भारतीय टेक्सटाइल क्षेत्र: आत्मनिर्भरता का स्तम्भ - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


 भारतीय टेक्सटाइल क्षेत्र: आत्मनिर्भरता का स्तम्भ - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित (Reboot) करने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' की घोषणा की है। ऐसे में सरकार को पहले से ही आत्मनिर्भर क्षेत्रें, जिसमें वस्त्र उद्योग प्रमुख है, को विशेष बढ़ावा देने की आवश्यकता है। भारत सरकार द्वारा सहायता मात्र से ही भारतीय वस्त्र उद्योग वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभाने के साथ ही बड़ी मात्र में रोजगार उपलब्ध करा सकता हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को विशेष लाभ पहुंचेगा।

भारतीय वस्त्र उद्योग की महत्ता

  • भारत को वस्त्र मूल्य शृंखला के सभी क्षेत्रें में प्रचुर मात्र में कच्चे माल और विनिर्माण की सुविधाओं का अनूठा लाभ प्राप्त है लेकिन इसे अभी अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा के लिये कई काम करना होगा। वस्त्र और परिधान उद्योग, विदेशी मुद्रा अर्जन और रोजगार की दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रें में से एक है।
  • इस उद्योग की विशिष्टता इसके व्यापक विस्तार में है, जहां एक तरफ गहन पूंजी वाले मिल उद्यम हैं वहीं दूसरी ओर सूक्ष्म कारीगरी वाले हस्त उद्योग हैं।
  • विकेंद्रीकृत विद्युत से चलने वाले करघा और बुनाई क्षेत्र का वस्त्र उद्योग में सबसे बड़ा हिस्सा है। कपड़ा क्षेत्र में शामिल होने वाले प्रमुख उप क्षेत्रें में संगठित कपास, मानव निर्मित फाइबर कपड़ा मिल उद्योग, मानव निर्मित फाइबर/रेशा यार्न उद्योग, ऊन और ऊनी वस्त्र उद्योग, सेरीकल्चर और रेशम वस्त्र उद्योग, हथकरघा, पटसन, पटसन वस्त्र उद्योग और वस्त्र निर्यात शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार भारतीय वस्त्र उद्योग दुनिया में सबसे बड़े कच्चे माल के आधार हैं और विनिर्माण शृंखला में सबसे बड़ी ताकत हैं।
  • घरेलू वस्त्र और परिधान उद्योग भारत की जीडीपी में 2 प्रतिशत और निर्यात में 12 प्रतिशत का योगदान करता है। यह क्षेत्र बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें महिला श्रमिकों का वर्चस्व है। इसमें 70 प्रतिशत कार्यबल महिलाएं हैं।
  • यह एक ऐसा क्षेत्र है जो ग्रामीण महिलाओं की गरीबी दूर कर सकता है और भारत के बड़े हित में महिलाएं सशक्त हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त वस्त्र उद्योग भारत में कृषि क्षेत्र के बाद प्रत्यक्ष रूप से 10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

भारतीय वस्त्र उद्योग की समस्याएँ

  • भारतीय वस्त्र उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। यदि देश में कोई एक ऐसा क्षेत्र है जो आत्मनिर्भर है, तो वह है कपड़ा उद्योग। इसके बावजूद भी देखा जाये तो भारतीय वस्त्र उद्योग को बांग्लादेश कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही चीन वैश्विक कपड़ा बाजार में हावी होने का प्रयास कर रहा है।
  • भारतीय वस्त्र और परिधान क्षेत्र, बुनाई, प्रसंस्करण और परिधान के उप क्षेत्र में विखंडित हैं और वैश्विक बाजारों में सफलता के लिये इसमें अपेक्षित पैमाने का अभाव है। अधिकांश विनिर्माण इकाइयों में अल्प विनिर्माण क्षमताएं होती हैं जिससे वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना उनके लिये कठिन हो जाता है।
  • जहां भारत की कताई क्षमता वैश्विक स्तर की है, वहीं बुनाई और परिधान बनाने के बारे में भी ऐसा नहीं कहा जा सकता है। वास्तव में, देश में परिधान इकाइयों का औसत आकार 100 मशीनों का है। इसकी तुलना बांग्लादेश से करें तो पाएंगे कि, वहाँ प्रति कारखाने में कम से कम 500 मशीनें उपलब्ध हैं।
  • भारत में 5.8 मिलियन किसान कपास की खेती में लगे हैं। कपास के फाइबर, यार्न और कपड़े पर जीएसटी समान रूप से 5 फीसदी है। लेकिन मानव निर्मित फाइबर (man-made fibers) के लिए ऐसा नहीं है, बल्कि फाइबर के लिए 18 प्रतिशत, यार्न के लिए 12 प्रतिशत और कपड़े के लिए 5 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर लगाया जाता है। यह उलटा कर संरचना एमएमएफ वस्त्रें को महंगा बनाती है।
  • कुछ प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों ने बांग्लादेश जैसे देश को भारत के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने में सहायता प्रदान की है, जिन्हें भारतीय बाजार तक पहुँच के लिये शून्य शुल्क देना होता है।
  • वस्त्र निर्यात पिछले छह वर्षों 40 बिलियन के स्तर पर बना हुआ है (वित्त वर्ष 2015 में यह 42 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था)। भारत के कुल निर्यात में वस्त्रें की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019 में 12 प्रतिशत थी जबकि वित्त वर्ष 2016 में यह 15 प्रतिशत थी। इस अवधि के दौरान बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों ने कपड़ा निर्यात में काफी वृद्धि दर्ज की है।
  • बांग्लादेश का परिधान निर्यात 2015 में 2660 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2019 में 33 बिलियन डॉलर हो गया है। कुछ ही समय में वियतनाम दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक देश बन गया है। दूसरी ओर, भारत का परिधान निर्यात वित्त वर्ष 2017 में 18 बिलियन से घटकर वित्त वर्ष 2019 में 17 बिलियन हो गया।

आगे की राह

  • भारत का निर्यात प्रदर्शन कई कारणों से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। यह सामान्य व्यापार से संभव नहीं हो सकता। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि कपड़ा उत्पादों में विविधीकरण से भारत के निर्यात में हिस्सेदारी बढ़े तथा नये बाजारों का पता चले।
  • उद्योग द्वारा अपनाए जाने वाली पुरानी तकनीक को छोड़ना होगा और अपनी मशीनरी को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। पिछले कुछ दशकों में, कपड़ा उद्योग ने विश्व स्तर पर एक नया रूप देखा है। यद्यपि मूल मशीनों और उनकी प्रक्रियाओं का अभी भी उपयोग किया जा रहा है, वे मूल से अधिक तकनीकी रूप से उन्नत संस्करणों में विकसित हुए हैं। अब जो मशीनें कुशल मजदूरों द्वारा मैन्युअल रूप से काम में लाई जाती थीं उन्हें आवश्यक कपड़ा सामग्री बनाने के लिये कम्प्यूटरीकृत और प्रोग्राम किया जा सकता है।
  • भारत को वैश्विक बाजार में निर्यात बनाए रखने के लिये गुणवत्ता मुख्य आधार होना चाहिये, विशेषकर तब जब हम बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। बढ़ती आय के स्तर के साथ, खुदरा उद्योग के निरंतर वृद्धि से, कपड़ा क्षेत्र को भविष्य में मजबूत घरेलू खपत के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग के कारण उच्च भागीदारी का अनुभव होने की उम्मीद है।
  • सरकार द्वारा 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना को लागू करने के लिये गंभीर प्रयास और उपाय किये गये हैं ताकि कपड़ा उद्योग के विकास में तेजी आये। लेकिन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिये नवाचार और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने की पहल करने की आवश्यकता है। यदि हम वैश्विक क्षेत्र में अपने पदचिन्ह का विस्तार करना चाहते हैं तो हमें अभिनव और विशेष उत्पादों के साथ आना होगा। कपड़ा उद्योग की निरंतर वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकती है।
  • इस तरह की नीति का अनुसरण करते हुए, इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश के विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार को उन क्षेत्रें पर नजर नहीं खोनी चाहिए जो पहले से ही आत्मनिर्भर हैं और थोड़ी मदद से वैश्विक बाजार में एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

सामान्य अध्ययन पेपर-3

  • भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • ऐसे कौन से कारक हैं जिससे भारतीय वस्त्र उद्योग कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है ? साथ ही बताएं कि भारत का निर्यात प्रदर्शन किन कारणों से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है?