दुनिया में बढ़ता परमाणु जोखिम - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • 6 अगस्त और 9 अगस्त, 1945 जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए दो परमाणु बमों ‘लिटिल बॉय' और ‘फैट मैन’ ने लगभग 150,000 लोगों को सीधे जलाकर वाष्प में बदल दिया था; 130,000 अन्य लोगों की जलने, विकिरण से उत्पन्न बीमारी इत्यादि से मृत्यु हो गई थी क्योंकि परमाणु हमलें से ध्वस्त हो चुकी स्वास्थ्य प्रणाली के कारण इनका इलाज नहीं हो सका। 75 साल पहले घटित हुई इस भयावहता को याद करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु-सशस्त्र राज्य परमाणु हथियारों की वास्तविक प्रकृति को न भूलें। वर्तमान में, COVID-19 महामारी के कारण उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक-स्वास्थ्य आपातकाल के बीच प्रमुख शक्तियों के गैर-संवेदनशील व्यवहार ने भूराजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है जिससे परमाणु युद्ध का जोखिम बढ़ गया है।

SIPRI के अनुसार विश्व में कुल परमाणु हथियारों की स्थिति

  • शस्त्रीकरण, नि:शस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का आकलन करने वाली स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि परमाणु हथियारों की संख्या में कुल गिरावट के बावजूद परमाण शक्तियां अपने शस्त्रागारों का आधुनिकीकरण कर रही हैं।
  • रिपोर्ट में “चीन के द्वारा न्यूक्लियर ट्रायड को विकसित करने के प्रति आगाह किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार 2020 की शुरुआत में ‘‘नौ परमाणु संपन्न देशों - अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया- के पास कुल मिलाकर 13,400 परमाणु हथियार थे।
  • रिपोर्ट के अनुसार चीन के शस्त्रागार मे कुल 320 हथियार हैं, पाकिस्तान के पास 160 जबकि भारत के पास 150 हथियार हैं।
  • SIPRI की 2019 की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन के परमाणु पास 290 हथियार हैं जबकि भारत के पास 130 से 140 के करीब हथियार और पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार में 150 से 160 हथियार है।
  • रिपोर्ट के अनुसार परमाणु हथियारों के साथ अमेरिका शीर्ष पर है जिसके पास 5,800 परमाणु हथियार भंडार में और 1,570 तैनात है। इसके साथ कुल 6,375 परमाणु हथियारों के साथ रूस दूसरे नंबर पर है।

परमाणु बम से होने वाला नुकसान:

  • विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि परमाणु हथियारों के वर्तमान स्टॉक के एक अंश का उपयोग भी बड़े पैमाने पर मानव त्रासदी का कारण बन सकता है। इससे न सिर्फ जान का नुकसान होगा बल्कि भविष्य में भोजन और पानी की उपलब्धता, कृषि उत्पादन और जलवायु परिवर्तन पर दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ेगा।
  • परमाणु शक्ति सम्पन्न दो विरोधियों के बीच किसी भी परमाणु उपयोग से मानवीय आपदा आ सकती है।
  • हालांकि इसकी संभावना न के बराबर है कि कोई देश परमाणु प्रतिशोध के जोखिमों को देखते हुए भी जानबूझकर, पूरे होश में परमाणु हमले का सहारा लें।

परमाणु युद्ध को बढ़ावा देने वाले भूराजनीतिक तनाव:

  • विश्व भूराजनीतिक पटल पर दुनिया की महाशक्तियां के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढती जा रही है जिससे इस इन शक्तियों के बीच महायुद्ध होने की आशंका बढ़ती जा रही है। निम्नलिखित कुछ प्रमुख कारक हैं जिसने अनपेक्षित परमाणु आयुध के प्रयोग की संभावना को बढ़ाते हैं:
  • तनावपूर्ण अंतर-राज्य संबंधों ने अंतर-राज्य विश्वास को कम किया है।
  • उत्तर कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव
  • रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव
  • अमेरिका और चीन के बीच तनाव
  • भारत और उसके दो परमाणु-शक्ति सम्पन्न पड़ोसियों, चीन और पाकिस्तान के बीच तनाव।

परमाणु आयुध को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण

1. परमाणु हथियारों का अनियंत्रित रणनीतिक आधुनिकीकरण:

  • रूस और अमेरिका दोनों ही अपने परमाणु आयुध भंडार को बढ़ाने और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक और महंगे कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। विगत कुछ समय से यूनाइटेड किंगडम में भी इसी तरह की मांग की जा रही है।
  • चीन भी अपने परमाणु शस्त्रागार को अधिक मजबूत करने का लगातार प्रयास करता रहता है।
  • उत्तर कोरिया भी परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि करने का प्रयास कर रहा है।
  • पाकिस्तान के द्वारा भी लगातार परमाणु हथियारों के अपने जखीरे में वृद्धि की जा रही है।

2. वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था की विफलता:

  • 2010 की नई रणनीतिक हथियार न्यूनीकरण संधि (NEW START) की अवधि 2021 में समाप्त हो रही है। अमेरिकी प्रशासन ने इस संधि को नवीनीकृत के प्रति अपनी अनिच्छा व्यक्त की है।
  • इससे विश्व के सर्वाधिक परमाणु हथियारों वाले दो देशों के बीच परमाणु कार्यक्रमों के नियंत्रण को समाप्त कर देगा।
  • इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज़-INF संधि के तहत शीत युद्ध के दौरान 1987 में संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक परमाणु हथियार-नियंत्रण समझौता हुआ था, जिसमें दोनों देशों ने मध्यम-दूरी और कम दूरी की भूमि-आधारित परमाणु वारहेड ले जाने में सखम मिसाइलों की संख्या में कमी करने के लिए सहमत हुये थे।
  • 2 अगस्त 2019 को अमेरिका इस संधि से पीछे हट गया।
  • ईरान और P5+1 के बीच परमाणु वार्ता भी विफल हो गई है, ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुये अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने का प्रयास केआर रहा है।

3. आक्रामक परमाणु रवैया अपनाना:

  • देशों का प्रथम प्रयोग की नीति से पीछे हटना।
  • 'सीमित' परमाणु युद्ध की अवधारणा को समर्थन दिया जाना
  • उभरती प्रौद्योगिकियों ने परमाणु युद्ध की चिंताएं बढ़ाई हैं और इन नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होने वाले अज्ञात जोखिम से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • परमाणु कमान और नियंत्रण पर बढ़ते साइबर हमले
  • पारंपरिक हथियार प्रणाली और परमाणु हथियार प्रणाली वितरण के बीच बहुत कम अंतर से देश पहले पारंपरिक हथियार प्रणाली खरीदते है और फिर उसे परमाणु हथियारों के उपयोग के लिए उन्नयन किया जाता है।
  • परमाणु निर्णय लेने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश। हाल ही में ईरान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गलत उपयोग के चलते एक यात्री विमान पर मिसाइल हमला हो गया था।

परमाणु आयुध को कम करने के उपाय

  • संयुक्त राष्ट्र संकल्प A/C.1/71/L.41, जो परमाणु हथियारों के सम्पूर्ण उन्मूलन के लिए परमाणु हथियारों को रोक लगाने के लिए एक "कानूनी तरीके से बाध्यकारी साधन" आर बातचीत करने की जरूरत को उजागर करता है, की दिशा में आगें बाधा जाये
  • विदमान संस्थागत उपबंधों और देशों के मध्य परमाणु आयुध नियंत्रण संधि के प्रति संकल्प को अपनाते हुए सभी देशों द्वारा इसे पूरी प्रतिबद्धता से लागू किया जाए।
  • परमाणु हथियारों का इस्तेमाल ना करने के कठोर मानदंडों को लागु किया जाए।
  • जोखिम घटाने के लिए कार्रवाई के लिए नियमों का सेट तैयार किया जाए जिससे दुनिया को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से दूर और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ले जाया सके।
  • परमाणु अप्रसार की चुनौतियों के बदलते स्वरूपों की पहचान की जाए और उसके अनुरूप संस्थागत तंत्रों में बदलाव की अहमियत को समझा जाए।
  • बदलती दुनिया में निरस्त्रीकरण, अप्रसार और शस्त्र नियंत्रण के लिए दूरदर्शितापूर्ण उपायों को अपनाया जाए।
  • नेताओं और समाज के सभी हितधारकों के द्वारा परमाणु जोखिम के प्रति जागरूकता लाकर अपने सरकारों पर परमाणु अप्रसार नीतियों को अपनाने के लिए दवाब समूह के रूप में कार्य करें।

आगे का रास्ता

  • राष्ट्रों में परमाणु जोखिम के प्रति जागरूकता लाने के लिए नेताओं और समाज के सभी हितधारकों को परमाणु हथियारों के भौतिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण और मनोवैज्ञानिक प्रभावों से अवगत कराये जाने की आवश्यक है। इसे सबसे प्रभावी रूप से लोकप्रिय मीडिया के उपयोग के माध्यम से किया जा सकता है।
  • जिस तरह COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में इस संक्रामक रोग के विभिन्न पहलुओं के बारे में वैश्विक स्तर पर बड़ी तीव्रता से जानकारी के प्रसार के माध्यम से सफल बनाया जा रहा है, उसी तरह परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता के बारे में भी समान रूप एक सूचना प्रसारण अभियान चलाये जाने की आवश्यकता है।
  • इसके साथ ही वैश्विक मंचों के द्वारा राष्ट्राध्यक्षों को अपनी हथियार आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाने के लिए मजबूर किया जा सकता है जिससे राष्ट्रों में परमाणु जोखिम को कम करने के तरीके खोजने का एक नैतिक दबाव भी बनेगा। अंततः धीरे-धीरे परमाणु हथियारों के खात्मे की दिशा में मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

स्रोत: The Hindu