भारत में कौशल-उद्योग अंतराल को कम करने की आवश्यकता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

संदर्भ

  • भारत में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाले संस्थान औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) और निजी प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं। इन संस्थानों का संचालन कोविड महामारी से प्रेरित प्रतिबंधों के कारण बंद पड़ा है। इससे लगभग 1 करोड़ लोगों को कौशल प्रशिक्षण से वंचित रहना पड़ रहा है और उनके रोजगार की संभावनाओं प्रभावित हो रही है।
  • कौशल प्रशिक्षण के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ साझेदारी की है। लेकिन, कौशल प्रशिक्षण का उद्योगों के साथ जुड़ाव न होने की समस्या अभी भी एक संरचनात्मक अवरोध के रुप में बना हुआ है। क्या होता है कौशल विकास?
  • कौशल विकास का तात्पर्य है लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर उसकी कार्य क्षमता को बढ़ावा देना है। कौशल विकास के द्वारा तकनीकी शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाकर उसे विश्व मांग के अनुरूप ढालना होता है जिससे श्रम की उत्पादकता के साथ-साथ कुशलता का भी विकास हो।

भारत में कौशल विकास हेतु महत्वपूर्ण पहल एवं उपलब्धि

  • स्किल इंडिया मिशन: कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय तथा कौशल निर्माण से जुड़े अन्य मंत्रालयों तथा विभागों के प्रयासों ने कुशल श्रमबल की मांग की पूर्ति के लिए प्रत्येक वर्ष एक करोड़ से अधिक युवाओं को स्किल इंडिया मिशन से जोड़ा जा रहा है।
  • आईटीआई क्षमता में बढोतरी: आईटीआई परितंत्र के आकार में उल्लेखनीय बढोतरी रही है और इन संस्थानों की कुल संख्या 15,000 के करीब पहुंच गई है। पिछले पांच वर्षों के दौरान इन आईटीआई में नामांकित उम्मीदवार बढ़कर 27.56 लाख तक पहुंच गए हैं। आईटीआई की क्षमता बढ़कर 34.63 लाख हो गई है जो 2015 की तुलना में 85.5 प्रतिशत अधिक है। उद्योग परामर्शों के साथ अपग्रेड किए गए 63 कोर्स करीकुला, 35 नए विषयों के जरिये आईटीआई का उन्नयन किया गया है तथा 11 उद्योग 4.0 कोर्स आरंभ किए गए हैं।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत प्रशिक्षण:
    1. पीएमकेवीवाई के तहत, 250 से अधिक रोजगार भूमिकाओं में 37 सेक्टरों में अभी तक कुल 92 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है। पीएमकेवीवाई एमएसडीई के तहत एक प्रमुख योजना है।
    2. कृषि क्षेत्र पर विशेष फोकस दिया गया और विशिष्ट फार्मिंग में 3.42 लाख को प्रशिक्षित किया गया। कुछ विशेष परियोजनाएं भी आरंभ की गईं जिसके तहत 5514 जेल बंदियों तथा 5549 दिग्भ्रमित युवाओं को दिल्ली में प्रशिक्षित किया गया।
  • प्रधानमंत्री कौशल केंद्र: अल्पकालिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए, भारत के 704 जिलों में मॉडल कौशल केंद्र के रूप में 720 से ज्यादा प्रधानमंत्री कौशल केंद्र खोले गए हैं। ये आकांक्षा, गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: देश में कुशल कार्यबल के लिए क्षमता निर्माण करने, अंतरराष्ट्रीय मानकों पर संयुक्त रूप से काम करने और इन देशों में कुशल कार्यबल की मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों के साथ उनकी आपूर्ति करने के लिए, सिंगापुर, यूएई, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ काम किया जा रहा है।
  • प्रशिक्षुता कार्यक्रमों में भागीदारी में बढ़ोत्तरी: प्रशिक्षुता मध्यवर्तन के लिए की गई विभिन्न पहलों के कारण, वित्त वर्ष 18-19 की तुलना में प्रशिक्षुओं के नामांकन में 44 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और प्रशिक्षुता प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वाले प्रतिष्ठानों में 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीसी) के अंतर्गत कुल 8.61 लाख लोगों को संलग्न किया गया है, जिसमें लगभग 85,000 प्रतिष्ठानों द्वारा प्रशिक्षुओं को काम पर रखा गया है।
  • जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) योजना: पिछले वित्तीय वर्ष में, जेएसएस योजना के अंतर्गत, कुल 4.10 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया जबकि 2018-19 के दौरान 1.67 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया था, छह महीने की अवधि में 2.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
  • ई-स्किल इंडिया प्लेटफॉर्म: एनएसडीसी ने भारतीय युवाओं को ई-कौशल का अवसर प्रदान करते हुए एक बहुभाषी ई-लर्निंग एग्रीगेटर पोर्टल ई-स्किल इंडिया बनाया है। ई-स्किल इंडिया स्थान और समय की सीमाओं से उपर उठकर, कभी भी, कहीं भी कौशल प्रदान करता है। यह पाठ्यक्रम अंग्रेजी, हिंदी और 9 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। छात्रों को स्व-पुस्तक इंटरैक्टिव वीडियो और क्विज़ के माध्यम से निर्देशित किया जाता है। पोर्टल में 500 से ज्यादा पाठ्यक्रम शामिल हैं और लगभग 2.5 लाख छात्रों ने अपना पंजीकरण इस पर कराया हुआ है।
  • विजन रिपोर्ट 2025: एमएसडीई ने विभिन्न हितधारकों के साथ विचार- विमर्श करके अपनी विजन रिपोर्ट 2025 तैयार की है।
  • महिलाओं के लिए पहल: 8 मार्च 2020 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, आईआईएम बैंगलोर, कर्नाटक में एमएसडीई द्वारा महात्मा गांधी नेशनल फैलोशिप (एमजीएनएफ) प्रोग्राम नामक दो वर्षीय प्रोग्राम की शुरूआत की गई। इस फेलोशिप प्रोग्राम की अवधारणा वर्ल्ड बैंक लोन असिस्टेड स्किल एक्विजिशन एंड नॉलेज अवेयरनेस फॉर लाइवलीहुड प्रमोशन (संकल्प) प्रोग्राम के अंतर्गत की गई है। कुल चयनित 75 फैलो में से, 32 महिला हैं (कुल का 43 प्रतिशत) ।
  • स्वदेश: कौशल विकास एवं उद्यमिता, नागरिक उड्डयन और विदेश मंत्रालयों की एक सहयोगात्मक पहल, स्वदेश (स्किल्ड वर्कर्स एराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट), वंदे भारत अभियान के अंतर्गत वापस लौटने वाले नागरिकों के लिए एक कौशल मानचित्रण अभ्यास है। स्वदेश का उद्देश्य, भारतीय और विदेशी कंपनियों की मांग पूरा करने और उनके कौशल का उपयोग करने के लिए, कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों के लिए एक डाटाबेस तैयार करना है।
  • असीम: सूचना प्रवाह में सुधार लाने और बाजार में कुशल कार्यबल की मांग- आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए, एमएसडीई द्वारा हाल ही में कुशल लोगों के लिए आजीविका का स्थायी अवसर खोजने में सहायता प्रदान करने के लिए 'आत्मनिर्भर स्किल्ड एम्प्लॉई इम्प्लॉयर मैपिंग’ (असीम) पोर्टल की शुरूआत की गई है। इसमें प्रशिक्षण महानिदेशालय के अंतर्गत आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए 1.5 लाख उम्मीदवारों को भी जोड़ा गया है और नियोक्ताओं के लिए ‘स्वदेश’ (स्किल्ड वर्कर्स एराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट) के अंतर्गत डाटा उपलब्ध है। साथ ही, पीएमकेवीवाई 2.0 के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए सभी 1.2 करोड़ उम्मीदवारों के डेटा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

क्यों है कौशल प्रशिक्षण और उसके औद्योगिक जुड़ाव में अंतराल?

  • उद्योग की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम का न होना: आमतौर पर यह देखा जाता है की कौशल प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम उद्योगों के अनुरूप नहीं है या फिर कौशल प्राप्त होने का सिर्फ प्रमाणपत्र ही है वास्तविक कौशल नहीं है। इसके परिणामस्वरूप नौकरी मिल जाती है लेकिन अपेक्षित कौशल न होने के कारण टिकती नहीं है। आंकड़ों के अनुसार केवल 8.5% लोग ही अपनी नौकरी जारी रख पाते हैं। इस महामारी ने उद्योग के संचालन के स्वरूप में परिवर्तन किया है, जिससे आवश्यक कौशल और कौशल पाठ्यक्रम के बीच की खाई और चौड़ी होने की संभावना है।
  • व्यावहारिक प्रशिक्षण का अभाव: आमतौर पर कौशल प्रशिक्षु कौशल पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद इंटर्नशिप या अप्रेंटिसशिप जैसे व्यावहारिक या प्रयोगिक प्रशिक्षण नहीं लेते है जिससे उनका कौशल प्रशिक्षण अपूर्ण रह जाता है। कोविड-19 में इसमें वृद्धि करने का काम किया है।
  • अप्रभावी सेक्टर स्किल काउंसिल: उद्योग की मांग के अनुसार प्रशिक्षण के अपने उद्देश्य में सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) काफी हद तक अप्रभावी रहे हैं। सेक्टर स्किल काउंसिल के पुनर्गठन की आवश्यकता है। कोविड महामारी की अनिश्चितताओं के कारण नियोक्ताओं ने रोजगार देना कम कर दिया है, ऐसे में कौशल प्रशिक्षण के बाद भी कौशल की कमी रोजगार की दर को और प्रभावित करेगी।

कौशल-उद्योग अंतराल को कम करने के उपाय

महामारी प्रेरित संकट को भारत में कौशलीकरण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के अवसर के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। कौशल प्रशिक्षण में अंतराल को कम करने के लिए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:

  1. अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम को मजबूत करना: आरंभ में प्रशिक्षु 1-3 साल की अवधि के लिए नौकरी के साथ साथ कौशल भी करते हैं। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (National Apprenticeship Promotion Scheme) के माध्यम से इसका समर्थन करती है और 25% वजीफा (stipend) देती है। ऐसे अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों को प्रशिक्षुता पखवाड़ा जैसे जागरूकता अभियानों के माध्यम से मजबूत करना किया जाना चाहिए।
  2. इसके अलावा, नौकरी और प्रशिक्षुता के लिए चुने गए प्रशिक्षुओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाना चाहिए। इससे कौशलीकरण पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  3. प्रशिक्षण की एक दोहरी प्रणाली: सभी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कक्षा और उद्योग प्रशिक्षण दोनों घटक होने चाहिए। ऐसे दोहरे प्रशिक्षण को उद्योग के साथ साझेदारी तथा कौशल पाठ्यक्रम डिजाइन और मूल्यांकन में उद्योग की भागीदारी को बढ़ाकर प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  4. 2019 के बाद से, हरियाणा में 27 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों ने 40 उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर ऐसे दोहरे प्रशिक्षण को लागू करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके चलते हरियाणा में इन उद्योगों से 30% प्रशिक्षुओं को अग्रिम रोजगार ऑफर दिया गया है।
  5. कौशल-नौकरी डाटाबेस: कुशल श्रमिकों के डाटा को उद्योगों के लिए सुलभ बनाने के लिए श्रमिकों की सहमति और डेटा की सुरक्षा की उचित व्यवस्था के साथ कौशल और नौकरी का एक डाटाबेस तैयार किया जाना चाहिए। वर्तमान में, ऐसे डेटाबेस या तो उपलब्ध नहीं है या फिर धुंधला है। इन आंकड़ों को उद्योगों के अनुरूप एकीकृत करने की आवश्यकता है।
  6. हाल ही में शुरू किया गया असीम पोर्टल (Atmanirbhar skilled employee employer mapping-ASEEM) कौशल-नौकरी मिलान के लिए सही दिशा में एक कदम है।

निष्कर्ष

  • इस साल की शुरुआत में, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में 2030 तक 29 मिलियन कौशलीकृत श्रमिकों की कमी होगी। यह कोविड महामारी के पूर्व का अनुमान है। इसलिए यदि महामारी के दौरान स्किलिंग इकोसिस्टम तीव्रता और दूरदर्शिता के साथ कार्य नहीं करेगा तो इस संख्या में और भी वृद्धि होने की संभावना है।
  • अतः केवल उत्तरदायी नीतियों और कौशल भारत मिशन में साहसिक सुधार के द्वारा भारत विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन करने की उम्मीद कर सकता हैं।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • शासन

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत में कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?