लिटिल अंडमान में मेगा सिटी परियोजना : पर्यावरण संरक्षण बनाम आर्थिक विकास की स्थिति - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

नीति आयोग के विजन डॉक्यूमेंट में लिटिल अंडमान में एक मेगासिटी की स्थापना का प्रस्ताव दिया गया है।

परिचय

नीति आयोग के सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ़ लिटिल अंडमान विजन डॉक्यूमेंट में नीति आयोग द्वारा इस द्वीप के रणनीतिक स्थिति तथा प्राकृतिक संसाधन को ध्यान में रखते हुए मेगा सिटी के विकास का प्रस्ताव दिया गया है। जहाँ एक तरफ यह प्रस्ताव आर्थिक उन्नति , रोजगार तथा व्यापार को बढ़ावा देगा वहीँ दूसरी तरफ इससे पर्यावरण के संरक्षण की समस्याएं भी उत्पन्न होंगी। नीति आयोग का प्रस्ताव लिटिल अंडमान द्वीप पर एक नया ग्रीनफील्ड तटीय शहर बनाना है जिसे मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में विकसित कर हांगकांग तथा सिंगापुर जैसे व्यापार उन्नत क्षेत्रो के साथ प्रतिस्पर्धा की जा सके।

कैसे होगा विकास?

अंडमान और निकोबार समूह के छोटा अंडमान द्वीप में 680 वर्ग किमी के स्थायी और समग्र विकास के लिए एक योजना प्रस्तावित है। इस योजना के अनुसार समग्र क्षेत्र का विकास तीन डेवेलप जोन में किया जाएगा।

जोन 1 -

  • यह क्षेत्र लिटिल अंडमान के पूर्वी तट के साथ 102 वर्ग किमी में बनेगा। इसमें वित्तीय जनपद और मध्य शहर होगा और जिसमे एक एयरोसिटी, और एक पर्यटनसिटी तथा जिला अस्पताल का निर्माण किया जाएगा ।

जोन 2-

  • 85 वर्ग किमी जंगलो के मध्य प्रस्तावित इस क्षेत्र में एक फिल्मसिटी, एक आवासीय जिला तथा एक पर्यटन आधारित विशेष आर्थिक क्षेत्र होगा।

ज़ोन 3 -

  • द्वीप के पश्चिमी तट पर 52 वर्ग किमी के प्राचीन वन पर विस्तारित यह एक प्रकृति क्षेत्र होगा जिसमे विशेष वन रिसॉर्ट, एक प्रकृति चिकित्सा जिला तथा एक नेचर रिट्रीट सम्मिलित होंगे।

इन तीन डेवेलप जोन के साथ ही इस समग्र विकसित क्षेत्र में निम्न तत्व सम्मिलित होंगे

  • इसमें अंडरवाटर ’रिजॉर्ट्स, कसीनो, गोल्फ कोर्स, कन्वेंशन सेंटर, प्लग-एंड-प्ले ऑफिस कॉम्प्लेक्स, पूरी तरह से स्वचालित ड्रोन डिलीवरी सिस्टम, नेचर क्योर इंस्टीट्यूट्स और बहुत कुछ वाला ड्रोन पोर्ट भी निर्मित किये जाएंगे।
  • इसमें एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण किया जाएगा जो सभी प्रकार के विमानों को संभालने में सक्षम होगा।
  • पूर्व से पश्चिम तक समुद्र तट के समानांतर 100 किमी ग्रीनफील्ड रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। यह दोनों तटों की कनेक्टिविटी को सक्षम करेगा।

द्वीप पर इस मेगा शहर के निर्माण के पक्ष में तर्क

  • हमेशा से ही समुद्रो के रास्ते व्यापार करने से परिवहन लागत में कमी आती है। सिंगापुर तथा हांगकांग जैसे देशो के विकास में समुद्री व्यापार तथा बंदरगाहों के विकास ने बड़ा योगदान दिया है। इस स्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप में ऐसे शहर के निर्माण से भारत भी राजस्व अर्जित कर सकता है। यह यह ध्यान देने योग्य है कि अंडमान द्वीप की अवस्थिति उस विश्व के सर्वाधिक व्यस्त समुद्री मार्ग पर है।
  • भारत लगातार कई देशो के साथ लॉजिस्टिक समझौते कर रहा है जिनमे अमेरिका भी सम्मिलित है। यहाँ मेगा सिटी डेवेलप होने से तथा उसे मुक्त व्यापार क्षेत्र घोषित करने से भारत के व्यापार में वृद्धि होगी।
  • इस क्षेत्र में भारत की एकीकृत सैन्य कमांड भी स्थापित है जिससे भारत इस क्षेत्र में आने वाली जहाजों को सुरक्षा का आश्वासन भी देगा जिससे भारत की नेट सुरक्षा प्रदाता की स्थिति मजबूत होगी।
  • यदि यह मॉडल सफल होता है तब भारत अपनी 7500 किमी लम्बी तट रेखा को इसी आधार पर विकसित कर सकता है। जिससे भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की महत्वाकांछी लक्ष्य की पूर्ती में सहायता मिलेगी।
  • अंडमान में इस प्रकार की परियोजना से वहां की जनजातियों का मुख्य धारा में प्रवेश होगा।
  • अंडमान में जॉली बॉय, स्वतंत्र द्वीप , क्लिन्क, चंथम, वाइपर, रोज, बारेन और रेड स्किन जैसे द्वीप वर्तमान में ही पर्यटन को बढ़ावा देते हैं ,इस नवीन शहर के निर्माण से पर्यटन की स्थिति में भी वृद्धि होगी।

क्या हो सकती हैं चुनौतियाँ?

नीति आयोग के डॉक्यूमेंट ने मेगा सिटी डेवेलप करने की चुनौतियों को भी दर्शाया है।

  • लिटिल अंडमान का 95% हिस्सा जंगल में ढका हुआ है, इसका एक बड़ा भाग सदाबहार प्रकार का है। द्वीप का लगभग 640 वर्ग किमी भारतीय वन अधिनियम के तहत रिजर्व फॉरेस्ट है, और लगभग 450 वर्ग किमी का ओंगे ट्राइबल रिजर्व के रूप में संरक्षित है। जो इस द्वीप के जैव विविधतीय महत्व को दर्शाता है।
  • अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह भारत तथा विश्व के जैव विविधता हॉटस्पॉट में सम्मिलित है, यहाँ मेगा सिटी डेवेलप करने से पारिस्थितिकीय असंतुलन तथा पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा है। वन विभाग द्वारा इस पर आपत्ति जताये जाने की संभावना है।
  • अंडमान समूह भारत के मुख्य भूमि से दूर है , जिससे यह सिटी वर्तमान भारत की मेगा सिटीज से जुड़ाव नहीं रख पाएगी।
  • इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए 240 वर्ग किमी (35% ऑफ़ लिटिल अंडमान ) की जरूरत है जिसमे 32% आरक्षित वन और 138 वर्ग किमी डी-नोटिफ़ाइड वन (जिसमे लगभग 31 % आदिवासी क्षेत्र सम्मिलित होगा) सम्मिलित हैं। अतः जनजातीय लोगों का विस्थापन भी एक बड़ी समस्या होगी।
  • इसके साथ ही अंडमान समूह की आपदा (यथा सुनामी ) के प्रति सुभेद्यता भी इस नवीन परियोजना के लिए समस्या है।

निष्कर्ष

यद्यपि इस परियोजना के निवेश मॉडल तथा बजटिंग पर कोई चर्चा नहीं की गई है, तथापि यह परियोजना एक बार फिर आर्थिक विकास तथा पर्यावरणीय संरक्षण के मध्य विवाद को उत्पन्न करेगी। एक तरफ यदि तुलनात्मक रूप से देखे तो जहाँ सिंगापुर की प्रतिव्यक्ति आय लगभग 55000 अमेरिकी डॉलर है वहीँ अंडमान निकोबार द्वीप समूह की प्रतिव्यक्ति आय मात्र $1,789 है। इस गैप को कम करने में यह योजना सहायक होगी परन्तु यह पर्यावरण तथा जैव विविधता संरक्षण के लिए बड़े खतरे को जन्म देगी। अतः यहाँ एक सतत विकास मॉडल के अनुसार कार्यान्वयन करना होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था, पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी
  1. भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  2. समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय,
  3. संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • अंडमान द्वीप समूह सहित भारत के तटीय क्षेत्र की आर्थिक सम्भावनाओ का वर्णन करें ? क्या लिटिल अंडमान में एक व्यापारिक जोन को तैयार करने से पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ेंगी ?अपने उत्तर के सन्दर्भ में तर्क प्रस्तुत करें?