। तेल के रिसाव से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों का आवास और जनजीवन भी ख़तरे में पड़ जाता है। तेल से लथपथ समुद्री जीवों को अगर मानव सेवन कर ले तो उसका शरीर बीमारियों का घर बन सकता है।
  • समुद्र में बड़े पैमाने पर फैले तेल से छुटकारा पाने के लिए जब पानी पर तैर रहे तेल के कुछ हिस्सों को आग लगाई जाती है तो इससे वायुमंडल में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड जैसी गैसें उत्सर्जित होकर वायुमंडल मे प्रवेश कर जाती हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग आदि का कारण बनती हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में मॉरीशस में तेल रिसाव भले ही बहुत दूर तक नहीं हुआ है, लेकिन ऐसी जगह हुआ है जिससे पर्यावरण पर संभावित गंभीर असर को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इसकी वजह यह है कि तेल रिसाव वाली जगह के नज़दीक दो संरक्षित समुद्री इकोसिस्टम और ब्लू बे मरीन पार्क रिज़र्व हैं। ये ब्लू बे मरीन पार्क रिज़र्व अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक वेटलैंड है, जहाँ कई प्रजातियों के समुद्री जीव और पौधे हैं।

तेल रिसाव से निपटने के कुछ उपाय

  • तेल का विखंडन करने या हटाने के लिए सूक्ष्मजीवों अथवा जैविक कारकों का उपयोग किया जाता है , इसे जैविक उपचार विधि कहते हैं। विशिष्ट जीवाणु पेट्रोलियम के हाइड्रोकार्बन का अपघटन करके पानी और कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं।
  • नियंत्रित दहन प्रणाली के द्वारा पानी में फैले हुए तेल की मात्रा को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।
  • निर्वात विधि के द्वारा समुद्र तटों और पानी की सतह से तेल को हटाया जाता है।
  • बूम, समुद्री सतह पर तैरते हुए बड़े अवरोध होते हैं जो तेल को एकत्र कर उसे जल से ऊपर उठाते हैं।
  • स्किमर्स के द्वारा भी समुद्री सतह से तेल को हटाया जाता है। स्किमर्स, तेल की सतह से फेन हटाते हैं।
  • सॉर्बेंट्स,बड़े अवशोषक होते हैं, जो तेल का अवशोषण करते हैं।

तेल रिसाव से संबन्धित कानून

  • जहाजरानी क्षेत्रक को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने जहाज से निकलने वाले प्रदूषण के लिए कई नियम बनाए हैं इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने हेतु बाध्यकारी ऊर्जा दक्ष उपायों को लागू किया गया है।
    1. इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द प्रिवेंशन ऑफ पॉल्यूशन फ्रॉम शिप 1973
    2. 1978 का मर्पोल प्रोटोकोल(MARPOL Protocol)
    3. इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द प्रिवेंशन ऑफ पोलूशन ऑफ द सी बाय आयल, 1954

पोलर कोड (Polar Code)-

  • 2017 में द इंटरनेशनल कोर्ट फॉर शिप ऑपरेटिंग इन पोलर वाटर (Polar Code) को लागू किया गया। पोलर कोड ध्रुवीय क्षेत्रों में काम करने वाले जहाजों के प्रसांगिक डिजाइन, प्रासंगिक डिजाइन, निर्माण, उपकरण, परिचालन, प्रशिक्षण, खोज और बचाव और पर्यावरण संरक्षण के मामलों की पूरी तरह से समावेशित करते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख संस्थान है जोकि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के विकास के लिए समर्पित है। इसका मुख्य कार्य शिपिंग उद्योग के लिए एक उचित और प्रभावी, स्वीकृत और लागू करने योग्य कानूनी ढांचा तैयार करना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल रिसाव से हुई क्षति के लिये पर्याप्त, शीघ्र तथा प्रभावी क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ‘इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन सिविल लायबिलिटी ऑफ बेकर ऑयल पॉल्यूशन डैमेज, 2001’ है। जिसका भारत ने भी अनुसमर्थन किया है ।
  • भारत के अन्दर तटवर्ती और समुद्री क्षेत्रों को तेल रिसाव से होने वाली क्षति से रक्षा करने हेतु 1980 से तेल रिसाव प्रबंधन कार्यक्रम बना था।
  • भारत में तेल रिसाव आपदा के मामले में संकट प्रबंधन के लिए गृह मंत्रालय नोडल मंत्रालय है तथा तेल रिसाव होने की स्थिति में भारत के समुद्री क्षेत्र में तेल रिसाव प्रदूषण से निपटने के लिए तटरक्षक बल समन्वयकारी एजेंसी है।

आगे की राह

  • पृथ्वी के लगभग 70 प्रतिशत भाग पर महासागर अवस्थित हैं और ये सम्पूर्ण पृथ्वी के जैवमण्डल को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं अर्थात् वर्षा से लेकर अन्य जलवायुवीय गतिविधियों के निर्धारण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए समुद्री या तटीय प्रदूषण पर हमें गहन चिंतन करना होगा ताकि इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
  • प्रकृति में संतुलन स्थापित रखने के लिए हमें महासागरों के साथ को स्वस्थ रखना होगा इसके लिए सभी हितधारकों को आगे आना होगा। समुद्री प्रदूषण की गतिविधियों को न्यून करते हुए ब्लू इकोनामी की ओर बढ़ना सभी राष्ट्र की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। समुद्र में प्रदूषण को रोकने के लिए व्यापक प्रबंध करते हुए समुद्री जीवो, उत्पादों के संतुलित प्रयोग को प्रोत्साहित करते हुए सतत विकास लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
  • भारत सरकार को समुद्र तटों के पास अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों व औद्योगिक संयंत्रों पर लगाम लगाने के साथ-साथ अनियोजित तरीके से समुद्रीय संसाधनों (यथा-पेट्रोलियम पदार्थ, प्रवाल भित्ति, समुद्री जीव इत्यादि) के दोहन पर भी रोक लगानी चाहिए और इस क्षेत्र में भी सतत विकास सुनिश्चित करना चाहिए।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • समुद्री तेल रिसाव से आप क्या समझते हैं? इससे होने वाले नुक़सानों को उल्लेखित करने के साथ-साथ समुद्री तेल रिसाव से संबन्धित क़ानूनों की भी चर्चा करें।