भारत का बीमा बाजार तथा बीमा (संशोधन) विधयेक 2021 - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

हाल ही में बीमा (संशोधन) विधयेक 2021 को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

परिचय

कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमन ने 15 मार्च, 2021 को राज्यसभा में बीमा (संशोधन) बिल, 2021 को पेश किया था जिसे अब पारित किया जा चुका है। यह विधयेक, बीमा अधिनियम -1938 में संशोधन करता है। यह बीमा कारोबार के कामकाज के लिए एक ढांचा प्रदान करता है और बीमा से सम्बंधित सभी हितधारकों को विनियमित करता है। हालिया प्रस्तावित विधयेक भारतीय बीमा कंपनियों में अधिकतम विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने का प्रयास करता है।

क्या होता है बीमा

आर्थिक अवधारणा के अनुसार कोई भी घटक जो जोखिम को कम करे उसे बीमा कहते हैं। यह सामान्तया किसी बीमा कंपनी द्वारा प्रदत्त सेवा होती है जो साधरणतया दो प्रकार की होती है।

  • जीवन बीमा - यह किसी व्यक्ति के दुर्घटना से मृत्यु तक के जोखिम को वहन किया जाता है।
  • साधारण बीमा - इसे गैर जीवन बीमा भी कहते हैं यह परिसम्पत्तियों से जुड़े जोखिम का बीमा करता है।

भारत में बीमा बाजार

  • भारत के बीमा उद्योग में 57 बीमा कंपनियाँ हैं 24 जीवन बीमा व्यवसाय में हैं, जबकि 33 गैर-जीवन बीमाकर्ता हैं। जीवन बीमाकर्ताओं में, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। गैर-जीवन बीमा खंड में छह सार्वजनिक क्षेत्र के बीमाकर्ता हैं।
  • इन बीमा कंपनियों के अतिरिक्त, भारतीय साधारण बीमा निगम एक मात्र राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता है। भारतीय बीमा बाजार में अन्य हितधारकों के अंतर्गत अनुमोदित बीमा एजेंट, लाइसेंस प्राप्त एजेंट कॉर्पोरेट, दलाल, सामान्य सेवा केन्द्र, वेब-संग्राहक, सर्वेक्षक और स्वास्थ्य बीमा दावों के संबंध में सेवा प्रदान करने वाले तृतीय पक्ष प्रशासक (टीपीए) शामिल हैं।
  • बीमा विधि (संशोधन) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत किसी भी भारतीय बीमा कंपनी में विदेशी निवेश की उच्चतम सीमा में 26% से वृद्धि करते हुए इसे स्पष्ट रूप से 49% की समग्र सीमा तक बढ़ाने की व्यवस्था की गई है तथा इसके साथ ही भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण को सुरक्षित रखा गया है। अब इस नवीन विधयेक के द्वारा सीमा बढ़कर 74% करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • भारत में बीमा प्रवेशन, अर्थात् भारतीय बीमाकर्ताओं द्वारा प्राप्त प्रीमियम वित्तीय वर्ष 2015-16 में सकल देशी उत्पाद (जीडीपी) का 3.44% रहा है। इसके अंतर्गत भारत में प्रति व्यक्ति प्रीमियम अर्थात् बीमा घनत्व वित्तीय वर्ष 2015-16 में 54.7 अमरीकी डॉलर रहा है।
  • भारत में, बीमा क्षेत्र का समग्र बाजार आकार 2020 में 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
  • वित्तीय वर्ष 2012 से 2020 के दौरान, भारत में जीवन बीमा कंपनियों के नए व्यवसाय से प्रीमियम में 15% की सीएजीआर में वृद्धि हुई। यद्यपि कोरोना ने इस वृद्धि को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

विधयेक के महत्वपूर्ण विन्दु : मुख्य संसोधन

  • बिल बीमा अधिनियम -1938 में यह प्रावधान है कि विदेशी निवेशक किसी भारतीय बीमा कंपनी में 49% तक का पूंजी निवेश कर सकते हैं। अर्थात कम्पनी पर स्वामित्व भारतीयो का होना चाहिए परन्तु यह विधयेक विदेशी निवेश की इस सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% करता है और स्वामित्व और नियंत्रण के प्रतिबंध को हटाता है। यह विदेशी निवेश केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट अतिरिक्त शर्तों के अधीन हो सकता है।
  • बिल बीमा अधिनियम -1938 में कहा गया है कि बीमा कंपनियों को एसेट्स में एक न्यूनतम सीमा तक निवेश करना होगा, जोकि उनकी बीमा दावों संबंधी देनदारियों को चुकाने के लिए पर्याप्त हो। यह प्रावधान भारत में निगमित हुई बीमा कंपनी पर भी लागू होता है। यदि कम्पनी किसी अन्य देश में निगमित या किसी अन्य देश में स्थित है तो तो इन एसेट्स को भारत के किसी ट्रस्ट के पास होना चाहिए और ऐसे ट्रस्टी के अधिकार में होना चाहिए जोकि भारत का निवासी हो।

अधिनियम के स्पष्टीकरण के अनुसार यह प्रावधान भारत में निगमित हुई बीमा कंपनी पर भी लागू होगा:

  1. जिसकी न्यूनतम 33% पूंजी पर भारत के बाहर रहने वाले निवेशकों का स्वामित्व है,
  2. जिसकी गवर्निंग बॉडी के न्यूनतम 33% सदस्य भारत के बाहर रहते हैं।
  3. नवीनतम विधयेक इस प्रावधान का भी निरसन करता है।

विधयेक के लागू होने के प्रभाव :-

भारत का बीमा बाजार अत्यंत व्यापक है जो निरन्तर बढ़ रहा है। यह सत्य है कि विदेशी निवेश के बढ़ने से प्रौद्योगिकी आएगी तथा प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी होगी। भारत का अधिकांश बीमा क्षेत्र निजी हाथो में है जो लाभोन्मुख रहे हैं। परन्तु इस कदम के साथ भारतीय जीवन बीमा के विनिवेश को जोड़ने से कुछ चिंताएं अवश्य रहेंगी।

बीमा के सुधार के लिए हाल में की गई सरकारी पहल

सरकारी पहल

भारत सरकार ने बीमा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • केंद्रीय बजट 2019-20 के अनुसार, बीमा मध्यस्थों के लिए 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी गई थी।
  • दिसंबर 2020 में, उत्तराखंड ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को 'COVID-19 बीमा पॉलिसी' देने की अपनी योजना की घोषणा की।
  • नवंबर 2020 में, पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के साथ मिलकर, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ने ग्राहकों के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) शुरू करने की घोषणा की।
  • IRDAI ने बीमाकर्ताओं को बैंकों द्वारा जारी किए गए अतिरिक्त टियर 1 बॉन्ड में 10% तक का निवेश करने की अनुमति दी है, ताकि बैंकों के लिए योग्य निवेशकों के पूल का विस्तार करने के लिए उनकी टियर 1 पूंजी में वृद्धि हो सके।

निष्कर्ष

भारत का बीमा बाजार तेजी से बढ़ता बाजार है वर्तमान भारत में 110+ InsurTech स्टार्ट-अप संचालित हैं। इसके साथ ही साथ भारत में बीमा आम जन जीवन से सम्बंधित है अतः इस विषय पर निर्णय लेने में सावधानी आवश्यक है। यद्यपि सरकार स्वयं बीमा कंपनी के रूप में अपने दायित्व को कम कर रही है परन्तु यह अभी भी बीमा को इरडा के माध्यम से विनियमित कर सरकार भारतीय जनता के धन को सुरक्षित कर रही है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था
  • भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • हाल ही में भारत में बीमा अधिनियम में कुछ संसोधन प्रस्तुत किये गए हैं। इन संसोधनो के आलोक में भारत के बीमा बाजार का विश्लेषण करें