विदेश नीति में विज्ञान का बढ़ता महत्व - समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

कोरोना महामारी ने भारतीय विदेश नीति में विज्ञान तथा तकनीकी के महत्व को बढ़ा दिया है।

परिचय

  • कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित किया है। कम तकनीकी , गरीबी , स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव के कारण एशियाई देश इसके प्रति अधिक सुभेद्य हैं। इस स्थिति में भारत इस सम्पूर्ण क्षेत्र के लिए उम्मीद की एक किरण बन कर आया है।
  • भारत द्वारा चलाये जा रहे वैक्सीनमैत्री कैम्पेन द्वारा भारत ने अपने पड़ोसियों को कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराइ है। इस कैम्पेन ने भारत के विदेश नीति को अलग आयाम दिया है तथा आज भारत की विज्ञान तथा तकनीकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण कारक बन कर उभरी है।

मिशन वैक्सीन मैत्री

  • मिशन वैक्सीन मैत्री भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा एक कैम्पेन है जिसमे भारत सरकार विश्व के कई देशो में कोरोना के विरुद्ध टीकाकरण के लिए वैक्सीन भेजवा रही है।
  • भारत ने इस मिशन के अंतर्गत अपने नेबरहुड फर्स्ट की नीति का पालन किया है। भारत द्वारा श्रीलंका , भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स, अफगानिस्तान और मॉरीशस , कुवैत जैसे देशो में कोविड वैक्सीन भेजी है है।
  • भारत द्वारा इससे पहले भूटान को कोरोना वायरस के टीके की 1.5 लाख खुराक, मालदीव को एक लाख खुराक, नेपाल को 10 लाख, बांग्लादेश को 20 लाख, सेशल्स को 50 हजार, म्यामांर 15 लाख खुराक, मारिशस को एक लाख खुराक अब तक भेजे जा चुके हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए कई देशों को टीके मुहैया कराने के भारत के कदम की सराहना की है।

विदेश नीति के कारक के रूप में विज्ञान तथा तकनीक

स्वतंत्रता उपरान्त से ही भारत की विज्ञान तथा तकनीक को वैश्विक स्तर पर महत्व देने की नीति रही है। भारत द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में की गई प्रगति से सदैव अन्य देशो को लाभान्वित किया है

  • भारत की विदेश नीति में इसरो की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। इसरो द्वारा कई बार जापान , ऑस्ट्रेलिया , संयुक्त राज्य अमेरिका , भूटान , दक्षिण कोरिया जैसे काई देशो के लिए उपग्रह छोड़े गए हैं। इसरो भारत की स्पेस डिप्लोमेसी को एक महत्वपूर्ण आयाम देता है। भारत द्वारा उपग्रहों विमोचन अत्यंत कम लागत पर किया जाता है जिससे अपेक्षाकृत गरीब देश भी उपग्रहों के मदद से देश के विकास में सक्षम रहे हैं।
  • भारत द्वारा हिन्द महासागर के देशो के लिए आपदा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने में इसरो की भूमिका महत्वपूर्ण रही है जो भारत की विदेश नीति को मजबूत करती है।
  • डीआरडीओ भारत का एक अन्य महत्वपूर्ण रक्षा अनुसन्धान संगठन है। इसके द्वारा निर्मित शस्त्रो का निर्यात बांग्लादेश जैसे देशो को होता है। डीआरडीओ ने कई बार इजराइल , अमेरिका , रूस , फ्रांस के रक्षा संस्थाओ द्वारा संयुक्त कार्य करके इन देशो से भारत के सम्बन्धो को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • भारतीय आईटी क्षेत्रक भी विदेशी सम्बन्धो को सुधारने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत आज सम्पूर्ण विश्व के लिए आईटी पेशेवरों का मुख्य निर्यातक है। भारत से इंजीनियरिंग करके कई छात्र अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशो को अपना कार्यस्थल चुनते हैं यह भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को बढ़ाता है।
  • स्वास्थ्य तथा दवाओं के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारत मेडिकल टूरिज्म के लिए एक गंतव्य स्थल बना है। हाल ही में पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रदत्त आकड़ो से पता चला है कि 2019 में लगभग 7 लाख लोग भारत में इलाज करवाने आये हैं। यह अन्य देश के लोगो तथा भारतीय नागरिको के पीपल टू पीपल कॉन्टैक्ट को बढ़ाता है।
  • भारत द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा (सौर ऊर्जा , जैव ऊर्जा इत्यादि ) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सहयोग किया गया है जिसमे अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन एक महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में उभरा है।
  • कोरोना के दौर में भी भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सर्वप्रथम भारत के योग , प्राचीन विज्ञान तथा संयमित जीवनशैली ने लोगो में कोरोना के विरुद्ध रक्षणशक्ति प्रदान की वहीँ दूसरी तरफ भारत अपनी वैक्सीन की अन्य देशो में उपलब्धता सुनिश्चित कराकर एक उदहारण प्रस्तुत कर रहा है।
  • जहाँ कई अन्य देशो द्वारा राष्ट्रवादी वैक्सीन ( वैक्सीन पर मात्र उस देश के नागरिको का अधिकार ) की संकल्पना लाइ जा रही है वहीँ भारत द्वारा वैक्सीन मैत्री का अभियान भारत के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत को दर्शाता है।

भारत को होने वाले लाभ

  • इस प्रकार विदेश नीति में विज्ञान की बढ़ती भूमिका से भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी बढ़ेगी।
  • संयक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारत के प्रयासों को सराहा जाना भारत के बढ़ते कद का सूचक है।
  • अभी तक भारत के पड़ोसियों में भारत के प्रति बिग ब्रदर सिंड्रोम की भावना थी जो विश्वास घाटे को बढ़ाती थी । इस प्रकार के पहल उस विश्वास घाटे को कम करेंगे।
  • यह भारत की वैज्ञानिक प्रगति को दर्शाता है।

निष्कर्ष

आज भारत अर्थव्यवस्था , सैन्य शक्ति , सांस्कृतिक शक्ति के साथ साथ वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुका है। कहीं न कहीं इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि भारतीय आत्मनिर्भरता शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देकर विश्व के हित में है। जहाँ विश्व के अन्य विकसित देशो में राष्ट्रवादी वैक्सीन की अवधारणा चल रही थी वहीँ भारत ने वैक्सीन मैत्री से सम्पूर्ण विश्व को एक संदेश दिया है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 तथा 3
  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
     

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत की वैज्ञानिक प्रगति विदेश नीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है। क्या आप कथन से सहमत हैं ? आपने उत्तर के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करें ?