बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सामुदायिक जुड़ाव की आवश्यकता - समसामयिकी लेख

   

कीवर्ड्स : सामुदायिक संपर्क, साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण, अंतिम-मील चुनौतियां, गैर-जवाबदेह दृष्टिकोण, व्यर्थ व्यय, छूटी हुई समय-सीमा, विफल परिणाम, अनिश्चित वित्तीय प्रबंधन

संदर्भ:

  • कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं सार्वजनिक सूचना में कमी तथा विश्वास घाटे के कारण विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
  • यदि समुदायों को विश्वास में लेकर बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी हिस्सेदारी पर विचार किया जाए तो जहाँ एकतरफ उन्हें संभावित लाभ प्राप्त होगा वहीँ परियोजनाएं समय पर पूर्ण होंगी।

प्रमुख विन्दु

  • भारत जैसे बड़े राष्ट्र में विविधताओं के साथ स्थानीय मानकों की गहरी समझ की आवश्यकता है।
  • भूमि अधिग्रहण, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, वित्तीय और परियोजना प्रबंधन प्रणाली, राज्य और स्थानीय सरकारों की भागीदारी और सक्रियता, सड़कों का संरेखण, स्थानीय समुदायों का आंदोलन प्रायः बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विलम्ब का कारण बनते हैं।
  • यदि सार्वजनिक नीतियां बनाते समय सामुदायिक जुड़ाव, साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग और अंतिम-मील की चुनौतियों की गहरी समझ को ध्यान में रखा जाए तो परिणाम भिन्न होंगे।
  • उपरोक्त चार परिभाषित सफलता मानदंड न केवल गरीब जन कल्याण के लिए बेहतर होंगे बल्कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी ये अनिवार्य है।

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विफलताओं अथवा विलम्ब के उदाहरण

1. दूरसंचार क्षेत्र:

  • बीएसएनएल के माध्यम से दूरसंचार क्षेत्र में प्रयास और प्रत्येक पंचायत को ऑप्टिक फाइबर सेवा देने के प्रयास स्थानीय स्तर की सार्वजनिक सूचना से विपथगमन को प्रदर्शित करते हैं।
  • प्रायः जनता इस तथ्य से अनभिज्ञ होती है कि इन परियोजनाओं के क्या परिणाम होंगे। पंचायतों में परियोजनाओं के निष्पादन की समय-सीमा, और रखरखाव और अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए उत्तरदायी अधिकारीयों की गैर-जवाबदेह प्रवृत्ति तथा दृष्टिकोण के कारण परियोजना समय पर पूर्ण नहीं होती इसके साथ ही साथ अनावश्यक व्यय भी होता है।

2. भारतीय रेलवे:

  • यद्यपि भारतीय रेलवे वेंडर शीर्ष परियोजना निर्माणकर्ताओं में शुमार है परन्तु अभी भी यह अपनी दशकों पुरानी परियोजनाओं को लागू कर रहा है। इन परियोजनाओं को अनिश्चित वित्तीय प्रबंधन के अलावा भूमि अधिग्रहण की कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है।

3. विद्युत क्षेत्र:

  • बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) और नए अभिनव वित्तपोषण समर्थन में कई प्रयासों के उपरांत भी प्रदर्शन में सुधार करने में उनकी अक्षमता, स्थानीय सरकारों और समुदायों के साथ सामंजस्य की मूलभूत आवश्यकता को इंगित करती हैं। इस सामंजस्य से निर्बाध विद्युत् आपूर्ति तथा समयबद्ध बिद्युत बिल भुगतान को सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • अपने लक्ष्य तक पहुंचने में "उदय" की विफलताओं का पूरी तरह से विश्लेषण किया जाना चाहिए तथा एक समुदाय को जोड़ने के दृष्टिकोण को भविष्य की गतिविधियों में प्रयास करने की आवश्यकता है।
  • नागालैंड का ग्राम विकास बोर्ड इसका ज्वलंत उदाहरण है।

उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) योजना:

  • यह योजना "विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के वित्तीय परिवर्तन" में सुधार के लिए आरम्भ की गई थी।
  • बिजली कंपनियों के वितरण पैटर्न में कुछ खामियों के कारण ग्राहकों को बिजली वितरित करने के लिए उत्तरदायी DISCOMS कुछ वित्तीय संकट से गुजर रहे थे।

इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य रहे हैं - :

  • वित्तीय परिवर्तन
  • परिचालन सुधार
  • बिजली उत्पादन की लागत में कमी
  • अक्षय ऊर्जा का विकास
  • ऊर्जा दक्षता और संरक्षण
  • यह राज्य सरकारों को ( जिनके पास DISCOM का स्वामित्व है) 30 सितंबर, 2015 तक अपने ऋण का 75 प्रतिशत से अधिक लेने की अनुमति देता है, और उन्हें बांड बेचकर ऋणदाताओं को वापस भुगतान करता है।
  • राजकोषीय घाटे की गणना के लिए इस योजना के अधीन लिए गए ऋण को शामिल नहीं किया जाना है।
  • DISCOMs से अपने शेष 25 प्रतिशत ऋण के लिए बांड जारी करने की अपेक्षा की जाती है।
  • राज्यों के शामिल होने के लिए यह योजना वैकल्पिक है।
  • यह योजना केवल राज्य के स्वामित्व वाली DISCOMS पर लागू है।

योजना के सामने आने वाली चुनौतियाँ:

  1. उच्च सकल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी या वितरण) नुकसान।
  2. राज्य सरकारों द्वारा DISCOMs को अपर्याप्त बिजली सब्सिडी।
  3. आपूर्ति की औसत लागत और प्राप्त औसत राजस्व के बीच बढ़ता अंतर।
  4. राज्यों के लिए ऋण की अदायगी की बढ़ी हुई लागत के कारण खराब राज्य वित्त।

4. एनएचएआई परियोजनाएं

  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजनाओं ने देश भर में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए बहुत अच्छा काम किया है।
  • एनएचएआई विकास और नए निवेश के लिए एक नया अवसर रहा है।
  • हालांकि, परियोजनाओं के सामने आने वाली चुनौतियों में शामिल हैं:
  • भूमि अधिग्रहण में मुकदमेबाजी
  • अंडरपास जैसे राजमार्गों पर ग्रामीणों की आवाजाही के लिए सुविधाओं का निर्माण
  • टोल फ्री मूवमेंट अधिकार
  • राजमार्गों के किनारे जल निकासी
  • इन चुनौतियों से बेहतर जुड़ाव और समन्वय से निपटा जा सकता है जिससे राजमार्गों की गुणवत्ता, लागत और उपयोग के मानकों और आसपास के गांवों की सुविधा में सुधार होगा।
  • यह भूमि अधिग्रहण की लागत को कम करने में भी मदद कर सकता है जो आज एनएचएआई में एक बड़ी चुनौती है, जो ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की लागत का 30-40 प्रतिशत हिस्सा है।

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सफलता के उदाहरण

1. प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) कार्यक्रम:

ग्रामीण सड़कों के लिए पीएमजीएसवाई कार्यक्रम में निम्नलिखित नीतिगत निर्णय लिए गए थे -

  • भूमि अधिग्रहण के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाना था
  • यदि कोई निजी भूमि ग्राम संपर्क के संरेखण में आती है, तो व्यक्ति को स्वेच्छा से सड़क के लिए भूमि हस्तांतरित करनी होगी।
  • पीएमजीएसवाई परियोजना डिजाइन में स्थानीय समुदाय के लिए एक हिस्सेदारी बनाने के लिए बहुत सारी व्याख्या, संवादात्मक चर्चा और परियोजनाओं का गहन विश्लेषण अनिवार्य आवश्यकताएं हैं।
  • सभी राज्यों में आईआईटी और एनआईटी जैसे तकनीकी संस्थानों द्वारा जीआईएस मैपिंग के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के मसौदे का महत्वपूर्ण मूल्यांकन और परियोजनाएं उचित लागत पर गुणवत्ता सुनिश्चित करती हैं।

सड़क निर्माण में अपशिष्ट प्लास्टिक के उपयोग सहित स्थानीय सामग्रियों और नई प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना अनुमोदन प्रणाली का हिस्सा है, जिसके कारण विश्व बैंक ने पीएमजीएसवाई को वैश्विक स्तर पर एक उत्कृष्ट परियोजना के रूप में पेश किया है।

2. ग्राम स्वराज अभियान:

  • ग्राम स्वराज अभियान वंचित समुदायों की एक बड़ी आबादी वाले 63,974 गांवों में सात सार्वजनिक सेवाएं (बिजली, एलपीजी, बैंक खाता, एलईडी बल्ब, टीकाकरण, जीवन और दुर्घटना बीमा) देने से सम्बंधित एक अभियान है।
  • यह एक विकास प्रतिमान है जो सभी क्षेत्रो के लिए प्रतिमान है।
  • यह समयबद्ध परिणामों के लिए संपूर्ण सरकार, पूरे समाज, समुदाय के नेतृत्व वाली, प्रौद्योगिकी-आधारित और मानव संसाधन-आधारित प्रभावी निगरानी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के समूह सहित समुदायों के सहयोग से प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र ने पूर्ण समर्थन दिया।

अभियान के दौरान मासिक उज्ज्वला गैस कनेक्शन 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख से अधिक किया गया।

इसी तरह बिजली कनेक्शन 10 लाख से बढ़ाकर 19 लाख प्रति माह किया गया।

केस स्टडी

  1. जमशेदपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में टाटा स्टील के प्रयासों ने कंपनी के लिए व्यापक कार्यबल प्राप्त किया जिससे इस्पात निर्माण में प्रगति हुई।
  2. गुजरात से व्यापारी समुदाय की उदारता, अपने कार्यकर्ताओं को बड़े उपहार देने से उस राज्य में सहकारिता आंदोलन में महत्वपूर्ण प्रगति हुई।

आगे की राह :-

1. कार्यान्वयन समयरेखा:

  • यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कई गुना सुधार कर सकता है।

2. स्थानीय निकायों का सुदृढ़ीकरण:

  • संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में ग्राम पंचायतों की निगरानी के लिए 29 क्षेत्रों का प्रावधान है और बारहवीं अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों द्वारा पर्यवेक्षण के लिए 18 क्षेत्रों का प्रावधान है।
  • सामुहिक, सहकारिता और महिला संगठनों को भागीदारी में जगह उपलब्ध कराने के सचेत प्रयास से इन संस्थाओं को मजबूत किया जाए तो सभी क्षेत्रों को लाभ होगा।

3. रोजगार के लिए सुस्पष्ट नीति:

  • विनिर्माण और सेवाओं में रोजगार के अवसरों के लिए भीतरी इलाकों को विकसित करने के लिए एक सुस्पष्ट नीति की आवश्यकता है।
  • अप्रत्यक्ष रोजगार और अवसर समुदाय के सक्रिय सहयोग और इसके पुन: कौशल के साथ एक नियोजित गतिविधि होनी चाहिए।

निष्कर्ष:

  • स्थानीय समुदाय तर्कसंगत संस्थाएं हैं और उनके साथ विश्वास के संबंधों की आवश्यकता है।
  • हालांकि, स्थानीय समुदाय प्रायः इस तथ्य से अनभिज्ञ रहते हैं कि बेहतर इंफ़्रा परियोजनाओं तथा बेहतर कनेक्टिविटी से जीवन में परिवर्तन तथा आय में वृद्धि किस प्रकार होगी।
  • अधिक साझा विकास के लिए कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों को विकास प्रक्रिया से पूरी तरह से एकीकृत करना एक जैविक समुदाय संपर्क के माध्यम से आगे बढ़ने का एकमात्र तथा बेहतर तरीका है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3:
  • भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का एकत्रण , आर्थिक वृद्धि तथा विकास व रोजगार से संबंधित मुद्दे।
  • समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न होने वाले मुद्दे

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • अधिक साझे विकास के लिए कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों को पूरी तरह से एक जैविक समुदाय कनेक्ट के माध्यम से एकीकृत करना ही एकमात्र रास्ता है। बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामने आने वाली कई चुनौतियों के संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।